✍️हेतराम साहू स्टेट- रिपोर्टर
हमर प्रदेश छत्तीसगढ़
81 वर्षीय सोनकुंवर के लिए आसान हुआ बेटे के नाम जमीन का हस्तांतरण
पारिवारिक दानपत्र पर पंजीयन शुल्क घटकर हुआ मात्र 500 रुपये, परिवार को मिली 6,600 रुपये से अधिक की बचत
सरल प्रक्रिया और डिजिटल सुविधाओं से बुजुर्गों की कम हुई दौड़भाग, ‘सेवा संकल्प अभियान’ में साझा किया अनुभव
महासमुंद, 22 सितंबर 2026। उम्र के इस पड़ाव में जब सरकारी कार्यालयों के बार-बार चक्कर लगाना और लंबी प्रक्रियाओं से गुजरना बुजुर्गों के लिए परेशानी का कारण बन सकता है, ऐसे में सरल और नागरिक-केंद्रित पंजीयन व्यवस्था बड़ी राहत बन रही है। महासमुंद जिले के ग्राम बम्हनी निवासी 81 वर्षीय श्रीमती सोनकुंवर के लिए अपने पुत्र श्री रवि राम पाल के नाम जमीन का दानपत्र कराना ऐसा ही सहज अनुभव रहा।
पारिवारिक संपत्ति के दानपत्र पर पंजीयन शुल्क अब केवल 500 रुपये होने का सीधा लाभ सोनकुंवर के परिवार को मिला। शुल्क में मिली राहत से परिवार को 6,600 रुपये से अधिक की प्रत्यक्ष बचत हुई। ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत पंजीयन विभाग से संवाद के दौरान श्रीमती सोनकुंवर ने पंजीयन प्रक्रिया से जुड़ा अपना अनुभव साझा किया।
कम हुई दौड़भाग, आसान हुआ संपत्ति हस्तांतरण
श्रीमती सोनकुंवर ने बताया कि उम्रदराज लोगों के लिए संपत्ति से जुड़े कार्यों को पूरा करने में बार-बार कार्यालय जाना कठिन होता है। पुत्र के नाम जमीन का दानपत्र कराने के दौरान प्रक्रिया उन्हें अपेक्षाकृत सरल और सुविधाजनक लगी। शुल्क कम होने के साथ प्रक्रिया में मिली सहूलियत से परिवार को आर्थिक राहत के साथ समय और अनावश्यक दौड़भाग से भी बचत हुई।
पारिवारिक संपत्ति का हस्तांतरण किसी परिवार के लिए केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि भविष्य से जुड़ा महत्वपूर्ण निर्णय भी होता है। ऐसे में सरल पंजीयन व्यवस्था ने सोनकुंवर के लिए इस पूरी प्रक्रिया को सहज बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
0.8 प्रतिशत से घटकर अब केवल 500 रुपये हुआ शुल्क
राज्य शासन द्वारा पारिवारिक दानपत्र, हक त्याग पत्र एवं बंटवारे के पंजीयन शुल्क में महत्वपूर्ण राहत दी गई है। पहले इन दस्तावेजों पर संपत्ति मूल्य के आधार पर 0.8 प्रतिशत पंजीयन शुल्क लिया जाता था, जिसे घटाकर अब मात्र 500 रुपये निर्धारित किया गया है।
श्रीमती सोनकुंवर के मामले में भी इसी शुल्क राहत का लाभ मिला। कम शुल्क में पारिवारिक संपत्ति का हस्तांतरण पूरा होने से उनके परिवार को 6,600 रुपये से अधिक की बचत हुई। श्रीमती सोनकुंवर और उनके पुत्र श्री रवि राम पाल ने शुल्क में मिली राहत और सरल पंजीयन प्रक्रिया के लिए छत्तीसगढ़ शासन एवं पंजीयन विभाग के प्रति आभार व्यक्त किया।
डिजिटल सुविधाओं से और आसान हुई पंजीयन प्रक्रिया
पंजीयन विभाग द्वारा प्रक्रिया को सरल बनाने के साथ-साथ तकनीक आधारित सुविधाओं का भी विस्तार किया जा रहा है। ऑनलाइन दस्तावेज तैयार करने, ऑनलाइन शुल्क भुगतान, आधार सत्यापन और डिजिटल माध्यम से दस्तावेज उपलब्ध कराने जैसी सुविधाओं से नागरिकों को सहूलियत मिल रही है।
पंजीयन के बाद नामांतरण की प्रक्रिया को भी ऑटोमेशन के माध्यम से आगे बढ़ाया जा रहा है। इससे नागरिकों को अलग से आवेदन करने और कार्यालयों के चक्कर लगाने की आवश्यकता कम हो रही है।
इस तरह सरल प्रक्रिया, शुल्क में राहत और डिजिटल सुविधाओं के माध्यम से संपत्ति पंजीयन को अधिक सुगम, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित बनाने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। सोनकुंवर की कहानी इसी बदलाव का एक प्रत्यक्ष उदाहरण बनकर सामने आई है।
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