अभिषेक कुमार पाण्डेय स्टेट हेड रिपोर्टर छत्तीसगढ़
हमर प्रदेश सी जी
छत्तीसगढ़ में UCC पर कानूनी मंथन तेज: ‘एक विधान, सबके लिए सम्मान’ के फॉर्मूले पर अधिवक्ताओं ने दिया जोर, रायपुर में गरमाई बहस
रायपुर: छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता (UCC) को धरातल पर उतारने की कवायद अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिख रही है। शुक्रवार को राजधानी के सर्किट हाउस में उस वक्त कानूनी और संवैधानिक विमर्श का पारा चढ़ गया, जब प्रदेश भर के प्रमुख कानूनी दिग्गजों ने सरकार द्वारा गठित UCC ड्राफ्टिंग समिति के सामने दो-टूक सुझाव रखे। बंद कमरे में हुई इस उच्चस्तरीय बैठक में अधिवक्ताओं ने साफ लफ्जों में कहा कि नया कानून ऐसा हो, जो सिर्फ किताबों में नहीं बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति के जीवन में बराबरी और न्याय सुनिश्चित करे।

संविधान की कसौटी पर परखा जाए हर बिंदु
अधिवक्ता संघ, भाजपा विधि प्रकोष्ठ और अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद के संयुक्त प्रतिनिधिमंडल ने समिति के सामने अपना खाका पेश किया। कानूनी जानकारों का तर्क था कि भारत जैसे विविधतापूर्ण देश और छत्तीसगढ़ जैसे संवेदनशील आदिवासी बहुल राज्य में कानून का सर्वसमावेशी होना पहली शर्त है। अधिवक्ताओं ने जोर देकर कहा कि:
* किसी भी वर्ग, समुदाय या लैंगिक आधार पर अधिकारों का हनन न हो।
* महिलाओं के उत्तराधिकार, विवाह, तलाक और भरण-पोषण के मसलों पर व्यावहारिक व प्रगतिशील सुधार शामिल किए जाएं।
* कानूनी ढांचा संविधान की मूल भावना और सामाजिक समरसता को संतुलित करने वाला हो।
दिग्गज अधिवक्ताओं की मौजूदगी में हुआ ड्राफ्ट पर विमर्श
बैठक में कानूनी बिरादरी का नेतृत्व करते हुए अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष दिनेश देवांगन और भाजपा विधि प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक बृजेश पांडे ने समिति के समक्ष जमीनी कानूनी पेचीदगियों को रेखांकित किया। उनके साथ अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद के अध्यक्ष प्रमोद तिवारी, अधिवक्ता संघ के सचिव राकेश पुरी और उपाध्यक्ष भारती राठौर ने भी विवाह, संपत्ति और संरक्षण से जुड़े विभिन्न अधिनियमों पर अपने स्पष्ट बिंदु रखे।
प्रतिनिधिमंडल ने समिति को आगाह भी किया कि कानून केवल सैद्धांतिक न रहे, बल्कि इसकी भाषा और क्रियान्वयन इतना सुगम हो कि मुकदमों की बाढ़ आने के बजाय आम जनता को तुरंत न्याय मिले।
समिति ने दी हरी झंडी, सिफारिशों को ड्राफ्ट में जोड़ने का भरोसा
UCC समिति के सदस्यों ने अधिवक्ताओं द्वारा पेश किए गए कानूनी तर्कों, आपत्तियों और सुझावों को बेहद गंभीरता से दर्ज किया। समिति ने आश्वस्त किया कि अंतिम मसौदा (फाइनल ड्राफ्ट) तैयार करते समय इन सभी कानूनी व सामाजिक सिफारिशों को प्रमुखता से शामिल किया जाएगा। प्रदेश में जैसे-जैसे समिति की बैठकें आगे बढ़ रही हैं, यह साफ हो गया है कि छत्तीसगढ़ सरकार आगामी सत्रों में UCC को लेकर कोई बड़ा और कड़ा कदम उठाने की पूरी तैयारी में है।
अभिषेक कुमार पाण्डेय स्टेट हेड रिपोर्टर बिलासपुर छत्तीसगढ़


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