Saturday, September 26 2026
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26 साल बाद भी ‘अधूरी न्यायधानी’: हक की लड़ाई में सड़क पर उतरे वकील, बिलासपुर में सभी केंद्रीय ट्रिब्यूनल स्थापित करने की गूंज

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26 साल बाद भी ‘अधूरी न्यायधानी’: हक की लड़ाई में सड़क पर उतरे वकील, बिलासपुर में सभी केंद्रीय ट्रिब्यूनल स्थापित करने की गूंज

*अभिषेक कुमार पाण्डेय स्टेट हेड रिपोर्टर छत्तीसगढ़ 

 

26 साल बाद भी ‘अधूरी न्यायधानी’: हक की लड़ाई में सड़क पर उतरे वकील, बिलासपुर में सभी केंद्रीय ट्रिब्यूनल स्थापित करने की गूंज

 

 

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के 26 वर्ष बीत जाने के बाद भी बिलासपुर को ‘पूर्ण न्यायधानी’ का दर्जा नहीं मिल सका है। रायपुर को पूर्ण राजधानी का गौरव मिल चुका है, लेकिन न्यायधानी के नाम पर बिलासपुर के हिस्से आज भी केवल उपेक्षा आई है। इस ऐतिहासिक अन्याय के खिलाफ अब बिलासपुर के अधिवक्ताओं ने मोर्चा खोल दिया है। जिला अधिवक्ता संघ के पूर्व अध्यक्ष चंद्रशेखर बाजपेयी की अगुवाई में 60 से अधिक वकीलों के प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री तोखन साहू को ज्ञापन सौंपकर सभी प्रमुख केंद्रीय न्यायिक प्राधिकरणों की स्थापना बिलासपुर में करने की पुरजोर मांग की है।

कमाई बिलासपुर से, इंसाफ के लिए भोपाल-जबलपुर के चक्कर!

अधिवक्ताओं ने तथ्यों के साथ केंद्र सरकार के सामने यह ज्वलंत मुद्दा रखा कि कैसे छत्तीसगढ़ के नागरिकों और कर्मचारियों को अपने ही न्यायिक अधिकारों के लिए दूसरे राज्यों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं:

 * रेलवे क्लेम ट्रिब्यूनल (RCT): देश का सबसे बड़ा और सबसे ज्यादा कमाई करने वाला रेलवे जोन (SECR) बिलासपुर में मुख्यालय रखता है। इसके बावजूद रेलवे क्लेम ट्रिब्यूनल भोपाल (मध्य प्रदेश) में स्थित है। हादसे और दावों से जुड़े मामलों के लिए छत्तीसगढ़ के लोगों और रेलवे अफसरों को भोपाल दौड़ना पड़ता है।

 * केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT): रेलवे, SECL, NTPC, सेंट्रल यूनिवर्सिटी, पोस्टल, डिफेंस और पैरामिलिट्री जैसे हजारों केंद्रीय कर्मचारियों के सर्विस मामलों की सुनवाई जबलपुर (मप्र) में होती है। बिलासपुर में सिर्फ तीन महीने में एक बार 4-5 दिनों के लिए सर्किट बेंच बैठती है, जिससे सैकड़ों केस लंबित पड़े रहते हैं। यहां कैट की स्थायी बेंच अनिवार्य है।

 * ऋण वसूली अधिकरण (DRT): बैंक व फाइनेंस विवादों के लिए डीआरटी जबलपुर में है और इसकी अपील के लिए पक्षकारों को डीआरएटी इलाहाबाद (उत्तर प्रदेश) जाना पड़ता है।

 * सेंट्रल गवर्नमेंट इंडस्ट्रियल ट्रिब्यूनल (CGIT): औद्योगिक और श्रमिक विवादों के त्वरित निपटारे के लिए सीजीआईटी की स्थापना भी बिलासपुर में ही होनी चाहिए।

"सिर्फ नाम की नहीं, काम की न्यायधानी बने बिलासपुर"

प्रतिनिधिमंडल ने दो-टूक कहा कि राज्य गठन के समय राजनीतिक सहमति बनी थी कि रायपुर प्रशासनिक राजधानी और बिलासपुर न्याय की राजधानी होगा। आज जब उच्च न्यायालय बिलासपुर में स्थापित है, तो केंद्र सरकार से जुड़े सभी अर्ध-न्यायिक और ट्रिब्यूनल संस्थान भी यहीं होने चाहिए। जब तक ये चारों प्रमुख अधिकरण बिलासपुर में स्थापित नहीं होते, तब तक न्यायधानी का दर्जा अधूरा है।

वकीलों की एकजुटता ने पकड़ी धार

केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू को ज्ञापन सौंपने के दौरान प्रमुख रूप से वरिष्ठ अधिवक्ता चंद्रशेखर बाजपेयी के साथ एम.के. पाठक, सुनील मिश्रा, गोविंद तिवारी, सज्जन तिवारी, यथार्थ सिंह, अच्युत अंचल तिवारी, विशाल सिंह, ऋषभ पांडेय, रजनीश तिवारी, सत्यम सिंह, रूपेन्द्र सिंह, अनिल शुक्ला, दीपेश कुमार अविनाश पांडेय, डॉ. उषा किरण बाजपेयी, शिल्पा जोशी, कविता आर्या, मीनाक्षी राठौर, रौशनी सोनी, समृद्धि मिश्रा, दीप्ति शुक्ला और राहुल गोस्वामी, अभिषेक कुमार पाण्डेय सहित 60 से अधिक अधिवक्ता मौजूद रहे। वकीलों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही केंद्र सरकार ने इस पर ठोस निर्णय नहीं लिया, तो यह मांग एक बड़े जनांदोलन का रूप लेगी।

हमर प्रदेश सी जी

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Contributing writer at THE NEWS HUB. Covering the latest developments in खबरे काम की.

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