Wednesday, September 30 2026
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आरटीई के दाखिले पर हाईकोर्ट सख्त: अब सामने आएगा स्कूलों में आरक्षित सीटों का पूरा हिसाब

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आरटीई के दाखिले पर हाईकोर्ट सख्त: अब सामने आएगा स्कूलों में आरक्षित सीटों का पूरा हिसाब

आरटीई के दाखिले पर हाईकोर्ट सख्त: अब सामने आएगा स्कूलों में आरक्षित सीटों का पूरा हिसाब

 

किस स्कूल में कितनी सीटें आरक्षित, कितने बच्चों को मिला प्रवेश और कितनी सीटें अब भी खाली? हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से मांगा विस्तृत ब्योरा

 

बिलासपुर। प्रदेश में शिक्षा के अधिकार अधिनियम (RTE) के तहत बच्चों के प्रवेश और आरक्षित सीटों के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से विस्तृत जानकारी तलब की है। मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश कृष्ण राम महापात्र एवं न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच में हुई।

 

मामले में जनहित समेत कुल 13 याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को तीन सप्ताह के भीतर विस्तृत हलफनामा पेश करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही प्रदेश के प्रत्येक स्कूल में RTE के तहत आरक्षित सीटों की वास्तविक स्थिति का पूरा ब्यौरा मांगा गया है।

 

हाईकोर्ट के सवालों से बढ़ी जवाबदेही

 

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने राज्य सरकार से यह स्पष्ट करने को कहा कि RTE अधिनियम, 2009 की धारा 12(1)(c) को प्रभावी रूप से लागू करने के लिए वर्तमान में कौन-कौन सी SOP (स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर) अपनाई जा रही है।

 

सरकार को एक विस्तृत चार्ट भी प्रस्तुत करना होगा, जिसमें छत्तीसगढ़ के प्रत्येक स्कूल में RTE के तहत आरक्षित कुल सीटों की संख्या, उन सीटों पर हुए प्रवेश और वर्तमान में रिक्त सीटों की जानकारी स्पष्ट रूप से दर्ज होगी।

 

यानी अब सिर्फ आंकड़ों तक मामला सीमित नहीं रहेगा, बल्कि स्कूलवार यह तस्वीर सामने आएगी कि RTE के लिए कितनी सीटें तय थीं और वास्तव में कितने बच्चों को उनका लाभ मिला।

 

5 अक्टूबर को अगली सुनवाई

 

राज्य सरकार की ओर से उप महाधिवक्ता ने हाईकोर्ट से मामले की अगली सुनवाई 5 अक्टूबर 2026 को रखने का अनुरोध किया। कोर्ट ने निर्देश दिया कि अगली सुनवाई से सात दिन पहले शपथपत्र दाखिल किया जाए और उसकी एक प्रति याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ताओं को भी उपलब्ध कराई जाए।

 

अब सवाल सिर्फ दाखिले का नहीं, पूरे सिस्टम का है

 

हाईकोर्ट के इस निर्देश के बाद RTE के तहत निजी स्कूलों में होने वाले प्रवेश की प्रक्रिया और सीटों की वास्तविक स्थिति पर नजरें टिक गई हैं। सरकार द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले स्कूलवार आंकड़ों से यह भी स्पष्ट होने की उम्मीद है कि कितनी सीटें आरक्षित थीं, कितने प्रवेश हुए और कितनी सीटें खाली रह गईं।

 

अब 5 अक्टूबर की सुनवाई में सरकार के हलफनामे और आंकड़ों पर सबकी नजर रहेगी—क्योंकि पहली बार सवाल सिर्फ RTE के नियमों का नहीं, बल्कि उसके जमीनी क्रियान्वयन का है।

 

अभिषेक कुमार पाण्डेय स्टेट हेड रिपोर्टर बिलासपुर छत्तीसगढ़

 

हमर प्रदेश सी जी

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Contributing writer at THE NEWS HUB. Covering the latest developments in खबरे काम की.

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