✍️ हमर प्रदेश छत्तीसगढ़ स्टेट हेड रिपोर्टर किशोर कुमार
रायपुर। हार्ट डिजीज अब केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं रह गई है। राजधानी रायपुर स्थित पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय एवं डॉ. भीमराव आंबेडकर स्मृति चिकित्सालय के कार्डियोलॉजी विभाग के रिसर्च में 40 साल या उससे कम उम्र के युवाओं में हार्ट अटैक के मामलों को लेकर चिंताजनक तस्वीर सामने आई है।
रिसर्च के अनुसार, कोरोना महामारी के बाद युवाओं में एक्यूट कोरोनरी सिंड्रोम (Acute Coronary Syndrome-ACS) यानी हार्ट अटैक से जुड़े मामलों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। प्री-कोविड अवधि 2018-19 में कुल ACS मरीजों में 40 साल या उससे कम उम्र के युवाओं की हिस्सेदारी 8.29 प्रतिशत थी। वहीं 2024-25 में यह बढ़कर 20.85 प्रतिशत हो गई।
आंकड़ों के अनुसार, कुल ACS मरीजों में युवा मरीजों की हिस्सेदारी ढाई गुने से भी अधिक बढ़ी है। विशेषज्ञों के मुताबिक यह बदलाव युवाओं में बढ़ते मोटापे, धूम्रपान, तंबाकू और अन्य नशीले पदार्थों के सेवन, खराब खान-पान, शारीरिक गतिविधि की कमी और तनाव जैसी जीवनशैली से जुड़े जोखिमों की ओर संकेत करता है।
नशे और खराब जीवनशैली से बढ़ रहा खतरा
कम उम्र में हार्ट अटैक के जोखिम को कम करने के लिए विशेषज्ञ स्वस्थ जीवनशैली अपनाने पर जोर देते हैं। खासतौर पर धूम्रपान, तंबाकू और अन्य नशीले पदार्थों से दूरी, संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और वजन को नियंत्रित रखना बेहद जरूरी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि युवाओं में हार्ट से जुड़ी समस्या के लक्षणों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। सीने में दर्द या दबाव, सांस फूलना, असामान्य पसीना, चक्कर या अचानक अत्यधिक कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई देने पर तत्काल चिकित्सकीय सहायता लेना जरूरी है।
रिसर्च के सामने आए आंकड़े युवाओं में बढ़ते हृदय रोग के खतरे को लेकर गंभीर संकेत देते हैं। ऐसे में समय रहते जीवनशैली में सुधार और जोखिम कारकों से बचाव को लेकर जागरूकता बढ़ाना बेहद महत्वपूर्ण हो गया है।
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