जयकिशन साहू... हमर प्रदेश छत्तीसगढ़ न्यूज
चार दिन से अंधेरे में बोराई क्षेत्र, बिजली गुल तो नल-जल और मोबाइल नेटवर्क भी ठप
79 साल की आजादी के बाद भी बदहाल तस्वीर
खंभे-तार टूटे, गांवों में पेयजल संकट, जिम्मेदारों को खबर तक नहीं
नगरी/बोराई। देश आजादी के 79 साल पूरे कर चुका है। सरकार डिजिटल इंडिया, विकसित भारत और गांव-गांव बुनियादी सुविधाएं पहुंचाने के दावे कर रही है, लेकिन धमतरी जिले के नगरी विकासखंड का बोराई क्षेत्र इन दावों से कोसों दूर नजर आ रहा है। नगरी ब्लॉक मुख्यालय से महज करीब 30 किलोमीटर की दूरी पर बसे बोराई, बुडरा, मैनपुर, घुटकेल बनियाडीही, लिखमा, कोटपार, और ,कारीपानी सहित आसपास के गांव पिछले चार दिनों से अंधेरे में डूबे हुए हैं। लगातार बारिश के बाद विद्युत व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। कई जगह बिजली के खंभे टूट गए हैं, तार जमीन पर लटक रहे हैं और ट्रांसफार्मर बंद पड़े हैं। बिजली गुल होने का सीधा असर पेयजल व्यवस्था पर पड़ा है। नल-जल योजना की मोटरें बंद होने से पानी की टंकियां नहीं भर पा रही हैं और ग्रामीणों को पेयजल के लिए नदी-नालों अथवा अन्य वैकल्पिक स्रोतों पर निर्भर होना पड़ रहा है। स्थिति यहीं तक सीमित नहीं है। बिजली बंद होने से क्षेत्र के मोबाइल नेटवर्क टावर भी प्रभावित हो गए हैं। पिछले चार दिनों से बड़ी आबादी मोबाइल नेटवर्क से कट गई है। ग्रामीण न तो किसी को फोन कर पा रहे हैं और न ही बाहरी दुनिया से आसानी से संपर्क हो पा रहा है। बारिश के कारण कच्चे और ग्रामीण मार्गों पर पानी भर जाने से आवागमन भी मुश्किल हो गया है। ऐसे में बिजली, पानी, सड़क और संचार—चारों व्यवस्थाओं के प्रभावित होने से बोराई क्षेत्र के ग्रामीण एक तरह से अलग-थलग पड़ गए हैं।
ग्रामीणों में इस स्थिति को लेकर भारी नाराजगी है। उनका कहना है कि शहर में यदि आधे घंटे के लिए बिजली चली जाए तो शिकायतों का दौर शुरू हो जाता है और जिम्मेदार अधिकारी व्यवस्था सुधारने में जुट जाते हैं, लेकिन बोराई क्षेत्र में लगातार चार दिनों से बिजली नहीं है। इसके बावजूद अब तक स्थायी समाधान के लिए जिम्मेदार विभाग की टीम मौके पर नहीं पहुंची है। बिजली नहीं होने से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। शाम होते ही घरों में अंधेरा छा जाता है। महिलाओं को घरेलू कामकाज में परेशानी हो रही है। बुजुर्गों और बीमार लोगों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। मोबाइल चार्ज नहीं होने के कारण आपात स्थिति में संपर्क करना भी चुनौती बन गया है। वहीं बिजली से संचालित नल-जल योजना बंद होने के कारण पेयजल की समस्या गंभीर होती जा रही है।

पुरानी कहानी दोहराती है हर बारिश, ग्रामीण परेशान
बोराई क्षेत्र के ग्रामीणों का कहना है कि बरसात यहां कोई नई घटना नहीं है। हर वर्ष मानसून आता है और कई दिनों तक बारिश होती है। ऐसे में कुछ दिनों की बारिश के कारण यदि बिजली, पानी और मोबाइल नेटवर्क जैसी आवश्यक सेवाएं लगातार बंद हो जाएं तो यह व्यवस्था की तैयारी पर सवाल खड़ा करता है। ग्रामीणों का सवाल है कि जब क्षेत्र में हर साल बारिश और प्राकृतिक आपदाओं की स्थिति बनती है, तो ऐसी परिस्थितियों से निपटने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं तैयार की जाती? ग्रामीणों ने कहा कि देश आजादी के 79 साल पूरे कर चुका है, लेकिन बोराई क्षेत्र के कई गांव आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। पहले यह क्षेत्र मध्यप्रदेश के बस्तर जिले का हिस्सा था और छत्तीसगढ़ बनने के 24 साल बाद भी यहां सड़क, बिजली, पेयजल और संचार जैसी सुविधाओं को लेकर समस्याएं बनी हुई हैं। ग्रामीणों का कहना है कि विकास की योजनाएं कागजों और शहरों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि दूरस्थ और वनांचल क्षेत्रों तक भी उनका वास्तविक लाभ पहुंचना चाहिए।
30 किलोमीटर दूर ब्लॉक मुख्यालय, फिर भी चार दिन के ब्लैकआउट की भनक नहीं
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