✍️ हमर प्रदेश छत्तीसगढ़ स्टेट हेड रिपोर्टर किशोर कुमार
रायपुर। शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) को अनिवार्य किए जाने के बाद छत्तीसगढ़ में करीब 85 हजार शिक्षकों के भविष्य को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। इनमें बड़ी संख्या ऐसे शिक्षकों की है, जो लंबे समय से सरकारी स्कूलों में सेवाएं दे रहे हैं। अब सेवारत शिक्षकों के लिए अलग टीईटी आयोजित करने की मांग जोर पकड़ रही है।
दूसरे राज्यों की पहल से बढ़ी उम्मीद
देश के कई राज्यों में लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों को टीईटी पात्रता हासिल करने के लिए अलग अवसर देने की तैयारी की जा रही है। मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और तमिलनाडु में सेवारत शिक्षकों के लिए विशेष या अलग टीईटी आयोजित करने की व्यवस्था पर काम चलने की बात सामने आई है।
दूसरे राज्यों की इस पहल के बाद छत्तीसगढ़ के सेवारत शिक्षकों में भी उम्मीद जगी है कि राज्य सरकार उनके लिए अलग टीईटी का अवसर दे सकती है।
85 हजार शिक्षकों को उत्तीर्ण करना जरूरी
छत्तीसगढ़ में करीब 85 हजार शिक्षकों के लिए टीईटी उत्तीर्ण करना जरूरी माना जा रहा है। इनमें ऐसे शिक्षक भी बड़ी संख्या में हैं, जो वर्षों से शिक्षा विभाग में अपनी सेवाएं दे रहे हैं और अनुभव के आधार पर लगातार अध्यापन कर रहे हैं।
ऐसे में शिक्षकों का कहना है कि लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों के लिए नियमित टीईटी के बजाय अलग परीक्षा या विशेष अवसर की व्यवस्था की जानी चाहिए, ताकि उनकी सेवा और अनुभव को भी ध्यान में रखा जा सके।
छत्तीसगढ़ में अभी स्थिति स्पष्ट नहीं
फिलहाल छत्तीसगढ़ में यह स्पष्ट नहीं है कि सेवारत शिक्षकों के लिए अलग टीईटी आयोजित की जाएगी या उन्हें नियमित CG TET में ही शामिल होना होगा। इसी वजह से हजारों शिक्षकों की नजर सरकार और शिक्षा विभाग के अगले निर्णय पर टिकी हुई है।
शिक्षक संगठनों की मांग है कि सरकार दूसरे राज्यों की व्यवस्था का अध्ययन करते हुए छत्तीसगढ़ में भी लंबे समय से कार्यरत शिक्षकों के लिए अलग टीईटी का अवसर उपलब्ध कराए। इससे शिक्षकों को राहत मिलने के साथ उनकी वर्षों की सेवा और अनुभव को भी उचित महत्व मिल सकेगा।
अब देखना होगा कि राज्य सरकार इस मांग पर क्या निर्णय लेती है और करीब 85 हजार प्रभावित शिक्षकों के लिए आगे क्या व्यवस्था तय की जाती है।
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