✍️ हमर प्रदेश छत्तीसगढ़ न्यूज़ | स्टेट हेड रिपोर्टर किशोर कुमार
रायपुर। छत्तीसगढ़ में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सियासी बहस तेज हो गई है। प्रदेश के पूर्व मंत्री मोहम्मद अकबर ने एसआईआर प्रक्रिया के बाद मतदाता सूची में दर्ज मतदाताओं की संख्या में आई कमी पर सवाल उठाते हुए निर्वाचन आयोग से मामले की समीक्षा करने की मांग की है।
विधानसभा चुनाव में जीत-हार के अंतर से चार गुना कमी का दावा
पूर्व मंत्री मोहम्मद अकबर के अनुसार, वर्ष 2023 के छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में भाजपा और कांग्रेस के बीच कुल मतों का अंतर 6 लाख 32 हजार 382 था, जो लगभग 4.04 प्रतिशत के बराबर था। उन्होंने दावा किया कि एसआईआर के बाद अंतिम मतदाता सूची में 24 लाख 99 हजार 823 मतदाताओं की कमी दर्ज की गई है। यह संख्या दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों के बीच मतों के अंतर से करीब चार गुना अधिक है।
अकबर के मुताबिक, इनमें से 19 लाख 13 हजार 540 मतदाताओं को ‘शिफ्टेड’ या ‘एब्सेंट’ श्रेणी में चिह्नित किया गया है।
अनुपस्थित मतदाताओं को लेकर जताई चिंता
मोहम्मद अकबर ने कहा कि रोजगार, शिक्षा, कामकाज और अन्य कारणों से कई लोग अपने पंजीकृत पते पर उपलब्ध नहीं हो पाते हैं। ऐसे में केवल किसी समय घर पर अनुपस्थित रहने या गणना प्रपत्र प्राप्त नहीं होने के आधार पर किसी मतदाता की पात्रता पर सवाल उठना चिंता का विषय है।
उन्होंने मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया में पारदर्शिता और निर्धारित कानूनी प्रावधानों के पालन पर जोर दिया। उनका कहना है कि पात्र नागरिकों को अपना पक्ष रखने और आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने का पर्याप्त अवसर मिलना चाहिए।
निर्वाचन आयोग से की समीक्षा की मांग
पूर्व मंत्री ने निर्वाचन आयोग से मांग की है कि ‘शिफ्टेड’ और ‘एब्सेंट’ श्रेणी में शामिल मतदाताओं के मामलों की व्यक्तिगत स्तर पर जांच की जाए। जिन मतदाताओं को नियमानुसार नोटिस या सुनवाई का अवसर नहीं मिला है, उन्हें अपनी बात रखने का मौका दिया जाए।
उन्होंने कहा कि जांच और सुनवाई के बाद पात्र पाए जाने वाले मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में दोबारा शामिल करने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जानी चाहिए।
मताधिकार सुरक्षित रखने पर दिया जोर
मोहम्मद अकबर ने कहा कि लोकतंत्र में प्रत्येक पात्र नागरिक के मताधिकार की रक्षा करना निर्वाचन आयोग की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। मतदाता सूची का पुनरीक्षण वास्तविक त्रुटियों को दूर करने के उद्देश्य से होना चाहिए, ताकि कोई भी पात्र नागरिक अपने संवैधानिक अधिकार से वंचित न हो।
उन्होंने आयोग से मामले में स्वयं संज्ञान लेकर आवश्यक कदम उठाने की मांग की, जिससे छत्तीसगढ़ में स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित किए जा सकें।
नोट: मतदाता सूची में कमी, विभिन्न श्रेणियों में दर्ज मतदाताओं की संख्या और नोटिस या सुनवाई से जुड़े दावों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी के आधार पर नहीं की गई है। ये आंकड़े और आरोप पूर्व मंत्री मोहम्मद अकबर के बयान के संदर्भ में प्रस्तुत किए गए हैं।
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