✍️ हेतराम साहू स्टेट-रिपोर्टर हमर प्रदेश छत्तीसगढ़
तोरेसिंहा बैंक और केना सेवा सहकारी समिति से जुड़ा मामला, पूर्व जांच में सामने आए थे छह नाम
सरायपाली/महासमुंद। सरायपाली थाना क्षेत्र के तोरेसिंहा बैंक एवं केना सेवा सहकारी समिति से जुड़े करीब 1 करोड़ 77 लाख रुपये के कथित KCC ऋण फर्जीवाड़े के मामले में पुलिस ने FIR दर्ज कर ली है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार मामले में अपराध क्रमांक 0289/26 दर्ज करते हुए धारा 120-B, 409, 420, 467, 468 एवं 471 IPC के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया है। FIR दर्ज होने के साथ ही मामले की आपराधिक जांच शुरू हो गई है।
FIR के बाद सबसे बड़ा सवाल—कौन हैं आरोपी?
FIR दर्ज होने के बाद अब सबसे अहम सवाल यह है कि मामले में किन-किन लोगों को आरोपी बनाया गया है और क्या किसी की गिरफ्तारी हुई है। हालांकि, सरायपाली पुलिस की ओर से फिलहाल नामजद आरोपियों के नाम अथवा गिरफ्तारी की स्थिति सार्वजनिक नहीं की गई है।
सरायपाली थाना प्रभारी रितेश यादव ने मामले को संवेदनशील बताते हुए फिलहाल आरोपियों के नाम और गिरफ्तारी के संबंध में विस्तृत जानकारी साझा नहीं की है। ऐसे में पूर्व जांच में सामने आए नामों को वर्तमान FIR के आरोपी के रूप में बताना उचित नहीं होगा।
पूर्व जांच में सामने आए थे छह नाम
गौरतलब है कि मामले की पूर्व जांच के दौरान केना सेवा सहकारी समिति के तत्कालीन समिति प्रभारी भीष्मदेव पटेल, तोरेसिंहा बैंक के तत्कालीन सुपरवाइजर श्याम सुंदर पटेल, वर्तमान सुपरवाइजर राज कुमार प्रधान, बैंक मैनेजर युवराज नायक, कनिष्ठ लिपिक हीरा सिंह ध्रुव और प्रभारी लेखापाल खिलेश्वर साहू के नाम सामने आने की बात कही गई थी।
हालांकि, इन छह लोगों में से कौन-कौन वर्तमान FIR में आरोपी बनाया गया है, इसकी पुलिस की ओर से अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए पूर्व जांच में सामने आए नामों को सीधे वर्तमान FIR का आरोपी बताना उचित नहीं होगा।
मृत किसानों के नाम पर KCC ऋण सहित कई गंभीर बिंदु
पूर्व जांच में कथित फर्जीवाड़े से जुड़े कई गंभीर बिंदु सामने आने की बात कही गई थी। इनमें मृत किसानों के नाम पर KCC ऋण जारी होना, केना सेवा सहकारी समिति के कार्यक्षेत्र से बाहर के किसानों के नाम पर ऋण स्वीकृत होना तथा कुछ किसानों द्वारा अपने नाम पर ऋण जारी होने की जानकारी नहीं होने जैसे मामले शामिल हैं।
करीब 1.77 करोड़ रुपये के KCC ऋण से जुड़े इस मामले में बैंक स्तर पर जांच के बाद संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ निलंबन सहित विभागीय कार्रवाई किए जाने की जानकारी भी सामने आई थी।
6 अगस्त को FIR के निर्देश के बाद हुई कार्रवाई
जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित रायपुर की मुख्य कार्यपालन अधिकारी अपेक्षा व्यास द्वारा 6 अगस्त 2026 को महासमुंद के नोडल अधिकारी को जांच प्रतिवेदन के आधार पर संबंधित जिम्मेदारों के विरुद्ध FIR दर्ज कराने के निर्देश दिए गए थे। निर्देश में FIR दर्ज कराने के साथ उसकी छायाप्रति मुख्य कार्यालय भेजने को भी कहा गया था।
इसके बाद सरायपाली थाने में अपराध क्रमांक 0289/26 दर्ज किया गया।
पुलिस जांच में खुलेंगे फर्जीवाड़े से जुड़े कई राज
FIR दर्ज होने के बाद अब पुलिस जांच में यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि मृत किसानों के नाम पर KCC ऋण किस प्रक्रिया के तहत स्वीकृत किए गए, किसानों के दस्तावेजों का इस्तेमाल किस स्तर पर हुआ, ऋण की राशि किस माध्यम से निकाली गई और बैंक एवं समिति स्तर पर दस्तावेजों का सत्यापन किस प्रकार किया गया।
जांच का एक अहम पहलू यह भी रहेगा कि पूर्व जांच में सामने आए छह नामों में से किन लोगों की भूमिका आपराधिक जांच में सामने आती है और वर्तमान FIR में वास्तव में किन व्यक्तियों को आरोपी बनाया गया है।
FIR दर्ज, अब जांच के नतीजों पर नजर
फिलहाल मामले में FIR संख्या और धाराओं की जानकारी सामने आ चुकी है, जबकि आरोपियों के नाम और गिरफ्तारी की स्थिति को लेकर पुलिस की ओर से आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।
अब पुलिस जांच के दौरान सामने आने वाले दस्तावेजों, साक्ष्यों और बयानों के आधार पर ही स्पष्ट होगा कि 1.77 करोड़ रुपये के इस कथित KCC ऋण फर्जीवाड़े में वास्तविक रूप से किन-किन लोगों की भूमिका रही और उनके विरुद्ध आगे क्या कार्रवाई की जाती है।
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