कल तक सीमा पर मोर्चा और किचन संभाला, आज जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल: 400 BSF रसोइयों की अनसुनी दास्तान
जिन हाथों ने देश की सीमाओं पर तैनात पहरेदारों के लिए चूल्हा जलाया, 'ऑपरेशन सिंदूर' जैसे संवेदनशील अभियानों में जांबाजी दिखाई और अफसरों से बढ़िया खाने के लिए नकद इनाम बटोरे—आज वही हाथ अपनी आजीविका बचाने के लिए दिल्ली के जंतर-मंतर पर न्याय की गुहार लगा रहे हैं।

बहाली की मांग को लेकर सीमा सुरक्षा बल (BSF) के करीब 400 बर्खास्त ट्रेडसमैन (कुक और वॉटर कैरियर) 9 अक्टूबर से जंतर-मंतर पर अनशन शुरू करने जा रहे हैं। प्रशासन के माथे पर चिंता की लकीरें साफ हैं; दिल्ली पुलिस दो दिन के अनशन की जगह जवानों पर केवल एक दिन की सांकेतिक भूख हड़ताल का दबाव बना रही है।
ठगी का शिकार या प्रशासनिक पेच?
यह मामला महज नौकरी जाने का नहीं, बल्कि एक बड़े साइबर सिंडिकेट और व्यवस्था की चूक का नतीजा है:
* शर्त जो कभी पूरी हो ही नहीं सकती थी: 2023-24 में जब बीएसएफ ने रसोइयों और जलवाहकों की भर्ती निकाली, तो नेशनल स्किल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (NSDC) के तहत NSQF लेवल-1 सर्टिफिकेट अनिवार्य किया गया।
* आरटीआई का विस्फोटक खुलासा: NSDC से मांगी गई आरटीआई (संख्या: NSDCO/R/E/26/00096) में यह बात सामने आई कि संस्था ने 2015 से 2023 के बीच इस श्रेणी का कोई सर्टिफिकेट जारी ही नहीं किया था।
* साइबर गिरोह के चंगुल में फंसे युवा: भर्ती में शामिल होने की होड़ में देश के दूर-दराज इलाकों से आए ये साधारण युवा फर्जी ट्रेनिंग सेंटरों और साइबर ठगों के जाल में फंस गए और उन्हें फर्जी दस्तावेज थमा दिए गए।
> "इन लड़कों ने कोई जालसाजी नहीं की, ये खुद एक बड़े साइबर फ्रॉड का शिकार हुए हैं। जब सिस्टम ने ही आठ साल तक वह सर्टिफिकेट जारी नहीं किया, तो फिर बच्चों को कसूरवार ठहराकर सड़क पर क्यों धकेला गया?"
> — रणबीर सिंह, महासचिव, अलायंस ऑफ ऑल एक्स पैरामिलिट्री फोर्सेस वेलफेयर एसोसिएशन
रोजगार मेले का तमगा, अब लाखों का कर्ज
विडंबना यह है कि इन सभी युवाओं को खुद प्रधानमंत्री रोजगार मेले में नियुक्ति पत्र बांटे गए थे। वर्दी मिलने के बाद इन्होंने सेना और पैरामिलिट्री के कठोर मानकों पर काम किया।
आज स्थिति यह है:
* कर्ज का दलदल: भर्ती होने के बाद कई जवानों ने अपने परिवारों के लिए 5 से 7 लाख रुपये तक के बैंक लोन ले लिए। अब नौकरी छिनने के बाद ईएमआई और बैंक रिकवरी का खौफ सिर पर है।
* रोजी-रोटी का संकट: घरों में चूल्हा बुझने की नौबत है, जबकि ये वही लोग हैं जो सीमाओं पर दूसरों का पेट भरते थे।
प्रधानमंत्री को आखिरी चिट्ठी
जंतर-मंतर पर उतरने से पहले इन जवानों ने प्रधानमंत्री को एक भावुक ईमेल भेजकर अपनी पीड़ा बयां की है और सेवा में पुनः बहाली की मांग की है।
अब 9 अक्टूबर को देश की राजधानी यह देखेगी कि सरहद पर देश की सेवा करने वाले 400 जवान 'अलायंस ऑफ ऑल एक्स पैरामिलिट्री फोर्सेस वेलफेयर एसोसिएशन' के झंडे तले अपनी ही व्यवस्था से अपने हक की रोटी कैसे मांगते हैं।
अभिषेक कुमार पाण्डेय स्टेट हेड रिपोर्टर बिलासपुर छत्तीसगढ़
हमर प्रदेश सी जी
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