ग्रीन केयर सोसायटी का वृक्ष रक्षा पर्व—बामनसरा के वट को पर्यटन से जोड़ने की उठी आवाज
कोमाखान। पर्यावरण संरक्षण और वृक्षों के प्रति संवेदनशीलता का संदेश देने के उद्देश्य से ग्रीन केयर सोसायटी इंडिया द्वारा आयोजित वृक्ष रक्षा पर्व के तहत कोमाखान क्षेत्र के ग्राम बामनसरा में लगभग 400 वर्ष पुराने विशाल वट वृक्ष को रक्षा सूत्र बांधकर उसके संरक्षण का संकल्प लिया गया। सोसायटी द्वारा वर्ष 2005 से विभिन्न नवाचारी कार्यक्रमों के माध्यम से वृक्ष संरक्षण का संदेश दिया जा रहा है। इसी क्रम में पिछले करीब 20 वर्षों से इस ऐतिहासिक वट वृक्ष को ग्रामवासियों के साथ लगातार रक्षा सूत्र बांधकर इसके संरक्षण की मांग की जा रही है।
ग्रीन केयर सोसायटी इंडिया के अध्यक्ष डॉ. विश्वनाथ पाणिग्राही के मार्गदर्शन में इतिहासकार विजय शर्मा के नेतृत्व में आयोजित कार्यक्रम में सेवानिवृत्त अपर कलेक्टर एवं छत्तीसगढ़ विज्ञान सभा के अध्यक्ष विश्वास मेश्राम, श्रीमती उषा मेश्राम, साहित्यकार एवं रंगकर्मी किसान दीवान, प्राचार्य डी.एस. टंडन, लक्ष्मीराज दीवान एवं कु. चन्द्रप्रभा दीवान सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए। विधिवत पूजा-अर्चना के बाद वट वृक्ष को रक्षा सूत्र बांधकर इसे संरक्षित करने तथा छत्तीसगढ़ पर्यटन से जोड़ने की मांग शासन से की गई।
इस अवसर पर छत्तीसगढ़ विज्ञान सभा के अध्यक्ष विश्वास मेश्राम ने ग्रामीणों के साथ “पेड़ ही सांसें, पेड़ है जीवन, पेड़ों की रखवाली हो” गीत के माध्यम से वृक्ष संरक्षण का संदेश दिया तथा वृक्षों की रक्षा का सामूहिक संकल्प कराया। उन्होंने बाबा नागार्जुन की कालजयी रचना "बाबा बटेसरनाथ" का उल्लेख करते हुए बामनसरा के इस प्राचीन वट वृक्ष को “बाबा बटेसरनाथ” के रूप में पहचान देने की बात कही और इसे आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखना मानवीय कर्तव्य बताया।
साहित्यकार एवं रंगकर्मी किसान दीवान ने बटुकेश्वर के संरक्षण के लिए मृदा अर्पण का संकल्प लिया। इतिहासकार विजय शर्मा ने ग्रामीणों का आह्वान करते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति यदि एक मुट्ठी मिट्टी संरक्षण के लिए अर्पित करे, तो यह केवल वृक्ष संरक्षण का अभियान नहीं, बल्कि हमारी प्रकृति, संस्कृति और इतिहास को बचाने का जनअभियान बन सकता है।
कार्यक्रम में ब्यास नारायण चंद्राकर, गिरवर साहू, मनीष ठाकुर, नीरज यादव एवं नुमेस पटेल सहित ग्रामवासियों की सक्रिय सहभागिता रही।
वृक्ष नहीं, जीवित विरासत है बटुकेश्वर
बामनसरा का यह प्राचीन वट वृक्ष केवल एक पेड़ नहीं, बल्कि क्षेत्र की प्राकृतिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत का प्रतीक है। कार्यक्रम में इसे संरक्षित कर पर्यटन मानचित्र से जोड़ने की मांग के साथ यह संदेश दिया गया कि विकास के साथ विरासत और प्रकृति की रक्षा भी समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
गिरवर साहू
स्टेट रिपोर्टर - हमर प्रदेश छत्तीसगढ़ न्यूज़
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