गरियाबंद में कथित फर्जी शिक्षाकर्मी भर्ती का मामला फिर चर्चा में, 111 नामों की सूची से उठे सवाल
Tuesday, September 29 2026
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गरियाबंद में कथित फर्जी शिक्षाकर्मी भर्ती का मामला फिर चर्चा में, 111 नामों की सूची से उठे सवाल

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गरियाबंद में कथित फर्जी शिक्षाकर्मी भर्ती का मामला फिर चर्चा में, 111 नामों की सूची से उठे सवाल

गरियाबंद। जिले में वर्ष 2005 से 2007 के बीच हुई शिक्षाकर्मी भर्ती से जुड़े कथित फर्जीवाड़े का मामला एक बार फिर चर्चा में है। सामने आई एक सूची में जिले के अलग-अलग विकासखंडों में पदस्थ 111 शिक्षाकर्मियों के नाम होने का दावा किया गया है। सूची में कुछ अभ्यर्थियों के अंक, अंकसूची, अनुभव प्रमाण पत्र, शैक्षणिक दस्तावेज, खेल प्रमाण पत्र और अन्य रिकॉर्ड की वैधता पर सवाल उठाए गए हैं।

 

हालांकि, किसी सूची में नाम शामिल होना अपने आप में किसी व्यक्ति को दोषी साबित नहीं करता। संबंधित दस्तावेजों की आधिकारिक जांच और सक्षम प्राधिकारी के अंतिम निर्णय के बाद ही किसी नियुक्ति को फर्जी या नियम विरुद्ध माना जा सकता है।

 

मैनपुर ब्लॉक के सबसे ज्यादा नाम

 

बताई गई सूची में मैनपुर विकासखंड के बड़ी संख्या में शिक्षाकर्मियों के नाम शामिल हैं। इनमें कम अंक के बावजूद चयन, संदिग्ध अंकसूची, अनुभव प्रमाण पत्र में गड़बड़ी और दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराने जैसे अलग-अलग आरोपों का उल्लेख किया गया है।

 

सूची में हेमप्रकाश यादव, शत्रुघ्न बघेल, रूपेश्वर कश्यप, नरेंद्र कुमार मांझी, तनवीर सिंह ध्रुवा, यज्ञेश कुमार सोम, सुनाधार मांझी, ईश्वर सिंह मांझी, शेखरचंद यदुवंशी, मदन राम नायक, धोबलेश्वर साहू, वंदना कुरें, गोविंद राम यादव, हेमलाल नागेश, जगन्नाथ वैष्णव, प्रेमशीला साहू, कृष्ण कुमार प्रधान, विवेकानंद कश्यप, ओमप्रकाश नायक और खेमराज सिन्हा समेत कई नाम बताए गए हैं।

 

कुछ मामलों में अंक बेहद कम बताए गए हैं, जबकि कुछ अभ्यर्थियों की अंकसूची या अनुभव प्रमाण पत्र की जांच की आवश्यकता बताई गई है। सूची में योग, खेलकूद और अनुभव प्रमाण पत्रों से जुड़े मामलों पर भी सवाल उठाए गए हैं। कुछ नामों के संबंध में नियुक्ति के समय उम्र कम होने का दावा किया गया है।

 

फिंगेश्वर और गरियाबंद ब्लॉक भी सूची में

 

फिंगेश्वर विकासखंड से रेखराम साहू, गेंदराम साहू, आशा गोस्वामी, दुलारी साहू, रेखा साहू, मदन लाल निषाद, हेमलाल साहू, रामकुमार तारक, झुना यादव, अमरीका निषाद और कला कुमार सिन्हा के नाम शामिल बताए गए हैं।

 

इनमें अनुभव, अंकसूची, विकलांगता प्रमाण पत्र और डीएड प्रमाण पत्र की जांच की आवश्यकता का उल्लेख किया गया है।

 

गरियाबंद विकासखंड से बरिंद्र सिंह राजपूत, खेमराज यादव, प्रेमलता यादव, गोपीराम प्रजापति और कमल राम वर्मा के नाम सामने आने का दावा किया गया है। इनमें कमल राम वर्मा के सभी दस्तावेजों की जांच की आवश्यकता बताई गई है।

 

देवभोग और छुरा के नाम भी शामिल

 

देवभोग विकासखंड की सूची में शोभाराम नायक, प्रेमचंद नायक, भुवन लाल निधि, प्रेमचंद नागेश, सुशांत ठाकुर, दशमुख ठाकुर, दुलार सिंह नेताम, अनिल अवस्थी, चितेश्वर नागेश, दामोदर कश्यप, जाह्नवी डोंगरे और गजानंद पात्र के नाम बताए गए हैं।

 

कुछ मामलों में बीएड/डीएड डिग्री, अनुभव प्रमाण पत्र और अन्य दस्तावेजों की जांच की जरूरत बताई गई है।

 

छुरा विकासखंड से रोहित कुमार यादव, एवन लाल साहू, निरंजन साहू और नरोत्तम साहू के नाम सूची में होने का दावा किया गया है। इनके दस्तावेज या अनुभव संबंधी रिकॉर्ड पर भी सवाल उठाए गए हैं।

 

अन्य जिलों से जुड़े नाम भी सामने आए

 

दावों के अनुसार सूची में गरियाबंद के अलावा कांकेर, रायपुर, धमतरी, मगरलोड, नगरी, गोबरा-नवापारा, पलारी, दंतेवाड़ा, अभनपुर, आरंग, महासमुंद और बेमेतरा से जुड़े कुछ नाम भी शामिल हैं।

 

इनमें कैलाश पटेल, कमला देवांगन, नियम सिंह शांडिल्य, छन्त्री साहू, आरती ध्रुव, श्रद्धा सोन, चमेली पटेल, वंदना गजपाल, किरण छत्तर, कुलेश्वर निषाद, खेमराज वर्मा, मीता दास, गायत्री साहू, कमलेश माखीजा, नुपूर श्रीवास्तव, राजेश कुमार मार्कण्डेय और कमल नारायण मिश्रा समेत अन्य नाम बताए गए हैं।

 

पहले भी हो चुकी है जांच

 

उपलब्ध दावे के अनुसार, इस भर्ती प्रकरण की पूर्व में भी जांच हो चुकी है और 102 शिक्षाकर्मियों की बर्खास्तगी की बात सामने आती रही है। वहीं अन्य संदिग्ध नियुक्तियों पर कार्रवाई नहीं होने के आरोप भी लगाए जाते रहे हैं।

 

अब 111 नामों वाली सूची सामने आने के बाद पुराने मामले की दोबारा निष्पक्ष जांच की मांग उठ सकती है। विशेषकर उन मामलों में जहां अंकसूची, डिग्री, अनुभव प्रमाण पत्र या अन्य दस्तावेजों की वैधता पर सवाल दर्ज हैं।

 

कलेक्टर के तबादले को लेकर भी उठे सवाल

 

मामले को लेकर यह दावा किया जा रहा है कि प्रशासनिक स्तर पर फर्जी शिक्षाकर्मियों की सूची और जांच रिपोर्ट से संबंधित जानकारी मांगी गई थी। इसके कुछ समय बाद कलेक्टर का तबादला होने की बात भी कही जा रही है।

 

हालांकि, कलेक्टर के तबादले और इस भर्ती मामले के बीच सीधे संबंध की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इस दावे की आधिकारिक पुष्टि जरूरी है।

 

मूल दस्तावेजों की जांच की मांग

 

मामले में अब मांग उठ रही है कि सभी संदिग्ध नियुक्तियों के मूल दस्तावेजों की दोबारा जांच कराई जाए। अंकसूची, बीएड-डीएड प्रमाण पत्र, अनुभव प्रमाण पत्र, खेलकूद प्रमाण पत्र, आयु संबंधी रिकॉर्ड और चयन प्रक्रिया में प्राप्त अंकों का मूल रिकॉर्ड से मिलान किया जाए।

 

यदि जांच में किसी नियुक्ति में फर्जी दस्तावेज या नियमों का उल्लंघन प्रमाणित होता है, तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। वहीं जिन अभ्यर्थियों के दस्तावेज सही पाए जाते हैं, उनके संबंध में भी स्थिति स्पष्ट की जानी जरूरी है।

 

महत्वपूर्ण: इस खबर में शामिल नाम और आरोप उपलब्ध कराई गई सूची एवं दावों पर आधारित हैं। किसी भी व्यक्ति को दोषी ठहराने से पहले संबंधित विभाग की आधिकारिक जांच, दस्तावेजों का सत्यापन और सक्षम प्राधिकारी के अंतिम निर्णय को आधार माना जाना चाहिए।

 

हमर प्रदेश छत्तीसगढ़ | hamarpradeshcg.com

 

स्टेट रिपोर्टर — संतान दास माणिकपुरी

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Contributing writer at THE NEWS HUB. Covering the latest developments in खबरे काम की.

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