Monday, September 28 2026
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अंधविश्वास और ढोंग के खिलाफ 35 वर्षों से मिसाल: बलौदाबाजार का ज्योतिर्गमय आश्रम, जहाँ न दान लिया जाता है न झाड़-फूंक पर भरोसा

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अंधविश्वास और ढोंग के खिलाफ 35 वर्षों से मिसाल: बलौदाबाजार का ज्योतिर्गमय आश्रम, जहाँ न दान लिया जाता है न झाड़-फूंक पर भरोसा

अंधविश्वास और ढोंग के खिलाफ 35 वर्षों से मिसाल: बलौदाबाजार का ज्योतिर्गमय आश्रम, जहाँ न दान लिया जाता है न झाड़-फूंक पर भरोसा

बलौदाबाजार (छत्तीसगढ़)

आस्था और अंधविश्वास के बीच की महीन लकीर को स्पष्ट करते हुए बलौदाबाजार का ज्योतिर्गमय आश्रम पिछले साढ़े तीन दशकों से समाज के लिए एक अनूठी मिसाल बना हुआ है। आचार्य पंडित प्रकाश शुक्ल (गुरुजी) के मार्गदर्शन में संचालित यह केंद्र बिना किसी सरकारी या निजी चंदे के, विशुद्ध रूप से लोक कल्याण और चेतना जागृति का केंद्र बना हुआ है।

"बीमारी है तो डॉक्टर के पास जाएं"

अमूमन धार्मिक व आध्यात्मिक स्थलों पर बीमारियों का इलाज चमत्कारों से करने के दावे देखे जाते हैं, लेकिन ज्योतिर्गमय आश्रम का रुख इसके बिल्कुल उलट और वैज्ञानिक सोच के करीब है। गुरुजी का स्पष्ट संदेश है—"बीमारी का सही उपचार केवल योग्य और अनुभवी डॉक्टर ही कर सकते हैं।"

वे झाड़-फूंक और जादू-टोने के नाम पर लोगों को ठगे जाने की प्रवृत्ति पर कड़ा प्रहार करते हैं। उनका मानना है कि वैदिक काल से चले आ रहे पारंपरिक घरेलू नुस्खे (जैसे चोट पर हल्दी-तेल का लेप) प्राथमिक राहत के साधन हैं और मंत्र-साधना से व्यक्ति का मनोबल मजबूत होता है, लेकिन यह चिकित्सीय इलाज का विकल्प नहीं हो सकता।

बिना दान-दक्षिणा की निस्वार्थ सेवा

इस आश्रम की सबसे बड़ी विशेषता इसकी आर्थिक शुचिता है। विगत 35 वर्षों में आश्रम ने किसी भी श्रद्धालु या आगंतुक से एक रुपये का भी दान, दक्षिणा अथवा सहयोग राशि स्वीकार नहीं की है। जाति, वर्ग और संप्रदाय के भेदभाव से परे रहकर यह संस्थान केवल मानवीय संवेदनाओं के आधार पर संचालित होता है।

प्रमुख स्तंभ: आश्रम के मुख्य संकल्प

 * अंधश्रद्धा उन्मूलन: तंत्र-मंत्र के नाम पर होने वाले पाखंड और आर्थिक-मानसिक शोषण को रोकना।

 * नशा मुक्ति अभियान: समाज को व्यसनों से मुक्त कर स्वस्थ जीवनशैली की ओर मोड़ना।

 * सद्भाव व वैदिक ज्ञान: सनातन धर्म के मूल मानवीय मूल्यों और वेदों के वास्तविक संदेश को जन-जन तक पहुंचाना।

हर गुरुवार उमड़ता है आस्था का सैलाब

माँ भगवती शव वाहनी काली के प्रति समर्पित इस प्रांगण में हर गुरुवार छत्तीसगढ़ सहित अन्य राज्यों से 400 से 500 लोग पहुंचते हैं। यहाँ आने वालों का कहना है कि यहाँ कोई आडंबर नहीं, बल्कि जीवन की सही दिशा और मानसिक शांति मिलती है।

आधुनिक दौर में जहाँ अध्यात्म अक्सर व्यापार का रूप लेता जा रहा है, वहीं ज्योतिर्गमय आश्रम 35 वर्षों से सेवा, सामाजिक सुधार और विवेकपूर्ण आस्था का वास्तविक केंद्र बनकर खड़ा है।

 

 

अभिषेक कुमार पाण्डेय स्टेट हेड रिपोर्टर छत्तीसगढ़ 

 

हमर प्रदेश सी जी

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Contributing writer at THE NEWS HUB. Covering the latest developments in Entertainment.

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