चीनी के बाद अब अंडों के दाम ने बढ़ाई चिंता, एक साल में 35-40% तक महंगे हुए अंडे
Friday, October 2 2026
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चीनी के बाद अब अंडों के दाम ने बढ़ाई चिंता, एक साल में 35-40% तक महंगे हुए अंडे

DHANIRAM- संपादक hamarpradeshcg.com
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चीनी के बाद अब अंडों के दाम ने बढ़ाई चिंता, एक साल में 35-40% तक महंगे हुए अंडे

चीनी के बाद अब अंडों के दाम ने बढ़ाई चिंता, एक साल में 35-40% तक महंगे हुए अंडे

 

 

। रोजमर्रा के खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतों के बीच अब अंडों के दाम में भी उल्लेखनीय तेजी देखने को मिल रही है। पिछले एक साल में अंडों की कीमत करीब 35 से 40 प्रतिशत तक बढ़ने की जानकारी सामने आई है। सर्दियों में अंडों की खपत बढ़ने के कारण आने वाले समय में कीमतों पर और दबाव पड़ने की संभावना जताई जा रही है।

 

नेशनल एग को-ऑर्डिनेशन कमेटी (NECC) से जुड़े बाजार आंकड़ों के अनुसार, पोल्ट्री फार्म स्तर पर एक अंडे की कीमत करीब 7 रुपये तक पहुंच गई है। वहीं खुदरा बाजारों में कई जगह अंडा करीब 8.50 से 9 रुपये प्रति नग की दर से बिक रहा है। अलग-अलग शहरों में स्थानीय आपूर्ति और मांग के अनुसार कीमतों में अंतर हो सकता है।

 

मक्का महंगा होने से बढ़ी पोल्ट्री फीड की लागत

 

अंडे की कीमत बढ़ने के पीछे पोल्ट्री फीड की बढ़ती लागत को अहम कारण माना जा रहा है। मुर्गियों के चारे में मक्का एक प्रमुख कच्चा माल है। दूसरी ओर, पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण बढ़ाने की नीति के चलते एथेनॉल बनाने के लिए भी मक्के की मांग तेजी से बढ़ी है।

 

इस दोहरी मांग का असर मक्के की उपलब्धता और कीमतों पर पड़ सकता है। फीड की लागत बढ़ने पर पोल्ट्री किसानों के लिए मुर्गियों का पालन महंगा हो जाता है। इसका असर आगे अंडों की उत्पादन लागत और बाजार कीमतों पर दिखाई देता है।

 

एथेनॉल उत्पादन में मक्के की बढ़ती भूमिका

 

देश में पेट्रोल के साथ एथेनॉल ब्लेंडिंग बढ़ाने की नीति के तहत अनाज आधारित एथेनॉल उत्पादन में तेजी आई है। मक्का इस क्षेत्र के महत्वपूर्ण फीडस्टॉक के रूप में उभरा है।

 

अनुमान के मुताबिक ESY 2025-26 में एथेनॉल उत्पादन के लिए करीब 125.78 लाख टन मक्का इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे पता चलता है कि एथेनॉल उद्योग में मक्के की मांग कितनी तेजी से बढ़ी है।

 

सरकार की ओर से भी एथेनॉल उद्योग की जरूरतों को पूरा करने के लिए मक्का उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।

 

किसानों के लिए बढ़ा मक्के का आकर्षण

 

आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में भी एथेनॉल के लिए मक्के की बढ़ती मांग के प्रभाव का उल्लेख किया गया है। एथेनॉल उद्योग में मक्के की मांग बढ़ने से किसानों के लिए इस फसल की खेती आर्थिक रूप से अधिक आकर्षक हुई है।

 

FY22 से FY25 के बीच मक्का आधारित एथेनॉल की प्रशासित कीमत में औसतन करीब 11.7 प्रतिशत सालाना वृद्धि दर्ज की गई। इससे मक्का उत्पादन की ओर किसानों का रुझान बढ़ने में मदद मिली है।

 

बढ़ती मांग का असर मक्का आयात पर भी

 

देश में फीड और एथेनॉल के लिए मक्के की खपत बढ़ने का असर आयात पर भी दिखाई दिया है। वर्ष 2024 में भारत ने करीब 8.9 लाख टन मक्का आयात किया था। म्यांमार और यूक्रेन से भी भारत को मक्का मिला।

 

भारत पहले मक्के का निर्यात करने वाले देशों में शामिल रहा है, लेकिन घरेलू स्तर पर फीड, एथेनॉल और अन्य औद्योगिक उपयोग की मांग बढ़ने से बाजार में उपलब्धता पर दबाव बढ़ा है।

 

हालांकि देश में मक्का उत्पादन भी बढ़ रहा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार 2024-25 में भारत का मक्का उत्पादन करीब 4.34 करोड़ टन रहा।

 

सिर्फ एथेनॉल को जिम्मेदार मानना सही नहीं

 

अंडों की कीमतों में तेजी को केवल एथेनॉल उद्योग में मक्के की बढ़ती मांग से जोड़ना पूरी तस्वीर नहीं होगी। पोल्ट्री सेक्टर में मौसम, मुर्गियों की उत्पादकता, फीड के दूसरे घटकों की कीमत, उत्पादन स्तर और बाजार में अंडों की उपलब्धता भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

 

मक्का और सोयाबीन जैसे प्रमुख फीड इनपुट महंगे होने पर पोल्ट्री किसानों की लागत बढ़ती है। इसके अलावा उत्पादन में कमी या मांग में अचानक वृद्धि होने पर भी अंडों की कीमत ऊपर जा सकती है।

 

सर्दियों में और बढ़ सकती है मांग

 

अंडों की खपत पूरे साल रहती है, लेकिन सर्दियों के दौरान आमतौर पर इसकी मांग बढ़ जाती है। ऐसे में यदि पोल्ट्री फीड और मक्के की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो बढ़ी हुई मांग के बीच अंडों के दाम पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।

 

हालांकि आने वाले दिनों में कीमत कितनी बढ़ेगी, यह कई परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। अंडों की आपूर्ति, पोल्ट्री उत्पादन, मौसम और फीड की लागत इसके प्रमुख कारक होंगे।

 

महंगाई की नई चिंता

 

चीनी और अन्य खाद्य वस्तुओं की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच अंडों की बढ़ती कीमत आम उपभोक्ताओं के बजट को प्रभावित कर सकती है। वहीं पोल्ट्री किसानों के लिए बढ़ती फीड लागत एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।

 

एक तरफ एथेनॉल उत्पादन बढ़ाने से पेट्रोल में मिश्रण और ऊर्जा आयात पर निर्भरता कम करने के लक्ष्य को मजबूती मिल रही है, तो दूसरी तरफ मक्के की बढ़ती मांग का असर पोल्ट्री फीड और अंडों की कीमतों पर दिखाई दे रहा है। आने वाले महीनों में मक्का उत्पादन, फीड लागत और अंडों की आपूर्ति इस पूरे बाजार की दिशा तय करेगी।

 

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Contributing writer at THE NEWS HUB. Covering the latest developments in खबरे काम की.

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