मनोज कुमार भट्ट स्टेट रिपोर्टर जगदलपुर छत्तीसगढ़
हमरप्रदेश छत्तीसगढ़
8 साल से गोदाम में सड़ रहे मनरेगा मजदूरों के टिफिन बॉक्स, 12 लाख मजदूर आज भी इंतजार में
छुरा जनपद में हजारों स्टील टिफिन बॉक्स पर धूल, अम्बिकापुर से घोषित योजना आज तक अधूरी
2018 में खरीदी, करोड़ों खर्च, वितरण जीरो : टिफिन बॉक्स घोटाला या सरकारी लापरवाही
छुरा / मजदूरों के लिए शुरू की गई मुख्यमंत्री मनरेगा मजदूर टिफिन बॉक्स योजना सरकारी उदासीनता की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। वर्ष 2018 में तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह द्वारा ग्राम सुराज अभियान के तहत अम्बिकापुर में इस योजना की घोषणा की गई थी।
योजना के तहत प्रदेश के लगभग 12 लाख मनरेगा जॉब कार्डधारी मजदूरों को स्टील के टिफिन बॉक्स बांटे जाने थे। टेंडर के बाद करोड़ों रुपये की सामग्री खरीदी गई और ट्रकों के माध्यम से प्रदेश के सभी जनपद पंचायतों तक पहुंचाई भी गई।
सूत्रों के अनुसार गरियाबंद जिले के *छुरा जनपद पंचायत सहित कई जनपदों में आज भी हजारों टिफिन बॉक्स गोदामों में पड़े हैं।* विधानसभा चुनाव की आचार संहिता के कारण वितरण रोका गया था, लेकिन उसके बाद सत्ता परिवर्तन हो गया, 5 साल कांग्रेस सरकार रही और अब फिर भाजपा सरकार को डेढ़ साल से ज्यादा हो गया, फिर भी ये डिब्बे मजदूरों के हाथों तक नहीं पहुंचे।
स्थानीय मजदूरों का कहना है कि जिन हाथों के लिए टिफिन खरीदे गए थे, वे आज भी खाली हाथ हैं। सवाल यह उठता है कि आखिर करोड़ों की सरकारी राशि से खरीदी गई सामग्री गोदामों में क्यों सड़ रही है? क्या यह लापरवाही है या बड़ा घोटाला?
*फिलहाल प्रशासन इस मामले पर चुप्पी साधे हुए है।*
Comments (0)
Leave a Comment
No comments yet. Be the first to share your thoughts!