Thursday, October 1 2026
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खिसकती व्यवस्था, खामोश खाकी: सीपत नहर की छाती पर दौड़ रहे भारी वाहन, जल संसाधन विभाग की शिकायत भी मस्तूरी पुलिस ने दबाई?

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खिसकती व्यवस्था, खामोश खाकी: सीपत नहर की छाती पर दौड़ रहे भारी वाहन, जल संसाधन विभाग की शिकायत भी मस्तूरी पुलिस ने दबाई?

खिसकती व्यवस्था, खामोश खाकी: सीपत नहर की छाती पर दौड़ रहे भारी वाहन, जल संसाधन विभाग की शिकायत भी मस्तूरी पुलिस ने दबाई?

मस्तूरी (बिलासपुर)। कानून की अनदेखी जब रसूख के पहियों तले दबने लगे, तो सरकारी व्यवस्था की लाचारी खुलकर सामने आ जाती है। मस्तूरी थाना क्षेत्र अंतर्गत सीपत नहर मार्ग इन दिनों इसी प्रशासनिक बेबसी का गवाह बना हुआ है। जहाँ नियमों को ताक पर रखकर भारी भरकम वाहनों का काफिला सरकारी संपत्ति को रौंदते हुए बेधड़क दौड़ रहा है, और रोकने की जिम्मेदारी संभालने वाली पुलिस रहस्यमयी चुप्पी साधे बैठी है।

बैरिकेड तोड़े, आदेश कुचले: उद्योगपतियों की खुली मनमानी

खारंग जलाशय (जल संसाधन विभाग) ने नहर की संरचना और आम जनजीवन की सुरक्षा के मद्देनजर इस मार्ग पर भारी वाहनों की आवाजाही को पूरी तरह प्रतिबंधित कर रखा था। इसके लिए बाकायदा सीमांकन, बैरिकेडिंग और चेतावनी बोर्ड लगाए गए थे।

हैरानी की बात यह है कि उद्योगपतियों और ट्रांसपोर्टरों ने नियमों का पालन करने के बजाय उन सरकारी बोर्ड और बैरिकेड्स को ही तोड़ डाला। अब दिन-रात क्षमता से अधिक भारी वाहन इस संकरे नहर मार्ग पर सरपट दौड़ रहे हैं, जिससे न केवल मार्ग जर्जर हो रहा है बल्कि हर पल बड़े हादसे की आशंका बनी हुई है।

विभाग ने दी लिखित शिकायत, पर पुलिस के हाथ बंधे क्यों?

मामले में सबसे चौंकाने वाला पहलू पुलिस की कार्यप्रणाली है:

आधिकारिक रिपोर्ट: खारंग जलाशय प्रबंधन ने सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और अवैध परिवहन के खिलाफ मस्तूरी थाने में बाकायदा लिखित शिकायत दर्ज कराई।

शून्य कार्रवाई: शिकायत के बावजूद थाने से कोई सख्त कदम नहीं उठाया गया; न तो गाड़ियाँ जब्त हुईं और न ही मनमानी करने वालों पर कोई शिकंजा कसा।

सवालों से किनारा: मामले की हकीकत और कार्रवाई न होने की वजह जानने जब मस्तूरी थाना प्रभारी से फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने बात करना मुनासिब नहीं समझा।

सिस्टम पर बड़ा सवाल

जब एक सरकारी विभाग अपनी ही संपत्ति और सार्वजनिक मार्ग की सुरक्षा के लिए पुलिस से गुहार लगाकर लाचार साबित हो रहा हो, तो आम नागरिक की सुरक्षा की गारंटी कौन देगा? क्या पुलिस का यह मौन किसी रसूखदार दबाव का परिणाम है, या फिर उद्योगपतियों की मनमानी के आगे खाकी वाकई बेबस हो चुकी है?

 

 

अभिषेक कुमार पाण्डेय स्टेट हेड रिपोर्टर बिलासपुर छत्तीसगढ़ 

 

हमर प्रदेश सी जी 

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Contributing writer at THE NEWS HUB. Covering the latest developments in अपराध.

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