✍️ हमर प्रदेश छत्तीसगढ़ स्टेट हेड रिपोर्टर किशोर कुमार
कोरबा। छत्तीसगढ़ की ऊर्जाधानी कोरबा में पर्यावरण नियमों के उल्लंघन के मामले में बड़ी कार्रवाई सामने आई है। NTPC पर अवैध तरीके से फ्लाई ऐश (राखड़) डंप करने के आरोप में 90 लाख रुपये की क्षतिपूर्ति राशि अधिरोपित की गई है। पर्यावरण संरक्षण मंडल की कार्रवाई के बाद औद्योगिक क्षेत्र में हड़कंप मच गया है।
🚛 निर्धारित स्थान के बजाय छुरी में डंप की जा रही थी राख
जानकारी के अनुसार, NTPC के धनरास स्थित राखड़ डैम से राख लेकर निकले वाहनों को निर्धारित स्थान पर राख पहुंचानी थी। आरोप है कि इसके बजाय राख को छुरी क्षेत्र में अनधिकृत स्थान पर डंप किया जा रहा था।
बताया गया कि 31 अगस्त की रात पर्यावरण संरक्षण मंडल के अधिकारियों को इस संबंध में सूचना मिली। सूचना के बाद टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच की।
🔍 जांच में चार वाहन मिले
पर्यावरण संरक्षण मंडल के अधिकारियों के अनुसार, छुरीखुर्द के पास स्थित एक सब स्टेशन के आसपास चार राख लोडेड वाहनों को परिवहन और डंपिंग करते पाया गया। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि राख को निर्धारित स्थान के बजाय दूसरे स्थान पर डंप किया जा रहा था।
पर्यावरण संरक्षण मंडल के रीजनल ऑफिसर प्रसन्ना सोनकर के अनुसार, मौके पर जांच के दौरान नियमों का उल्लंघन पाया गया, जिसके बाद NTPC पर 90 लाख रुपये की क्षतिपूर्ति राशि अधिरोपित की गई।
⚖️ करीब 6 हजार टन राख डंप करने का अनुमान
अधिकारी के मुताबिक, इस राख को NHAI के अभनपुर क्षेत्र में निर्धारित कार्य के लिए भेजा जाना था, लेकिन इसे छुरी के पास डंप किए जाने की बात सामने आई है। प्रारंभिक अनुमान के अनुसार करीब 6,000 टन राख डंप किए जाने की जानकारी है। इसी मात्रा के आधार पर पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति की गणना करते हुए 90 लाख रुपये की राशि निर्धारित की गई।
🌱 पर्यावरण को नुकसान का खतरा
फ्लाई ऐश का खुले और अनधिकृत स्थानों पर डंपिंग करने से आसपास की हवा, पानी और जमीन प्रभावित होने का खतरा रहता है। पावर प्लांट से निकलने वाली राख के वैज्ञानिक एवं सुरक्षित निपटान के लिए निर्धारित नियमों का पालन करना जरूरी है।
कोरबा में पावर प्लांटों से बड़ी मात्रा में फ्लाई ऐश निकलती है। ऐसे में राख के सुरक्षित परिवहन और निपटान में लापरवाही पर्यावरण के साथ-साथ स्थानीय लोगों के लिए भी परेशानी का कारण बन सकती है।
💰 परिवहन व्यवस्था पर भी उठ रहे सवाल
स्थानीय स्तर पर लंबे समय से यह चर्चा होती रही है कि पावर प्लांटों से निकलने वाली राख को निर्धारित स्थान तक पहुंचाने के बजाय कई बार आसपास के क्षेत्रों में डंप कर दिया जाता है। इससे जहां पर्यावरणीय नुकसान का खतरा रहता है, वहीं परिवहन व्यवस्था और अनुबंधित एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठते हैं।
NTPC पर हुई 90 लाख रुपये की कार्रवाई को पर्यावरण संरक्षण मंडल की सख्ती के तौर पर देखा जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर आगे भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
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