✍️ हमर प्रदेश छत्तीसगढ़ स्टेट हेड रिपोर्टर किशोर कुमार
भिलाई। रिसाली नगर निगम में CSR मद से करीब ₹30 लाख की लागत से तैयार कराया गया नया स्वर्ग रथ (शव वाहन) तकनीकी खामियों के चलते विवादों में घिर गया है। आरोप है कि जिस वाहन को अंतिम यात्रा के लिए तैयार किया गया, उसकी लंबाई ही सामान्य अर्थी की लंबाई से कम है। करीब 8 फीट की अर्थी के मुकाबले 7 फीट लंबे स्वर्ग रथ की डिजाइन को लेकर जनप्रतिनिधियों ने गंभीर सवाल उठाए हैं।
तकनीकी खामियों के बाद नोएडा भेजा गया वाहन
जानकारी के अनुसार, CSR मद से मिले इस स्वर्ग रथ में तकनीकी खामियां सामने आने के बाद इसे जून माह में सुधार के लिए नोएडा की संबंधित एजेंसी के पास भेजा गया था। लेकिन करीब दो महीने बीत जाने के बाद भी वाहन वापस रिसाली नगर निगम नहीं पहुंचा है।
वाहन के लंबे समय से बाहर रहने के कारण नगर निगम की व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। एक लाख से अधिक आबादी वाले रिसाली शहर में वर्तमान में केवल एक स्वर्ग रथ उपलब्ध बताया जा रहा है। ऐसे में नया वाहन सुधार के नाम पर लंबे समय से बाहर रहने से जरूरत के समय नागरिकों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
डिजाइन और सुविधाओं पर भी सवाल
जनप्रतिनिधियों ने स्वर्ग रथ की डिजाइन, लंबाई और उपलब्ध सुविधाओं को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि शव वाहन तैयार कराने से पहले उसकी उपयोगिता, मानक और तकनीकी आवश्यकताओं का उचित परीक्षण किया जाना चाहिए था।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि सामान्य अर्थी करीब 8 फीट की होती है, तो उससे कम लंबाई वाले वाहन की डिजाइन कैसे तैयार की गई? क्या वाहन तैयार कराने से पहले संबंधित अधिकारियों ने तकनीकी मापदंडों की जांच की थी? और यदि वाहन में खामियां थीं, तो उसे तैयार कराने में करीब ₹30 लाख की राशि खर्च करने से पहले परीक्षण क्यों नहीं किया गया?
उच्चस्तरीय जांच की मांग
मामले को लेकर जनप्रतिनिधियों ने निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उनका कहना है कि CSR मद से खर्च की गई इतनी बड़ी राशि के बावजूद यदि वाहन उपयोग के योग्य नहीं है और सुधार के लिए लंबे समय से बाहर है, तो इसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
अब सवाल यह है कि स्वर्ग रथ कब तक वापस आएगा, उसमें बताई जा रही तकनीकी खामियां वास्तव में क्या हैं और ₹30 लाख की लागत वाले इस प्रोजेक्ट में मानकों का पालन किस स्तर पर हुआ?
इन सवालों के जवाब जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगे।
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