अभिषेक कुमार पाण्डेय स्टेट हेड रिपोर्टर छत्तीसगढ़
खेती की संजीवनी बनी सहकारिता: छत्तीसगढ़ में किसानों पर बरसी ₹904 करोड़ की मदद, बिना ब्याज पूंजी और खाद-बीज से संवरेगी फसल
बिलासपुर।
साहूकारों के चंगुल और कर्ज के दलदल से अन्नदाता को बाहर निकालने के लिए छत्तीसगढ़ की सहकारी व्यवस्था ने बड़ा दांव चला है। वर्ष 2026 में किसानों को सशक्त बनाने के लिए ₹904.80 करोड़ से अधिक का ऋण सीधे खेतों तक पहुंचाया गया है। इस वित्तीय संबल से न सिर्फ ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नई जान आई है, बल्कि छोटे और सीमांत किसानों के लिए समय पर उन्नत खेती की राह खुली है।
आंकड़ों में ऋण का सीधा गणित
| ऋण का प्रकार | वितरित राशि (करोड़ रुपये) | किसानों को सीधा लाभ |
|---|---|---|
| नगद ऋण | ₹732.07 करोड़ | जुताई, मजदूरी और दैनिक कृषि खर्चों के लिए सीधी नकदी |
| वस्तु ऋण | ₹172.73 करोड़ | सोसायटियों से सीधे उच्च गुणवत्ता के खाद और प्रमाणित बीज |
| कुल सहायता | ₹904.80 करोड़ | संस्थागत कृषि सुदृढ़ीकरण |
डबल इंजन की मारक नीतियां: शून्य ब्याज और ₹2 लाख तक नो-गारंटी
* ₹5 लाख तक 0% ब्याज: राज्य की प्राथमिक कृषि साख समितियां (PACS) किसानों को ₹5 लाख तक का अल्पकालीन फसली ऋण शून्य प्रतिशत ब्याज पर उपलब्ध करा रही हैं।
* बिना जमानत ₹2 लाख तक राहत: केंद्र सरकार की ब्याज सबवेंशन और केसीसी (KCC) सुधार नीतियों के तहत बिना किसी गिरवी या जमानत के ₹2 लाख तक के ऋण की सीमा तय की गई है।
व्यवस्था को पारदर्शी बनाने की सख्त ताकीद
भाजपा किसान मोर्चा के प्रदेश प्रवक्ता बी.पी. सिंह ने साफ किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की मंशा किसानों को बिचौलियों से मुक्त करने की है।
उन्होंने समितियों और विभागीय अधिकारियों को दो टूक चेतावनी देते हुए कहा:
> "ऋण वितरण में किसी भी स्तर पर ढिलाई या किसानों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं होगी। प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी, सरल और समयबद्ध होनी चाहिए, ताकि वास्तविक जरूरतमंद किसान को दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें।"
हमर प्रदेश सी जी

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