Tuesday, September 29 2026
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गोवा में वकीलों की सुरक्षा के लिए कड़ा कानून, 7 साल की जेल का प्रावधान; छत्तीसगढ़ में अब भी एडवोकेट्स प्रोटेक्शन एक्ट का इंतजार

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गोवा में वकीलों की सुरक्षा के लिए कड़ा कानून, 7 साल की जेल का प्रावधान; छत्तीसगढ़ में अब भी एडवोकेट्स प्रोटेक्शन एक्ट का इंतजार

अभिषेक कुमार पाण्डेय स्टेट हेड रिपोर्टर छत्तीसगढ़ 

 

गोवा में वकीलों की सुरक्षा के लिए कड़ा कानून, 7 साल की जेल का प्रावधान; छत्तीसगढ़ में अब भी एडवोकेट्स प्रोटेक्शन एक्ट का इंतजार

गोवा विधानसभा ने पारित किया विधेयक, धमकी मिलने पर पुलिस सुरक्षा का भी नियम; वहीं छत्तीसगढ़ में वर्षों से मांग कर रहे अधिवक्ताओं के हाथ अब तक खाली।

 

रायपुर / विशेष संवाददाता:

न्याय दिलाने में अहम भूमिका निभाने वाले अधिवक्ताओं की सुरक्षा को लेकर गोवा सरकार ने बड़ा और कड़ा कदम उठाया है। गोवा विधानसभा में 'गोवा एडवोकेट्स प्रोटेक्शन बिल, 2026' पारित कर दिया गया है, जिसके तहत ड्यूटी पर मौजूद वकीलों पर हमला करने वालों को 7 साल तक की जेल और 1 लाख रुपये तक के जुर्माने की सजा होगी। वहीं दूसरी ओर, इस फैसले के बाद छत्तीसगढ़ के कानूनी हलकों में एक बार फिर 'एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट' लागू करने की पुरानी मांग जोर पकड़ने लगी है।

गोवा में कानून के मुख्य प्रावधान

गोवा में पारित विधेयक के अनुसार:

 * कड़ी सजा: वकीलों पर ड्यूटी के दौरान हमला करने या बल प्रयोग करने पर संज्ञेय अपराध दर्ज होगा, जिसमें पुलिस आरोपी को बिना वारंट के गिरफ्तार कर सकेगी। गंभीर हमलों में 7 साल की जेल और 1 लाख रुपये जुर्माना, जबकि सामान्य हमलों में 2 साल तक की कैद और 50 हजार रुपये जुर्माने का प्रावधान है।

 * सुरक्षा और मुआवजा: धमकी का सामना कर रहे अधिवक्ताओं को सेशन कोर्ट से पुलिस सुरक्षा मिल सकेगी, जिसे कोर्ट की अनुमति के बिना वापस नहीं लिया जा सकेगा। साथ ही संपत्ति के नुकसान और मेडिकल खर्च की भरपाई का भी नियम है।

 * जांच प्रक्रिया: शिकायत दर्ज करने और जांच का अधिकार केवल डीएसपी (DSP) या उससे ऊपर के रैंक के अधिकारी के पास होगा, जिसे 7 दिनों के भीतर पूरा करना अनिवार्य है।

छत्तीसगढ़ में स्थिति: वादों के बीच वर्षों से जारी है अधिवक्ताओं का संघर्ष

गोवा की इस ठोस पहल के विपरीत, छत्तीसगढ़ में अधिवक्ताओं की सुरक्षा का मुद्दा लंबे समय से फाइलों और आश्वासनों तक ही सीमित है।

 * लंबे समय से लंबित मांग: राज्य बार कौंसिल और विभिन्न जिला बार एसोसिएशन वर्षों से छत्तीसगढ़ में 'एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट' लागू करने की मांग को लेकर लगातार ज्ञापन, प्रदर्शन और कार्य बहिष्कार करते आ रहे हैं।

 * बढ़ती घटनाएं और असुरक्षा: छत्तीसगढ़ में भी पैरवी के दौरान वकीलों को धमकियां मिलने, मारपीट होने और झूठे मामलों में फंसाने की घटनाएं समय-समय पर सामने आती रही हैं। इसके बावजूद राज्य में वकीलों को विशेष कानूनी सुरक्षा कवच नहीं मिल सका है।

 * अधिवक्ताओं का पक्ष: कानूनी जानकारों का कहना है कि जब तक अधिवक्ता सुरक्षित और भयमुक्त नहीं होंगे, तब तक आम जनता को निष्पक्ष न्याय मिलना मुश्किल है। गोवा और राजस्थान जैसे राज्यों की तर्ज पर छत्तीसगढ़ सरकार को भी विधानसभा में तत्काल प्रभाव से एडवोकेट प्रोटेक्शन बिल लाकर इसे कानून का रूप देना चाहिए।

गोवा में इस ऐतिहासिक कानून के पास होने के बाद अब छत्तीसगढ़ के अधिवक्ताओं की निगाहें राज्य शासन पर टिकी हैं कि आखिर उन्हें अपनी सुरक्षा के लिए यह कानूनी ढाल कब तक मिलेगी।

 

हमर प्रदेश सी जी 

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Contributing writer at THE NEWS HUB. Covering the latest developments in खबरे काम की.

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