छत्तीसगढ़ की जेलों में रक्षाबंधन पर्व हर्षोल्लास से मनाया जा रहा है*
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नक्सल भय खत्म होते ही अबूझमाड़ में फिर जीवंत हुई ‘घोटुल’ की गौरवशाली परंपरा
नक्सल भय खत्म होते ही अबूझमाड़ में फिर जीवंत हुई ‘घोटुल’ की गौरवशाली परंपरा जगदलपुर। बस्तर संभाग के नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ क्षेत्र में लंबे समय तक नक्सली भय और हिंसा के कारण प्रभावित रही पारंपरिक ‘घोटुल’ संस्कृति अब फिर से जीवंत होती दिखाई दे रही है। अंदरूनी गांवों में ग्रामीण अपनी प्राचीन परंपराओं को सहेजने के लिए पारंपरिक घोटुलों का पुनर्निर्माण कर रहे हैं। गांवों में फिर सुनाई देने लगी मांदर की थाप अबूझमाड़ के झारावाही जैसे गांवों में ग्रामीण स्थानीय लकड़ियों और प्राकृतिक सामग्रियों से पारंपरिक घोटुल तैयार कर रहे हैं। सूर्य ढलने के बाद यहां मांदर की थाप और लोकगीतों की गूंज सुनाई देने लगी है। बुजुर्ग नई पीढ़ी को समाज के नियम, रीति-रिवाज, लोकगीत, नृत्य और सामुदायिक जिम्मेदारियों की जानकारी दे रहे हैं। कभी शाम होते ही सुरक्षा को लेकर घरों में सिमट जाने वाले ग्रामीण अब सामुदायिक गतिविधियों में फिर से भाग ले रहे हैं। सुरक्षा वातावरण में आए बदलाव के साथ ग्रामीणों में अपनी सांस्कृतिक पहचान को लेकर भी उत्साह बढ़ा है। संस्कृति और सामाजिक शिक्षा का केंद्र है घोटुल आदिवासी समाज में घोटुल को केवल मनोरंजन या सामूहिक मिलन का स्थान नहीं माना जाता, बल्कि यह लोकसंस्कृति, अनुशासन, सामाजिक मूल्यों और सामुदायिक जीवन की पारंपरिक पाठशाला के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। नई पीढ़ी घोटुल के माध्यम से बुजुर्गों से पारंपरिक ज्ञान और लोककला सीख रही है। इससे लंबे समय से प्रभावित सांस्कृतिक गतिविधियों को फिर से गति मिलने की उम्मीद बढ़ी है। शांति के साथ विकास की भी उम्मीद ग्रामीणों का कहना है कि घोटुलों का पुनर्जीवन उनके लिए केवल सांस्कृतिक गतिविधि की वापसी नहीं, बल्कि अबूझमाड़ की सांस्कृतिक पहचान और आत्मसम्मान के मजबूत होने का प्रतीक है। सुरक्षा व्यवस्था में सुधार के साथ ग्रामीणों की आवाजाही, खेती-किसानी, हाट-बाजार और पारंपरिक त्योहारों में भी उत्साह लौटने की बात सामने आ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि इस सकारात्मक बदलाव को स्थायी बनाने के लिए क्षेत्र में शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और संचार सुविधाओं का विस्तार भी जरूरी है। अबूझमाड़ के गांवों में घोटुल की लौटती रौनक इस बात का संकेत है कि शांति और सुरक्षा के साथ स्थानीय संस्कृति को भी नई ऊर्जा मिल रही है। स्टेट रिपोर्टर — मनोज भट्ट hamarpradeshcg.com
भारतीय रेलवे की नई पहल से माल ग्राहकों को रियायती माल भाड़े का लाभ, उत्पादों की लागत कम करने और नए बाजारों तक पहुंच बढ़ाने में मिलेगी मदद ।*
*खाली लौटने वाली मालगाड़ियों में माल लदान का अवसर ।* *भारतीय रेलवे की नई पहल से माल ग्राहकों को रियायती माल भाड़े का लाभ, उत्पादों की लागत कम करने और नए बाजारों तक पहुंच बढ़ाने में मिलेगी मदद ।* बिलासपुर, 27 अगस्त 2026 भारतीय रेलवे द्वारा मालगाड़ियों की उपलब्ध क्षमता का अधिकतम उपयोग करने तथा माल परिवहन को अधिक किफायती और सुगम बनाने के उद्देश्य से परंपरागत खाली प्रवाह दिशा योजना (Traditional Empty Flow Directions ) लागू की गई है। इस योजना के तहत उन दिशाओं में माल लदान को प्रोत्साहित किया जा रहा है, जहां मालगाड़ियां माल उतारने के बाद सामान्यतः खाली लौटती हैं। इस पहल से खाली लौटने वाली मालगाड़ियों की क्षमता का बेहतर उपयोग होगा और ग्राहकों को रियायती माल भाड़े पर अपने उत्पादों को रेल के माध्यम से विभिन्न स्थानों तक पहुंचाने का अवसर मिलेगा। साथ ही, इससे भारतीय रेलवे को अतिरिक्त माल यातायात प्राप्त करने में मदद मिलेगी। *01 अगस्त 2026 से लागू हैं संशोधित प्रावधान* परंपरागत खाली प्रवाह दिशा में माल लदान के लिए सरलीकृत स्वचालित माल भाड़ा छूट योजना जो कि पहले से लागू है के संशोधित प्रावधान 01 अगस्त 2026 से 31 जुलाई 2027 तक प्रभावी रहेंगे। अधिसूचित खाली प्रवाह दिशाओं में पात्र माल के लदान पर सामान्य माल भाड़े में 15 से 20 प्रतिशत तक की छूट प्रदान की जाएगी। यह छूट निर्धारित पात्रता एवं अन्य शर्तों के अनुसार लागू होगी। *क्या है परंपरागत खाली प्रवाह दिशा योजना?* भारतीय रेलवे के कई मार्गों पर मालगाड़ियां एक दिशा में माल लेकर जाती हैं और माल उतारने के बाद दूसरी दिशा में खाली लौटती हैं। योजना का उद्देश्य ऐसी खाली वापसी यात्रा में उपलब्ध क्षमता का उपयोग माल ढुलाई के लिए करना है। अर्थात, जिस दिशा में मालगाड़ी सामान्यतः खाली लौटती है, उस दिशा में पात्र माल लदान करने वाले ग्राहक को कम माल भाड़े का लाभ मिल सकता है। *ग्राहकों को स्वतः मिलेगा छूट का लाभ* योजना की महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि निर्धारित शर्तों को पूरा करने वाली पात्र माल खेप पर माल भाड़े में छूट रेलवे की व्यवस्था के माध्यम से स्वतः लागू होगी। इसके लिए ग्राहक को प्रत्येक पात्र खेप के लिए अलग से आवेदन करने की आवश्यकता नहीं होगी। छूट केवल रेलवे द्वारा निर्धारित एवं अधिसूचित खाली प्रवाह दिशाओं में पात्र माल पर लागू होगी। संबंधित दिशा, माल की पात्रता, छूट की दर तथा अन्य शर्तें निर्धारित रेलवे प्रावधानों के अनुसार होंगी। *उद्योग और व्यापार जगत को मिलेगा व्यापक लाभ* यह योजना उद्योगों, व्यापारियों और अन्य माल ग्राहकों के लिए अपने उत्पादों को कम लागत में दूर-दराज के क्षेत्रों और नए बाजारों तक पहुंचाने का अवसर प्रदान करेगी। रियायती माल भाड़े के कारण माल ढुलाई की लागत कम होने से उत्पादों की कुल लागत को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी, जिसका लाभ आगे चलकर उपभोक्ताओं को भी मिल सकता है। इससे बाजार में वस्तुओं की कीमतों को कम रखने तथा महंगाई को नियंत्रित करने में भी सकारात्मक योगदान की संभावना है। इसके साथ ही, रेल के माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों तक उत्पादों की आसान और किफायती पहुंच से व्यापारियों और उत्पादकों को नए बाजारों में अपने उत्पाद पहुंचाने का अवसर मिलेगा। इससे अलग-अलग क्षेत्रों में विभिन्न प्रकार के उत्पादों की उपलब्धता बढ़ाने में भी मदद मिलेगी। विशेष रूप से ऐसे उद्योग और व्यवसाय, जिनके लिए माल परिवहन लागत एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, इस योजना का लाभ उठाकर अपने उत्पादों की पहुंच का विस्तार कर सकते हैं। *दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे द्वारा माल ग्राहकों को प्रोत्साहन* दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे द्वारा भारतीय रेलवे की इस पहल के तहत वर्तमान एवं संभावित माल ग्राहकों को योजना की जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है। साथ ही, ऐसी दिशाओं में नए माल यातायात की संभावनाओं की पहचान करने के प्रयास किए जा रहे हैं, जहां मालगाड़ियां सामान्यतः खाली लौटती हैं। यह पहल खाली लौटने वाली मालगाड़ियों का बेहतर उपयोग, माल परिवहन की लागत में कमी, रेल संसाधनों का अधिकतम उपयोग, नए बाजारों तक उत्पादों की पहुंच तथा व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। सरल शब्दों में, जो मालगाड़ी एक दिशा में माल पहुंचाने के बाद दूसरी दिशा में खाली लौटती थी, उसी वापसी यात्रा में अब पात्र माल को रियायती दर पर ले जाने का अवसर मिलेगा। इससे रेलवे और माल ग्राहकों के साथ-साथ व्यापक रूप से व्यापार तथा उपभोक्ताओं को भी लाभ मिलने की संभावना है। ********** अभिषेक कुमार पाण्डेय स्टेट हेड रिपोर्टर बिलासपुर छत्तीसगढ़ हमर प्रदेश सी जी
दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे बिलासपुर में नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति, बिलासपुर की प्रथम छमाही बैठक आयोजित ।*
*दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे बिलासपुर में नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति, बिलासपुर की प्रथम छमाही बैठक आयोजित ।* *06 सदस्य कार्यालयों को राजभाषा शील्ड एवं राजभाषा ट्रॉफी से किया गया सम्मानित* बिलासपुर – 27 अगस्त 2026 नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति, बिलासपुर की वर्ष 2026-27 की प्रथम छमाही बैठक का आयोजन श्री तरुण प्रकाश, महाप्रबंधक, दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे, बिलासपुर की अध्यक्षता में आज दिनांक 27 अगस्त 2026 को महाप्रबंधक कार्यालय के जोनल सभाकक्ष में किया गया । इस अवसर पर समिति के उपाध्यक्ष एवं मुख्य राजभाषा अधिकारी व प्रधान मुख्य वाणिज्य प्रबंधक, श्री बिजय कुमार द्वारा श्री तरुण प्रकाश, अध्यक्ष एवं महाप्रबंधक, द.पू.म.रेलवे, बिलासपुर तथा बिलासपुर नगर स्थित केंद्रीय कार्यालयों, उपक्रमों एवं निगमों के प्रमुखों एवं प्रतिनिधियों का स्वागत किया गया । अक्टूबर 2025 से मार्च 2026 तक हुई राजभाषा प्रगति की समीक्षा हेतु आयोजित इस बैठक में बिलासपुर नगर स्थित केंद्रीय कार्यालयों, उपक्रमों एवं निगमों के कुल 38 सदस्य कार्यालय उपस्थित हुए । बैठक में गृह मंत्रालय, राजभाषा विभाग द्वारा निर्धारित कार्यसूची के अनुसार विस्तारपूर्वक चर्चा की गई । इस अवसर पर अध्यक्ष एवं महाप्रबंधक के करकमलों से नगर राजभाषा शील्ड प्रतिस्पर्धा-2025 में लघु कार्यालय श्रेणी में रेलवे भर्ती बोर्ड, बिलासपुर को प्रथम पुरस्कार, मौसम विज्ञान केन्द्र, बिलासपुर को द्वितीय पुरस्कार, मध्यम कार्यालय श्रेणी में डाकघर, बिलासपुर को प्रथम पुरस्कार, कोयला खान भविष्य निधि संगठन, बिलासपुर को द्वितीय पुरस्कार तथा दीर्घ कार्यालय श्रेणी में मंडल रेल प्रबंधक कार्यालय, बिलासपुर को प्रथम पुरस्कार एवं एन.टी.पी.सी. बिलासपुर को द्वितीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया । अपने संबोधन में श्री तरुण प्रकाश, अध्यक्ष एवं महाप्रबंधक, दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे बिलासपुर ने राजभाषा कार्यान्वयन के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले 06 सदस्य कार्यालयों को राजभाषा शील्ड एवं राजभाषा ट्रॉफी प्राप्त करने पर बधाई दी । उन्होंने कहा कि हिंदी भारत की राजभाषा है और सरकारी कामकाज में इसका अधिकाधिक प्रयोग किया जाना आवश्यक है । उन्होंने सभी सदस्य कार्यालयों से आग्रह किया कि अपने संवैधानिक दायित्वों का निर्वहन करते हुए अपने कार्यालय में राजभाषा हिंदी के प्रयोग-प्रसार में वृद्धि करें। श्री प्रकाश ने आगे कहा कि नराकास सचिवालय में दिनांक 14 सितंबर 2026 से 28 सितंबर 2026 तक राजभाषा पखवाड़ा मनाया जायेगा, जिसमें आयोजित प्रतियोगिताओं में सभी सदस्य कार्यालय अधिकाधिक संख्या में अपने अधिकारियों और कर्मचारियों को भाग लेने हेतु प्रोत्साहित करें । उन्होंने विश्वास जताया कि नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति, बिलासपुर (कार्यालय) को एक आदर्श समिति बनाने के लिए सभी सदस्य कार्यालय अपना सक्रिय सहयोग प्रदान करेंगे । इस अवसर पर श्री बिजय कुमार, उपाध्यक्ष/नराकास एवं प्रधान मुख्य वाणिज्य प्रबंधक ने कहा कि इस वर्ष गृह मंत्रालय, राजभाषा विभाग द्वारा हिंदी दिवस एवं छठा अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन का आयोजन 14 एवं 15 सितंबर, 2026 को सिडको एक्जीबिशन सेंटर, नवी मुंबई में किया जा रहा है । उन्होंने सभी कार्यालयों में हिंदी पखवाड़ा/माह पूरे उत्साह से आयोजित करने के निदेश दिए । उन्होंने आगे कहा कि वर्ष 2025-26 की प्रथम बैठक में उप निदेशक (कार्यान्वयन), गृह मंत्रालय, राजभाषा विभाग, भोपाल द्वारा अनुरोध किया गया था कि नगर राजभाषा शील्ड प्रतिस्पर्धा में प्रदान किये जाने वाले पुरस्कारों की संख्या बढ़ाई जाए । इस पर विचार करते हुए पुरस्कारों की संख्या में वृद्धि की गई है तथा समिति के बैंक एवं बीमा श्रेणी के कार्यालयों को पृथक कर नराकास (बैंक) का गठन किया गया है । नगर राजभाषा शील्ड प्रतिस्पर्धा में पुरस्कार प्रदान करने हेतु तीन श्रेणियां निर्धारित की गई हैं, जिसमें 01 से 10 तक कार्मिकों वाले कार्यालय को लघु कार्यालय श्रेणी, 11 से 50 तक कार्मिकों वाले कार्यालय को मध्यम कार्यालय श्रेणी तथा 50 से अधिक कार्मिकों वाले कार्यालय को दीर्घ कार्यालय श्रेणी में रखा गया है । उन्होंने इन तीनों श्रेणियों में पुरस्कार प्राप्त करने वाले कार्यालयों को हार्दिक बधाई दी । उन्होंने समिति की पत्रिका “नगर ज्योति” के प्रकाशन हेतु सभी सदस्य कार्यालयों से अपने अधिकारियों एवं कर्मचारियों तथा उनके परिवार के सदस्यों की रचनाएं भिजवाने का भी आग्रह किया । इसके साथ ही उन्होंने सभी सदस्यों से अपने कार्यालयों में राजभाषा हिंदी के प्रति सकारात्मक वातावरण तैयार करने और हिंदी में कामकाज को बढ़ाने के निर्देश दिए । बैठक में कार्यसूची की प्रस्तुति श्री बिजय कुमार, उपाध्यक्ष एवं मुख्य राजभाषा अधिकारी, द.पू.म.रेलवे, बिलासपुर ने दी । बैठक के अंत में श्री पीताम्बर लाल जाटवर, सचिव एवं राजभाषा अधिकारी (मुख्यालय) ने अध्यक्ष सहित सभी सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए धन्यावाद ज्ञापित किया । ************** अभिषेक कुमार पाण्डेय स्टेट हेड रिपोर्टर बिलासपुर छत्तीसगढ़ हमर प्रदेश सी जी
*बिरहोर विकास प्रकोष्ठ की पहली बैठक, हर परिवार तक पहुंचे शासन की योजनाओं का लाभ : कलेक्टर*
*बिरहोर विकास प्रकोष्ठ की पहली बैठक, हर परिवार तक पहुंचे शासन की योजनाओं का लाभ : कलेक्टर* *बिरहोर समुदाय की जरूरत और रुचि के अनुरूप बनेगी विकास की कार्ययोजना* बिलासपुर, 27 अगस्त 2026। विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (PVTG) बिरहोर समुदाय के परिवारों तक शासन की योजनाओं का लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से गठित बिरहोर विकास प्रकोष्ठ की पहली बैठक आज मंथन सभाकक्ष में कलेक्टर शसंजय अग्रवाल की अध्यक्षता में आयोजित हुई। बैठक में प्रकोष्ठ के अध्यक्ष श्री रामगोपाल सहित सदस्य एवं संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। उल्लेखनीय है कि जिले के मस्तूरी और कोटा विकासखंड के छह ग्रामों में बिरहोर समुदाय की लगभग साढ़े चार सौ आबादी निवासरत है। कलेक्टर ने बैठक में परिवारों के राशन कार्ड, आयुष्मान कार्ड, जाति प्रमाण पत्र, वन अधिकार पट्टा सहित विभिन्न शासकीय योजनाओं की उपलब्धता की जानकारी ली। उन्होंने कोटा जनपद सीईओ को निर्देश दिए कि प्रत्येक बिरहोर परिवार की परिवारवार जांच कर यह सुनिश्चित करें कि पात्र परिवार किसी भी योजना के लाभ से वंचित न रहे। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि सहित अन्य योजनाओं का लाभ मिलने की स्थिति की भी जानकारी लेने के निर्देश दिए। कलेक्टर श्री अग्रवाल ने बच्चों की शिक्षा पर विशेष जोर देते हुए स्कूल एवं आंगनबाड़ी नहीं जाने वाले बच्चों की जानकारी लेकर उन्हें नियमित रूप से शिक्षा से जोड़ने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बच्चों का स्कूल जाना और पढ़ना-लिखना सबसे जरूरी है। बिरहोर समुदाय के प्रतिनिधियों से उनकी आवश्यकताओं और रोजगार की रुचि के बारे में भी जानकारी ली गई। कलेक्टर ने कहा कि झाड़ू-टोकरी एवं अन्य बांस उत्पाद निर्माण, खेती-बाड़ी, सब्जी-भाजी उत्पादन तथा मछली पालन जैसे रोजगार के विकल्पों पर समुदाय की रुचि के अनुसार कार्ययोजना बनाई जाए। मछली पालन के इच्छुक परिवारों के लिए डबरी निर्माण की सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उद्यान विभाग को मुनगा एवं हल्दी की पौध उपलब्ध कराने तथा समूह के माध्यम से सब्जी उत्पादन को बढ़ावा देने के निर्देश दिए। समुदाय की ओर से सिलाई मशीन उपलब्ध कराने की मांग भी रखी गई। बैठक में बिरहोर बस्तियों में पेयजल की समस्या भी सामने आई। पाइपलाइन में खराबी के कारण घरों तक पानी नहीं पहुंचने की जानकारी पर कलेक्टर ने व्यवस्था दुरुस्त कर सभी परिवारों को नल से पानी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने एक गांव का चयन कर सभी संबंधित विभागों के अधिकारियों को संयुक्त रूप से वहां जाकर परिवारों की समस्याओं और जरूरतों का आकलन करने को कहा। कलेक्टर श्री अग्रवाल ने कहा कि बिरहोर समुदाय के विकास के लिए पहले यह समझना जरूरी है कि परिवार वास्तव में क्या करना चाहते हैं। उनकी रुचि और जरूरत के अनुरूप सहायता उपलब्ध कराकर वर्तमान स्थिति को और बेहतर बनाने के लिए जिला प्रशासन समन्वित प्रयास करेगा। अभिषेक कुमार पाण्डेय स्टेट हेड रिपोर्टर बिलासपुर छत्तीसगढ़ हमर प्रदेश सी जी
खेती की संजीवनी बनी सहकारिता: छत्तीसगढ़ में किसानों पर बरसी ₹904 करोड़ की मदद, बिना ब्याज पूंजी और खाद-बीज से संवरेगी फसल
अभिषेक कुमार पाण्डेय स्टेट हेड रिपोर्टर छत्तीसगढ़ खेती की संजीवनी बनी सहकारिता: छत्तीसगढ़ में किसानों पर बरसी ₹904 करोड़ की मदद, बिना ब्याज पूंजी और खाद-बीज से संवरेगी फसल बिलासपुर। साहूकारों के चंगुल और कर्ज के दलदल से अन्नदाता को बाहर निकालने के लिए छत्तीसगढ़ की सहकारी व्यवस्था ने बड़ा दांव चला है। वर्ष 2026 में किसानों को सशक्त बनाने के लिए ₹904.80 करोड़ से अधिक का ऋण सीधे खेतों तक पहुंचाया गया है। इस वित्तीय संबल से न सिर्फ ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नई जान आई है, बल्कि छोटे और सीमांत किसानों के लिए समय पर उन्नत खेती की राह खुली है। आंकड़ों में ऋण का सीधा गणित | ऋण का प्रकार | वितरित राशि (करोड़ रुपये) | किसानों को सीधा लाभ | |---|---|---| | नगद ऋण | ₹732.07 करोड़ | जुताई, मजदूरी और दैनिक कृषि खर्चों के लिए सीधी नकदी | | वस्तु ऋण | ₹172.73 करोड़ | सोसायटियों से सीधे उच्च गुणवत्ता के खाद और प्रमाणित बीज | | कुल सहायता | ₹904.80 करोड़ | संस्थागत कृषि सुदृढ़ीकरण | डबल इंजन की मारक नीतियां: शून्य ब्याज और ₹2 लाख तक नो-गारंटी * ₹5 लाख तक 0% ब्याज: राज्य की प्राथमिक कृषि साख समितियां (PACS) किसानों को ₹5 लाख तक का अल्पकालीन फसली ऋण शून्य प्रतिशत ब्याज पर उपलब्ध करा रही हैं। * बिना जमानत ₹2 लाख तक राहत: केंद्र सरकार की ब्याज सबवेंशन और केसीसी (KCC) सुधार नीतियों के तहत बिना किसी गिरवी या जमानत के ₹2 लाख तक के ऋण की सीमा तय की गई है। व्यवस्था को पारदर्शी बनाने की सख्त ताकीद भाजपा किसान मोर्चा के प्रदेश प्रवक्ता बी.पी. सिंह ने साफ किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की मंशा किसानों को बिचौलियों से मुक्त करने की है। उन्होंने समितियों और विभागीय अधिकारियों को दो टूक चेतावनी देते हुए कहा: > "ऋण वितरण में किसी भी स्तर पर ढिलाई या किसानों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं होगी। प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी, सरल और समयबद्ध होनी चाहिए, ताकि वास्तविक जरूरतमंद किसान को दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें।" हमर प्रदेश सी जी
दिव्य जीवन संघ में श्रावण के अंतिम सोमवार पर भक्ति रस की वर्षा: सुर, शास्त्र और सत्संग के संगम में झूमे श्रद्धालु
दिव्य जीवन संघ में श्रावण के अंतिम सोमवार पर भक्ति रस की वर्षा: सुर, शास्त्र और सत्संग के संगम में झूमे श्रद्धालु रायगढ़। पवित्र श्रावण मास के अंतिम सोमवार पर दिव्य जीवन संघ शाखा (निरंजन डाइंग हाउस) में भक्ति और अध्यात्म का अनूठा संगम देखने को मिला। जगद्गुरु स्वामी शिवानंद महाराज के चित्र पर पूजन-अर्चन के साथ शुरू हुए इस विशेष सत्संग में ज्ञान, संगीत और साधना की त्रिवेणी बही, जिसमें श्रद्धालु देर शाम तक गोते लगाते रहे। गीता ज्ञान और शिव-विवाह प्रसंग से मंत्रमुग्ध हुए साधक संस्था के आजीवन अध्यक्ष प्रो. क्रांतिकुमार तिवारी ने श्रीमद्भगवद्गीता के 18वें अध्याय (श्लोक 74-78) पर सारगर्भित व्याख्यान देकर ज्ञान का प्रकाश बिखेरा। इसके पश्चात ख्यातिलब्ध रामायणी भोजराम पटेल (गुरुजी) ने श्रीरामचरितमानस के बालकांड (दोहा 92-93) से शिव-विवाह प्रसंग की छत्तीसगढ़ी में संगीतमय प्रस्तुति दी, जिससे पूरा परिसर 'हर-हर महादेव' के जयकारों से गूंज उठा। सुरमई धुनों पर थिरके भाव सांस्कृतिक व संगीतमय प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को नई ऊंचाइयां दीं: * पं. रघुनंदन तिवारी (मशहूर बांसुरी वादक व कथावाचक): मनमोहक मौसमी गीतों से वातावरण को भक्तिमय बनाया। * राजेंद्र विश्वकर्मा (वायलिन वादक): "पायो जी मैंने राम रतन धन पायो" की कर्णप्रिय धुन छेड़कर श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया। * जगदीश मेहर (संयोजक व संगीत विशारद): हारमोनियम पर सुमधुर भजनों की तान छेड़ी। * रामायण सिंह: तबले की सधी हुई थाप पर पूरी संगीत मंडली को बांधे रखा। प्रमुख श्रद्धालुओं की रही सहभागिता सत्संग सभा में खुशीराम मेहर, सेवानिवृत्त शिक्षाविद भीमसेन मिरानिया, के. एल. मेहर, रमेश अग्रवाल, पार्वती नामदेव और लक्ष्मी मेहर ने भी भजन व विचार साझा किए। आयोजन में वरिष्ठ पत्रकार हरेराम तिवारी, मधुसूदन सोनी, देवेंद्र मेहर, धनमती पटेल, रश्मि मेहर, प्रभा देवांगन, छाया देवांगन एवं कांति देवांगन सहित बड़ी संख्या में मातृशक्ति व श्रद्धालु उपस्थित रहे। सामूहिक आरती "ॐ जय जगदीश हरे" और मिष्ठान प्रसाद वितरण के साथ अनुष्ठान का समापन हुआ। साधकों ने साझा किया कि यह आयोजन केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और आत्मिक शांति का जीवंत उदाहरण बना। अभिषेक कुमार पाण्डेय स्टेट हेड रिपोर्टर छत्तीसगढ़ हमर प्रदेश सी जी
बिलासपुर के मोहभट्ठा पहुंचे पूर्व CM भूपेश बघेल: विधि-विधान से किया रुद्राभिषेक, प्रदेश की खुशहाली और तरक्की की मांगी दुआ
बिलासपुर के मोहभट्ठा पहुंचे पूर्व CM भूपेश बघेल: विधि-विधान से किया रुद्राभिषेक, प्रदेश की खुशहाली और तरक्की की मांगी दुआ बिलासपुर: पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बिलासपुर जिले के ग्राम मोहभट्ठा स्थित शिव मंदिर पहुंचकर भगवान भोलेनाथ का विधिवत रुद्राभिषेक और विशेष पूजा-अर्चना की। इस धार्मिक अनुष्ठान के दौरान उन्होंने देवाधिदेव महादेव से समस्त छत्तीसगढ़वासियों के सुख, शांति, समृद्धि और राज्य के चहुंमुखी विकास की कामना की। मंत्रोच्चार और भक्तिमय माहौल के बीच संपन्न हुए इस आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु और कांग्रेस कार्यकर्ता शामिल हुए। पूर्व मुख्यमंत्री के आगमन पर स्थानीय लोगों और कार्यकर्ताओं ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। पूजा संपन्न होने के बाद भूपेश बघेल ने उपस्थित नागरिकों से आत्मीय मुलाकात भी की। इस अवसर पर कोटा विधायक अटल श्रीवास्तव, खनिज विकास निगम के पूर्व अध्यक्ष गिरीश देवांगन सहित कई वरिष्ठ नेता, स्थानीय जनप्रतिनिधि और ग्रामीण मौजूद रहे। त्वरित बुलेटिन (संक्षिप्त प्रारूप) * स्थान: ग्राम मोहभट्ठा, जिला बिलासपुर। * मुख्य गतिविधि: पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा भगवान शिव का विशेष रुद्राभिषेक एवं जलाभिषेक। * प्रार्थना: छत्तीसगढ़ के प्रत्येक परिवार की खुशहाली, शांति और राज्य की निरंतर प्रगति का संकल्प। * प्रमुख उपस्थिति: कोटा विधायक अटल श्रीवास्तव, पूर्व निगम अध्यक्ष गिरीश देवांगन एवं स्थानीय कार्यकर्ता। * माहौल: पूरे अनुष्ठान के दौरान मंदिर परिसर 'हर-हर महादेव' के जयकारों से गुंजायमान रहा। अभिषेक कुमार पाण्डेय स्टेट हेड रिपोर्टर बिलासपुर छत्तीसगढ़ हमर प्रदेश सी जी
*राखी के धागे के साथ ज्ञान का उपहार—बहनों के लिए कलेक्टर और DIG/SSP ने भेंट की अध्ययन सामग्री*
अभिषेक कुमार पाण्डेय स्टेट हेड रिपोर्टर बिलासपुर छत्तीसगढ़ *राखी के धागे के साथ ज्ञान का उपहार—बहनों के लिए कलेक्टर और DIG/SSP ने भेंट की अध्ययन सामग्री* “बुके नहीं, बुक भेंट करें” अभियान बिलासपुर कलेक्टर श्री संजय अग्रवाल (IAS) एवं DIG/SSP श्री रजनेश सिंह (IPS) के मार्गदर्शन में आर्यन फ़िल्म टीम द्वारा “बुके नहीं, बुक भेंट करें” अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान का उद्देश्य औपचारिक बुके की जगह किताबें, कॉपी-पेन एवं अध्ययन सामग्री भेंट कर शिक्षा और ज्ञान को प्रोत्साहित करना है। इसी क्रम में बिलासपुर DIG/SSP श्री रजनेश सिंह द्वारा रक्षाबंधन के अवसर पर बहनों के लिए उपहार स्वरूप कॉपी, पेन एवं अध्ययन सामग्री आर्यन फ़िल्म टीम को प्रदान की गई। यह सामग्री आर्यन फ़िल्म की टीम द्वारा स्कूलों में पहुंचकर बहनों के बीच वितरित की जाएगी। इस अवसर पर आर्यन फ़िल्म की ओर से डायरेक्टर रामा नन्द तिवारी, श्री दिनेश चंदानी (होटल बंशीवाला), Mrs. Prantika Bhardwaj (SI), श्री उमा शंकर पाण्डेय (Ex Traffic SI), सनी मनीष भटेजा, जीतेन्द्र सिदार एवं रवि सहित टीम के सदस्य उपस्थित रहे। हमर प्रदेश सी जी
राखी के पर्व पर बहनों की तरक्की की मिसाल बनीं लखपति दीदियां*
अभिषेक कुमार पाण्डेय स्टेट हेड रिपोर्टर बिलासपुर छत्तीसगढ़ **राखी के पर्व पर बहनों की तरक्की की मिसाल बनीं लखपति दीदियां* **विष्णु भैया की सरकार में बिहान से मिला स्वरोजगार का नया अवसर* बिलासपुर 26 अगस्त 2026/ राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन योजना (बिहान) अंतर्गत विकासखण्ड बिल्हा के ग्राम अकलतरी की जय भारत महिला स्व सहायता समूह की लखपति दीदियां आज स्वरोजगार की नई मिसाल पेश कर रही हैं। समूह की महिलाओं द्वारा ग्राम अकलतरी में संचालित बिलासा पशु आहार संयंत्र में पशु एवं पक्षी आहार का निर्माण किया जा रहा है। आधुनिक मशीनों की सहायता से तैयार किए जा रहे गुणवत्तापूर्ण आहार से जहां पशुपालकों को स्थानीय स्तर पर पशु आहार उपलब्ध हो रहा है, वहीं महिलाओं को रोजगार और नियमित आय का नया जरिया मिला है। समूह की महिलाओं ने पारंपरिक आजीविका गतिविधियों से आगे बढ़ते हुए पशु एवं पक्षी आहार निर्माण के क्षेत्र में कदम रखा है। संयंत्र में उत्पादन को व्यवस्थित और गुणवत्तापूर्ण बनाने के लिए फीड ग्राइंडर एवं मिक्सर मशीन, फीड पैलेट मशीन तथा फीड क्रम्बल मशीन स्थापित की गई हैं। इन मशीनों के माध्यम से विभिन्न प्रक्रियाओं को सुगम बनाकर पशु एवं पक्षी आहार तैयार किया जा रहा है। बिहान योजना के माध्यम से महिला स्व सहायता समूहों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और उन्हें स्वरोजगार से जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसी दिशा में जय भारत महिला स्व सहायता समूह की महिलाओं ने पशु आहार निर्माण को आजीविका का माध्यम बनाया है। समूह की महिलाएं संयंत्र के संचालन, पशु आहार निर्माण, पैकेजिंग और अन्य कार्यों में सक्रिय रूप से भागीदारी निभा रही हैं। बिलासा पशु आहार संयंत्र ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के साथ ही स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी उपलब्ध करा रहा है। पशुपालन एवं कुक्कुट पालन से जुड़े ग्रामीणों को अपने क्षेत्र में ही पशु एवं पक्षी आहार मिलने से समय और परिवहन लागत में सुविधा हो रही है। यह पहल अन्य महिला स्व सहायता समूहों के लिए भी प्रेरणा बन रही है। राखी के पर्व पर आत्मनिर्भरता की यह कहानी बहनों के बढ़ते आत्मविश्वास की तस्वीर पेश कर रही है। विष्णु भैया की सरकार में महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़कर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में किए जा रहे प्रयास ग्रामीण परिवारों को नई मजबूती दे रहे हैं। हमर प्रदेश सी जी
भोजली महोत्सव 29 को पचरीघाट बिलासपुर में
भोजली महोत्सव 29 को पचरीघाट बिलासपुर में बिलासपुर। छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति, परंपरा और भोजली पर्व की गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से मां बिलासा लोक संस्कृति एवं कला मंच, पचरीघाट, जूना बिलासपुर द्वारा 29 अगस्त को भोजली महोत्सव 2026 का आयोजन किया जाएगा। मंच के किशन लाल केंवट, शिवप्रताप साव, पार्षद आशीष गुप्ता, एल्डरमैन योगेश बोले और देवेंद्र पाठक ने बिलासपुर प्रेस क्लब में पत्रकार वार्ता में आयोजन की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम पचरीघाट स्थित विसर्जन स्थल पर दोपहर 3 बजे से रात 9 बजे तक आयोजित होगा। इस दौरान लोक संस्कृति एवं पारंपरिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति होगी तथा प्रतिभावान छात्र-छात्राओं का सम्मान किया जाएगा। महोत्सव में भोजली समितियों एवं प्रतिभागियों के लिए प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी। इसमें प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाली समितियों एवं प्रतिभागियों को सम्मानित किया जाएगा, जबकि अन्य प्रतिभागियों को सांत्वना पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे। कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री एवं बिलासपुर सांसद तोखन साहू मुख्य अतिथि तथा पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं बिलासपुर विधायक अमर अग्रवाल अध्यक्ष के रूप में शामिल होंगे। नगर निगम की महापौर पूजा अशोक विधानी सहित विभिन्न सामाजिक एवं राजनीतिक क्षेत्रों से जुड़े अतिथियों की भी उपस्थिति रहेगी। आयोजकों ने बताया कि भोजली पर्व छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति और परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। महोत्सव के माध्यम से नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने और लोक परंपराओं को संरक्षित करने का प्रयास किया जा रहा है। कार्यक्रम के दौरान महिला मंडल द्वारा मां अरपा महाआरती भी की जाएगी। मंच ने शहरवासियों से परिवार सहित आयोजन में शामिल होने की अपील की है। अभिषेक कुमार पाण्डेय स्टेट हेड रिपोर्टर बिलासपुर छत्तीसगढ़ हमर प्रदेश सी जी
धान का कटोरा ही नहीं, औषधियों का खजाना भी: जानिए छत्तीसगढ़ की वो 46+ भाजियां, जो पूरी दुनिया में नहीं मिलेंगी!
अभिषेक कुमार पाण्डेय की खास रिपोर्ट बिलासपुर छत्तीसगढ़ धान का कटोरा ही नहीं, औषधियों का खजाना भी: जानिए छत्तीसगढ़ की वो 46+ भाजियां, जो पूरी दुनिया में नहीं मिलेंगी! छत्तीसगढ़ को सिर्फ ‘धान का कटोरा’ समझना इस समृद्ध माटी की अधूरी पहचान है। इस धरा की असली ताकत और मिठास उसकी थाली में सजने वाली पारंपरिक ‘भाजियों’ में बसती है। लाल भाजी, मुनगा भाजी से लेकर बोहार और सुनसुनिया तक—छत्तीसगढ़ में प्रकृति ने हरी पत्तियों के रूप में स्वाद, सेहत और आयुर्वेद का ऐसा संगम रचा है जो दुनिया में कहीं और देखने को नहीं मिलता। स्वाद भी, संस्कृति भी और अचूक औषधि भी छत्तीसगढ़ी खानपान में भाजी सिर्फ एक व्यंजन नहीं, बल्कि जीवनशैली और परंपरा का अटूट हिस्सा है। खेत की मेड़ों, जंगलों और बाड़ियों में उगने वाली ये भाजियां बिना किसी केमिकल या खाद के कुदरती रूप से तैयार होती हैं: * बोहार और कोयलार भाजी: जंगल के पेड़ों की कोमल पत्तियों से बनने वाली ये भाजियां स्वाद में जितनी लाजवाब हैं, इनकी कीमत और मांग उतनी ही ज्यादा रहती है। * कर्मता, कांदा और चेंच भाजी: तालाबों, दलदली इलाकों और खेतों में मिलने वाली ये भाजियां पेट से जुड़ी बीमारियों और पाचन के लिए रामबाण मानी जाती हैं। * चरोटा, खोटनी और कुकरी पोटा भाजी: ये मौसमी भाजियां मौसमी बीमारियों से लड़ने के लिए रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) बढ़ाती हैं। छत्तीसगढ़ की प्रमुख 46 पारंपरिक भाजियों की अनूठी सूची | क्र. सं. | प्रमुख भाजियां (1–16) | प्रमुख भाजियां (17–31) | प्रमुख भाजियां (32–46+) | |---|---|---|---| | 1–5 | 1. मुनगा भाजी 2. लाल भाजी 3. मुरई भाजी 4. गोभी भाजी 5. सरसों भाजी | 17. चेंच भाजी 18. कोचई भाजी 19. खोटनी भाजी 20. गोदली भाजी 21. खेड़ा भाजी | 32. नोनिया भाजी 33. हमारी भाजी 34. चनौरी भाजी 35. चांटी भाजी 36. कोसम भाजी | | 6–10 | 6. बोहार भाजी 7. करेला भाजी 8. पालक भाजी 9. तीवरा भाजी 10. कोयलार भाजी | 22. गुमी भाजी 23. मुडही भाजी 24. चरोटा भाजी 25. बंधे भाजी 26. केना भाजी | 37. सिलयारी भाजी 38. कुकरी पोटा भाजी 39. बरबटी भाजी 40. चौलाई भाजी 41. कुदरू भाजी | | 11–16 | 11. करमता भाजी 12. सुनसुनिया भाजी 13. भथुआ भाजी 14. मेथी भाजी 15. कांदा भाजी 16. पोई भाजी | 27. चना भाजी 28. मस्टर भाजी 29. गजकुरना भाजी 30. पीपर भाजी 31. मखना भाजी | 42. मिर्ची भाजी 43. मुस्केनी भाजी 44. कोजयारी भाजी 45. दांत खिसोरी भाजी 46. उरला भाजी (अन्य: कुकुर, झिलो, गुर्सू भाजी) | ‘छत्तीसगढ़ की शान, भाजी हमारी पहचान’ लहसुन, सूखी लाल मिर्च और सरसों तेल के साधारण तड़के से तैयार होने वाली इन भाजियों का स्वाद किसी भी फाइव-स्टार व्यंजन को मात देने का माद्दा रखता है। जब थाली में गर्म भात, बासी या पेज के साथ इनमें से कोई भी भाजी परोसी जाती है, तो वह केवल भोजन नहीं बल्कि मिट्टी से जुड़ाव का उत्सव बन जाती है। आज जब पूरी दुनिया 'ऑर्गेनिक' और 'सुपरफूड' की ओर भाग रही है, छत्तीसगढ़ सदियों से इन प्राकृतिक सुपरफूड्स को अपनी थाली का राजा बनाए हुए है। हमर प्रदेश सी जी
मेधावी छात्रों के सपनों को SBI Foundation के पंख: 9वीं से लेकर विदेश में उच्च शिक्षा तक ₹15 लाख तक की स्कॉलरशिप, 4 सितंबर तक करें आवेदन
मेधावी छात्रों के सपनों को SBI Foundation के पंख: 9वीं से लेकर विदेश में उच्च शिक्षा तक ₹15 लाख तक की स्कॉलरशिप, 4 सितंबर तक करें आवेदन नई दिल्ली: आर्थिक तंगी अब होनहार विद्यार्थियों की पढ़ाई में रोड़ा नहीं बनेगी। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) फाउंडेशन ने देश के जरूरतमंद और मेधावी छात्र-छात्राओं के लिए 'एसबीआई प्लेटिनम जुबली आशा स्कॉलरशिप 2026-27' की शुरुआत की है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य 9वीं कक्षा के स्कूली छात्रों से लेकर आईआईटी, आईआईएम, मेडिकल और विदेश में उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले छात्रों को वित्तीय संबल प्रदान करना है। किसे कितनी मिलेगी आर्थिक सहायता? (स्कॉलरशिप विवरण): * कक्षा 9वीं से 12वीं: ₹15,000 प्रति वर्ष * स्नातक (UG): ₹75,000 * स्नातकोत्तर (PG): ₹1.50 लाख * एमबीबीएस (MBBS) एवं आईआईटी (IIT): ₹2.00 लाख * आईआईएम (IIM): ₹5.00 लाख * विदेश में पोस्टग्रेजुएट/उच्च शिक्षा: चयनित विद्यार्थियों को ₹15 लाख तक की बड़ी सहायता राशि। आवेदन के लिए जरूरी दस्तावेज: * पिछली व नवीनतम कक्षा/सेमेस्टर की मार्कशीट * सरकारी फोटो पहचान पत्र एवं पासपोर्ट साइज फोटो * परिवार का आय प्रमाण पत्र * बैंक पासबुक की प्रति * वर्तमान संस्थान का बोनाफाइड सर्टिफिकेट / एडमिशन प्रूफ * फीस रसीद अथवा कॉलेज का अधिकृत फीस स्ट्रक्चर * (आरक्षित वर्ग एवं दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए संबंधित प्रमाण पत्र) आवेदन प्रक्रिया और अंतिम तिथि: इच्छुक व पात्र विद्यार्थी आधिकारिक पोर्टल पर जाकर अपना ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन पूरा कर सकते हैं। पोर्टल पर लॉगिन करने के बाद अपनी संबंधित श्रेणी चुनें, मांगे गए दस्तावेज अपलोड करें और विवरण जांचकर फॉर्म सबमिट करें। * आवेदन की अंतिम तारीख: 4 सितंबर 2026 समय-सीमा समाप्त होने से पहले सभी पात्र विद्यार्थी आवश्यक दस्तावेजों के साथ अपना आवेदन जमा कर इस योजना का लाभ उठाएं। अभिषेक कुमार पाण्डेय स्टेट हेड रिपोर्टर बिलासपुर छत्तीसगढ़ हमर प्रदेश सी जी