एसईसीएल मुख्यालय के 03 कर्मियों के सेवानिवृत्त पर भावभीनी विदाई दी गयी
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माह अगस्त में सेवानिवृत्त हो रहे मंडल रेल परिवार के 01 अधिकारी सहित 25 सदस्यों को दी गई भावभीनी विदाई |*
*माह अगस्त में सेवानिवृत्त हो रहे मंडल रेल परिवार के 01 अधिकारी सहित 25 सदस्यों को दी गई भावभीनी विदाई |* बिलासपुर :- 31 अगस्त 2026 दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे बिलासपुर मंडल के विभिन्न विभागों में कार्यरत वरिष्ठ मंडल परिचालन प्रबंधक(गुड्स) सहित 25 रेल परिवार के सदस्य माह अगस्त 2026 में अपनी गौरवशाली रेल सेवा पूर्ण करने के पश्चात् सेवानिवृत्त हो रहे हैं। मंडल रेल प्रबंधक कार्यालय परिसर स्थित सीबीटी कक्ष में आयोजित सम्मान समारोह में सेवानिवृत्त हो रहे समस्त कर्मचारियों को ससम्मान विदाई दी गई । इस अवसर पर मंडल कार्मिक अधिकारी श्री यू.एस.एस. राव द्वारा सेवानिवृत्त हो रहे अधिकारी व कर्मचारियों को बंदोबस्त भुगतान से संबंधित समस्त दस्तावेज़, सेवा प्रशस्ति प्रमाण-पत्र एवं सेवा मैडल आदि प्रदान किया गया | इस दौरान मुख्य कार्यालय अधीक्षक (आईटी) श्री सेवक रजक द्वारा सेवानिवृत्त कर्मचारियों को उम्मीद कार्ड (मेडिकल) व बंदोबस्त से संबन्धित नियमों से अवगत कराया गया | इस अवसर पर सेवानिवृत्त कर्मियों के परिजन, कल्याण निरीक्षक तथा कार्मिक निपटारा शाखा के कर्मचारीगण उपस्थित थे। मंडल के सेवानिवृत्त हो रहे 25 रेल परिवार के सदस्यों में परिचालन विभाग से 08, इंजीनियरिंग विभाग से 04, विद्युत विभाग से 04, यांत्रिक विभाग से 02, मेडिकल विभाग से 01, सिग्नल व दूरसंचार से 04, तथा वाणिज्य विभाग से 02 कर्मचारी शामिल हैं । इस अवसर पर मंडल कार्मिक अधिकारी ने सभी सेवानिवृत्त कर्मचारियों को उनकी गौरवशाली रेल सेवा के लिए बधाई दी तथा तथा उनके उत्तम स्वास्थ्य व दीर्घायु होने की कामना की गई | अभिषेक कुमार पाण्डेय स्टेट हेड रिपोर्टर बिलासपुर छत्तीसगढ़ हमर प्रदेश सी जी
प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना से अनिता शर्मा के घर फैली सौर ऊर्जा की रोशनी, बिजली बिल हुआ शून्य*
अभिषेक कुमार पाण्डेय रिपोर्टर बिलासपुर छत्तीसगढ़ *प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना से अनिता शर्मा के घर फैली सौर ऊर्जा की रोशनी, बिजली बिल हुआ शून्य* बिलासपुर, 31 अगस्त 2026/प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना आम नागरिकों के लिए बिजली की बचत के साथ-साथ अतिरिक्त आय का एक प्रभावी माध्यम बन रही है। शहर के रामा ग्रीन सिटी निवासी श्रीमती अनिता शर्मा ने भी इस योजना का लाभ उठाकर अपने घर में सोलर पैनल स्थापित कराया है। सोलर पैनल लगने के बाद उनके घर की बिजली संबंधी जरूरतें अब सौर ऊर्जा से पूरी हो रही हैं और बिजली बिल शून्य हो गया है। अनिता शर्मा बताती हैं कि पहले हर महीने बिजली बिल के रूप में एक निश्चित राशि खर्च करनी पड़ती थी। प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना के तहत घर की छत पर सोलर पैनल लगवाने के बाद बिजली का बिल अब शून्य हो गया है। सौर ऊर्जा संयंत्र से घर की आवश्यकता से अधिक बिजली का उत्पादन होने पर अतिरिक्त बिजली ग्रिड में भेजी जाती है। इस तरह अनिता शर्मा के लिए सोलर पैनल केवल बिजली बचत का साधन नहीं, बल्कि अतिरिक्त आय का जरिया भी बन गया है। वे बताती हैं कि योजना के माध्यम से अपने घर की छत का उपयोग स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन के लिए कर पाना उनके लिए बेहद संतोषजनक अनुभव है। उन्होंने अन्य नागरिकों से भी अपील की कि वे अपने घरों में सौर ऊर्जा को अपनाने के लिए प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना की जानकारी लें और इसका लाभ उठाएं। केंद्र सरकार द्वारा इस योजना में 30 हजार रूपये से लेकर 78 हजार रूपये तक अनुदान और राज्य सरकार द्वारा 30000 तक अनुदान दिया जा रहा है। योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए उपभोक्ता पीएम सूर्यघर डॉट जीओव्ही डॉट इन वेब पोर्टल अथवा पीएम सूर्यघर एप्प में पंजीयन करा सकते हैं। हमर प्रदेश सी जी
“कड़ी मेहनत, अनुशासन और लगन से सफलता की नई उड़ान”
हमर प्रदेश छत्तीसगढ़ block reporter विशाल प्रजापति AMBIKAPUR SARGUJA 6264503359 🌟 हमारी शान – हमारा गौरव 🌟 “कड़ी मेहनत, अनुशासन और लगन से सफलता की नई उड़ान” “The Classroom With The Collector” में चयनित होने पर हार्दिक बधाई एवं उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएँ। 🌟 कोरिया कलेक्टर श्रीमती रोक्तिमा यादव जी के द्वारा सम्मानित किया गया । Education hub coaching classes baikunthpur के द्वारा इतिहास रच दिया गया । Education hub coaching classes baikunthpur के डायरेक्टर का संदेश:- MR.SANJAY PRAJAPATI 9399126177 “मेरे लिए विद्यार्थी सिर्फ एक छात्र नहीं, बल्कि हमारे संस्थान के भविष्य की पहचान हैं। जब कोई विद्यार्थी मेहनत, अनुशासन और निरंतर प्रयास के साथ आगे बढ़ता है और अपने लक्ष्य को हासिल करता है, तो उसकी सफलता हमारे लिए सबसे बड़ी खुशी और गर्व का विषय होती है। Education Hub में हमारा उद्देश्य केवल पढ़ाना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को सही दिशा, आत्मविश्वास और लक्ष्य के प्रति समर्पण देना है। हमारे विद्यार्थियों की हर छोटी-बड़ी उपलब्धि हमें और बेहतर करने की प्रेरणा देती है। आज का मेहनती विद्यार्थी ही कल का सफल अधिकारी, शिक्षक, डॉक्टर, इंजीनियर या जिम्मेदार नागरिक बनेगा। उनकी सफलता में हमारा योगदान होना ही हमारे लिए सबसे बड़ा सम्मान है। “आज का विद्यार्थी, कल का सफल अधिकारी” ऐसे शिक्षा संस्थान से हमें गौरव प्राप्त होती है कि हमारे बच्चे प्रगति के पथ पर है। और भविष्य में अपने लक्ष्य को अवश्य प्राप्त करेंगे।
लोक कला के साधकों का राज्य स्तर पर डंका: GPM के 11 कलाकारों को प्रतिष्ठित 'लोकधरा गौरव सम्मान 2026'
अभिषेक कुमार पाण्डेय स्टेट हेड रिपोर्टर छत्तीसगढ़, हमर प्रदेश छत्तीसगढ़ लोक कला के साधकों का राज्य स्तर पर डंका: GPM के 11 कलाकारों को प्रतिष्ठित 'लोकधरा गौरव सम्मान 2026' सांस्कृतिक डेस्क, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही माटी की महक, लोकगीतों की धुन और पारंपरिक नृत्य शैलियों को अपनी सांसों में संजोए रखने वाले गौरेला-पेंड्रा-मरवाही के कलाकारों ने पूरे प्रदेश में जिले का परचम लहराया है। 'छत्तीसगढ़ प्रदेश लोक कलाकार कल्याण संघ' द्वारा आयोजित वार्षिक प्रदेश स्तरीय लोक कला अलंकरण समारोह में जिले के 11 प्रमुख साधकों को इस वर्ष के प्रतिष्ठित "लोकधरा गौरव सम्मान 2026" से नवाजा गया। क्यों खास है यह सम्मान? यह राज्यस्तरीय अलंकरण उन समर्पित प्रतिभाओं को सम्मानित करने के लिए दिया जाता है, जो आधुनिकता की दौड़ में विलुप्त होती छत्तीसगढ़ की लोक परंपराओं, पारंपरिक संगीत, रंगमंच और लोक साहित्य को जमीनी स्तर पर जीवित रखे हुए हैं। कलाकारों के चयन में उनके दशकों के समर्पण और सांस्कृतिक योगदान को मुख्य आधार बनाया गया। यह चयन प्रक्रिया छत्तीसगढ़ प्रदेश लोक कलाकार कल्याण संघ के प्रदेशाध्यक्ष श्री गुरुदास के मार्गदर्शन व अंतिम निर्णय तथा जिला अध्यक्ष आशा कौशिक की अनुशंसा पर पूरी की गई। जिले का मान बढ़ाने वाले 11 गौरव रत्न जिले के वे 11 सांस्कृतिक ध्वजवाहक, जिन्हें यह राज्यस्तरीय सम्मान मिला: आशा कौशिक ईश्वर पडवार राम सिंह परतोती उमर पोर्ते बेसाहन सिंह टेकाम घनश्याम पंत जुगेश्वर बसंत धर्मेंद्र कौशिक कौशल भरिया प्रदीप पनरिया शैलेश कुमार सोनी सांस्कृतिक हलकों में जश्न का माहौल एक साथ 11 कलाकारों का राज्य मंच पर चयनित होना गौरेला-पेंड्रा-मरवाही की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रमाण है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर जिले के कला प्रेमियों, साहित्यकारों और विभिन्न सामाजिक-सांस्कृतिक संस्थाओं ने सभी विभूतियों को बधाई देते हुए इसे माटी की कला का सच्चा सम्मान बताया है।
समाजसेवी बिंदु सिंह कछवाहा 'नारी शक्ति सम्मान-2026' से अलंकृत: CM विष्णु देव साय और केंद्रीय मंत्री तोखन साहू ने रायपुर में किया सम्मानित
बिलासपुर की समाजसेवी बिंदु सिंह कछवाहा 'नारी शक्ति सम्मान-2026' से अलंकृत: CM विष्णु देव साय और केंद्रीय मंत्री तोखन साहू ने रायपुर में किया सम्मानित रायपुर/बिलासपुर: समाज में बदलाव की अलख जगाने और महिलाओं को आत्मनिर्भरता की राह दिखाने वाली बिलासपुर की समाजसेवी बिंदु सिंह कछवाहा के नाम एक और बड़ी उपलब्धि जुड़ गई है। छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग द्वारा रायपुर में आयोजित राज्य स्तरीय समारोह में उन्हें प्रतिष्ठित ‘नारी शक्ति सम्मान–2026’ से नवाजा गया। यह सम्मान उन्हें प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय एवं केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू के कर-कमलों द्वारा प्रदान किया गया। बदलाव की नींव: स्वास्थ्य से लेकर स्वावलंबन तक का सफर बिंदु सिंह कछवाहा पिछले लंबे समय से जमीनी स्तर पर महिलाओं के अधिकारों, स्वास्थ्य जागरूकता, आत्मसम्मान और उन्हें आर्थिक रूप से सक्षम बनाने की दिशा में नवाचारी प्रयासों के साथ कार्य कर रही हैं। आयोग द्वारा आयोजित इस भव्य मंच पर उनके नेतृत्व कौशल और समाजहित में किए गए असाधारण योगदान को रेखांकित करते हुए यह राज्य स्तरीय सम्मान दिया गया। "सम्मान रुकने का कारण नहीं, आगे बढ़ने का संकल्प" मंच से सम्मान प्राप्त करने के बाद बिंदु सिंह कछवाहा ने अपनी भावनाएं साझा करते हुए कहा कि यह पुरस्कार किसी मंजिल का अंत नहीं, बल्कि सामाजिक सरोकारों के प्रति एक नई शुरुआत है। उन्होंने अपने संबोधन में कहा: > "एक सच्चा सम्मान वह है जो अहंकार को नहीं, बल्कि उत्तरदायित्व के बोध को बढ़ाए। यह हमारे कदमों को थामने के लिए नहीं, बल्कि और अधिक दृढ़ता से आगे बढ़ने का संकल्प है। जब एक महिला सशक्त होती है, तो वह सिर्फ अपना जीवन नहीं बदलती, बल्कि आने वाली पीढ़ियों और पूरे समाज की सोच को एक नई दिशा प्रदान करती है।" > समारोह में गूंजी नारी सशक्तिकरण की गूंज कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू ने प्रदेश भर से आई प्रतिभाओं की सराहना करते हुए कहा कि राज्य के विकास में महिलाओं की भागीदारी सर्वोपरि है। बिंदु सिंह कछवाहा ने इस गरिमामयी सम्मान के लिए छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग और आयोजकों के प्रति आभार व्यक्त किया और दोहराया कि महिलाओं के सर्वांगीण विकास और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए उनका यह अभियान अब और भी व्यापक स्तर पर जारी रहेगा। अभिषेक कुमार पाण्डेय स्टेट हेड रिपोर्टर छत्तीसगढ़ हमर प्रदेश छत्तीसगढ़
बूथ स्तर से राष्ट्र निर्माण का संकल्प: भाजयुमो नेता रौशन सिंह ने कार्यकर्ताओं संग सुना पीएम मोदी के ‘मन की बात’ का 137वां संस्करण
बूथ स्तर से राष्ट्र निर्माण का संकल्प: भाजयुमो नेता रौशन सिंह ने कार्यकर्ताओं संग सुना पीएम मोदी के ‘मन की बात’ का 137वां संस्करण बिलासपुर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने और संगठन को धरातल पर मजबूत करने के क्रम में भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) के प्रदेश कार्यसमिति सदस्य रौशन सिंह ने बिलासपुर विधानसभा अंतर्गत दक्षिण मंडल, वार्ड क्रमांक 24 स्थित बूथ क्रमांक 95 पर कार्यकर्ताओं और स्थानीय नागरिकों के साथ प्रधानमंत्री के ‘मन की बात’ कार्यक्रम के 137वें संस्करण का सामूहिक श्रवण किया। युवा नेता रौशन सिंह बिलासपुर और प्रदेश की राजनीति में युवाओं के सशक्त चेहरे के रूप में सक्रिय हैं। सामाजिक सरोकारों, संगठन विस्तार और जनसमस्याओं के समाधान में उनकी निरंतर जमीनी उपस्थिति रहती है। बूथ स्तर पर पहुंचकर कार्यकर्ताओं के साथ कार्यक्रम सुनना उनकी धरातल से जुड़ी कार्यशैली को दर्शाता है। कार्यक्रम की प्रमुख बातें और रौशन सिंह का संदेश * सेवा और समर्पण की प्रेरणा: रौशन सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ‘मन की बात’ कार्यक्रम केवल एक रेडियो प्रसारण नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण और जनभागीदारी का जीवंत माध्यम है। यह संवाद हर नागरिक को सेवा और समर्पण की भावना से कार्य करने की नई ऊर्जा देता है। * विकसित भारत का रोडमैप: उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के विचार स्वच्छता, आत्मनिर्भरता और स्वदेशी को जीवनशैली का हिस्सा बनाने पर जोर देते हैं। विकसित भारत के निर्माण में युवाओं की भूमिका सबसे अहम है। * बूथ स्तर पर संवाद: वार्ड क्रमांक 24 के बूथ क्रमांक 95 पर आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में युवा और स्थानीय नागरिक शामिल हुए, जहां राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखकर काम करने का संकल्प दोहराया गया। > "आदरणीय प्रधानमंत्री जी के प्रेरक विचार हम सभी को सेवा, समर्पण, स्वच्छता, आत्मनिर्भरता और विकसित भारत के संकल्प को जन-जन तक पहुंचाने की नई ऊर्जा प्रदान करते हैं। हम सभी को राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हुए विकास के इस महाअभियान में सक्रिय योगदान देना होगा।" > — रौशन सिंह, प्रदेश कार्यसमिति सदस्य, भाजयुमो छत्तीसगढ़ अभिषेक कुमार पाण्डेय स्टेट हेड रिपोर्टर छत्तीसगढ़ हमर प्रदेश सी जी
आसमान से बाबा केदार के दर: 15 सितंबर से फिर गूंजेगी हेलिकॉप्टरों की गूंज, जानें टिकट बुकिंग से लेकर उड़ान तक का पूरा रूट
आसमान से बाबा केदार के दर: 15 सितंबर से फिर गूंजेगी हेलिकॉप्टरों की गूंज, जानें टिकट बुकिंग से लेकर उड़ान तक का पूरा रूट देहरादून: बाबा केदारनाथ के दर्शन की राह देख रहे देश-विदेश के श्रद्धालुओं के लिए राहत भरी खबर है। मानसून के ठहराव के बाद अब 15 सितंबर 2026 से 31 अक्टूबर 2026 तक केदारनाथ धाम के लिए हेलीकॉप्टर सेवाएं दोबारा शुरू होने जा रही हैं। बुजुर्ग, दिव्यांग और सीमित समय में दर्शन के इच्छुक तीर्थयात्रियों के लिए यह सेवा वरदान साबित होगी। हेली सेवा से जुड़ी मुख्य बातें * संचालन अवधि: 15 सितंबर से 31 अक्टूबर 2026 तक * प्रमुख हेलीपैड: गुप्तकाशी, फाटा और सिरसी * फायदा: 16 किलोमीटर की दुर्गम पैदल चढ़ाई से मुक्ति और कुछ ही मिनटों में सीधे केदारनाथ धाम तक सुगम पहुंच टिकट बुकिंग का सही तरीका: 4 आसान चरण * अनिवार्य यात्रा पंजीकरण: हेली टिकट लेने से पहले आधिकारिक चारधाम यात्रा पोर्टल पर पंजीकरण पूरा करें। * IRCTC HeliYatra पर लॉगिन: आधिकारिक पोर्टल पर जाकर अपनी यात्रा तिथि और पसंदीदा हेलीपैड चुनें। * सत्यापन: यात्री विवरण दर्ज कर मोबाइल ओटीपी (OTP) सत्यापन पूरा करें। * सुरक्षित भुगतान: ऑनलाइन भुगतान करते ही आपका कंफर्म ई-टिकट जनरेट हो जाएगा। > सख्त चेतावनी: टिकट केवल IRCTC HeliYatra के आधिकारिक पोर्टल से ही बुक करें। सोशल मीडिया, फर्जी वेबसाइटों या अनाधिकृत एजेंटों के झांसे में न आएं। नोट: हेलीकॉप्टर उड़ानें पूरी तरह से पर्वतीय मौसम और प्रशासनिक अनुमतियों पर निर्भर करती हैं, इसलिए प्रस्थान से पहले पोर्टल पर मौसम व शेड्यूल संबंधी अपडेट जरूर देख लें। अभिषेक कुमार पाण्डेय स्टेट हेड रिपोर्टर छत्तीसगढ़ हमर प्रदेश सी जी
संस्कृति, स्वदेशी और युवा शक्ति: पीएम मोदी के ‘मन की बात’ से विकसित भारत का शंखनाद, मंत्री राजेश अग्रवाल ने रायपुर में सुना 137वां संस्करण
संस्कृति, स्वदेशी और युवा शक्ति: पीएम मोदी के ‘मन की बात’ से विकसित भारत का शंखनाद, मंत्री राजेश अग्रवाल ने रायपुर में सुना 137वां संस्करण रायपुर/अंबिकापुर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकप्रिय मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 137वें संस्करण ने एक बार फिर देश की विकास यात्रा, सांस्कृतिक पुनर्जागरण और जनभागीदारी को नई दिशा दी है। छत्तीसगढ़ के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने रायपुर स्थित अपने शासकीय आवास पर अंबिकापुर की महापौर श्रीमती मंजूषा भगत और प्रबुद्ध नागरिकों के साथ इस प्रेरक संवाद को सुना। मंत्री श्री अग्रवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री का यह संवाद केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि राष्ट्रनिर्माण की दिशा में 140 करोड़ भारतीयों को एक सूत्र में पिरोने वाला सशक्त माध्यम है। ‘मन की बात’ के मुख्य बिंदु और बड़े संदेश * डिजिटल माध्यमों से विरासत का संरक्षण: प्रधानमंत्री ने इतिहास और लोक परंपराओं को आधुनिक तकनीक के जरिए सहेजने का आह्वान किया। मंत्री अग्रवाल ने इस पर जोर देते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की समृद्ध संस्कृति और ऐतिहासिक धरोहरों को आधुनिक तकनीक से अगली पीढ़ी तक पहुंचाना समय की मांग है। * ड्रग-फ्री इंडिया और युवा ऊर्जा: ‘नशा मुक्त युवा, विकसित भारत’ के संकल्प को दोहराते हुए युवाओं की ऊर्जा को राष्ट्र निर्माण में लगाने की अपील की गई। * पीएम स्वनिधि से जमीनी आत्मनिर्भरता: रेहड़ी-पटरी और छोटे व्यापारियों को आर्थिक संबल देने वाली इस योजना को स्थानीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ बताया गया। * स्वच्छता और पर्यटन का अटूट नाता: स्वच्छता को दैनिक संस्कार बनाने पर बल दिया गया। पर्यटन स्थलों की स्वच्छता सीधे तौर पर रोजगार और आर्थिक अवसरों को बढ़ाती है। * आध्यात्मिक पर्यटन और आस्था: श्री अमरनाथ यात्रा के सफल समापन के संदर्भ में देश के तीर्थाटन की महत्ता बताई गई। मंत्री ने उल्लेख किया कि छत्तीसगढ़ का 'राम वन गमन पथ' और प्राचीन स्थल भी देश की आध्यात्मिक चेतना के केंद्र हैं। * कृषि में नवाचार और 'Vocal for Local': आधुनिक कृषि पद्धतियों से किसानों की आय बढ़ाने और स्थानीय शिल्पकारों, कलाकारों व उद्यमियों के उत्पादों को प्राथमिकता देकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का संदेश दिया गया। > "प्रधानमंत्री जी का यह मार्गदर्शन हमें अपनी संस्कृति, स्थानीय उत्पादों, युवा शक्ति और पर्यावरण संरक्षण के लिए नई ऊर्जा के साथ काम करने की प्रेरणा देता है।" > — राजेश अग्रवाल, पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री, छत्तीसगढ़ अभिषेक कुमार पाण्डेय स्टेट हेड रिपोर्टर छत्तीसगढ़ हमर प्रदेश सी जी
राजधानी में 30 स्पा सेंटरों पर एक साथ पुलिस की दबिश, 15 टीमों ने 100 से ज्यादा अफसर-कर्मचारियों के साथ की जांच
✍️ हमर प्रदेश छत्तीसगढ़ | स्टेट हेड रिपोर्टर किशोर कुमार दो स्पा सेंटरों में मिली आपत्तिजनक वस्तुएं, मैनेजर और कर्मचारियों पर प्रतिबंधात्मक कार्रवाई रायपुर। राजधानी रायपुर में संचालित स्पा सेंटरों की गतिविधियों और नियमों के पालन की जांच को लेकर रायपुर पुलिस कमिश्नरेट ने शनिवार को बड़े स्तर पर अभियान चलाया। पुलिस ने शहर के अलग-अलग थाना क्षेत्रों में संचालित 30 स्पा सेंटरों की एक साथ जांच की। कार्रवाई के लिए 15 पुलिस टीमों का गठन किया गया था, जिसमें राजपत्रित अधिकारियों सहित 100 से अधिक पुलिस अधिकारी और कर्मचारी शामिल रहे। ग्राहकों के रजिस्टर से CCTV तक की जांच जांच अभियान के दौरान पुलिस टीमों ने स्पा सेंटरों में ग्राहकों के रजिस्टर, CCTV कैमरों की उपलब्धता और रिकॉर्डिंग व्यवस्था की जांच की। इसके अलावा संचालकों, मैनेजरों और कर्मचारियों के पुलिस वेरिफिकेशन से संबंधित दस्तावेज भी खंगाले गए। पुलिस ने कर्मचारियों की आयु संबंधी दस्तावेज, स्टाफ रजिस्टर और अन्य आवश्यक अभिलेखों की भी पड़ताल की। अधिकारियों के मुताबिक, जांच का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि स्पा सेंटर निर्धारित नियमों और आवश्यक प्रक्रियाओं के तहत संचालित किए जा रहे हैं या नहीं। लीज और स्वामित्व के दस्तावेज भी खंगाले पुलिस टीमों ने स्पा सेंटरों में प्रतिबंधित अथवा संदिग्ध गतिविधियों की भी जांच की। इसके साथ ही परिसर की व्यवस्था, लीज और किराए से जुड़े दस्तावेज, स्वामित्व संबंधी कागजात तथा संचालन के लिए आवश्यक अनुमतियों की भी पड़ताल की गई। दो सेंटरों में मिली आपत्तिजनक वस्तुएं पुलिस के अनुसार, जांच के दौरान दो स्पा सेंटरों में आपत्तिजनक वस्तुएं मिलीं। इनमें थाना डीडी नगर क्षेत्र का एलिना स्पा सेंटर और थाना पंडरी क्षेत्र के अंबुजा मॉल स्थित ला थाई स्पा सेंटर शामिल हैं। पुलिस के मुताबिक, दोनों सेंटरों के मैनेजर और कर्मचारियों के खिलाफ आवश्यक प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की जा रही है। आगे भी जारी रहेगी निगरानी रायपुर पुलिस कमिश्नरेट ने स्पष्ट किया है कि शहर में संचालित स्पा सेंटरों की जांच और निगरानी आगे भी जारी रहेगी। जांच के दौरान यदि किसी सेंटर में नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित संचालक, मैनेजर और कर्मचारियों के खिलाफ नियमानुसार वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। तीनों जोन में अधिकारियों के निर्देशन में हुई कार्रवाई पुलिस कमिश्नरेट के अनुसार, यह सघन जांच अभियान पुलिस उपायुक्त वेस्ट जोन रॉबिन्सन गुरिया, पुलिस उपायुक्त सेंट्रल जोन तारकेश्वर पटेल और पुलिस उपायुक्त नॉर्थ जोन दीपमाला कश्यप के निर्देशन में तीनों जोन में चलाया गया। गठित पुलिस टीमों का नेतृत्व सहायक पुलिस आयुक्त स्नेहिल साहू, नंदिनी ठाकुर और पूर्णिमा लामा ने किया। पुलिस का कहना है कि शहर में संचालित स्पा सेंटरों की गतिविधियों, दस्तावेजों और सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी के लिए इस तरह की जांच आगे भी जारी रहेगी।
शारदीय नवरात्रि 2026: इस बार 10 दिनों तक बरसेगी मां दुर्गा की कृपा; गज पर आगमन लाएगा सुख-समृद्धि और वैभव
अभिषेक कुमार पाण्डेय रिपोर्टर बिलासपुर छत्तीसगढ़ शारदीय नवरात्रि 2026: इस बार 10 दिनों तक बरसेगी मां दुर्गा की कृपा; गज पर आगमन लाएगा सुख-समृद्धि और वैभव शरद ऋतु की शुरुआत, आसमान में तैरते सफेद बादलों के टुकड़े और भोर की ठंडी हवा में महकती हरसिंगार की खुशबू यह संदेश लेकर आती है कि जगतजननी मां जगदंबा अपने मायके पधार रही हैं। वर्ष 2026 में शारदीय नवरात्रि का महापर्व अत्यंत अलौकिक और दुर्लभ संयोग लेकर आ रहा है। इस वर्ष शक्ति की साधना पूरे 10 दिनों तक चलेगी। आमतौर पर नवरात्रि नौ दिनों की होती है, लेकिन जब किसी तिथि की वृद्धि होती है, तो देवी आराधना का समय और अधिक बढ़ जाता है। इस बार मां कालरात्रि के स्वरूप की उपासना दो दिन (17 और 18 अक्टूबर) होने से भक्तों को मां के उग्र किंतु करुणामयी स्वरूप को समर्पित करने के लिए अतिरिक्त समय प्राप्त होगा। हाथी पर आगमन: सुख, समृद्धि और हरियाली का वरदान देवी भागवत पुराण का एक प्रसिद्ध श्लोक है: > शशिसूर्ये गजारूढ़ा शनिभौमे तुरंगमे। > गुरौ शुक्रे च दोलायां बुधे नौकाप्रकीर्तिता॥ > जब नवरात्रि का शुभारंभ रविवार को होता है, तब मां दुर्गा कैलाश पर्वत से भूलोक की यात्रा के लिए गज (हाथी) को अपना वाहन बनाती हैं। सनातन परंपरा में हाथी को ज्ञान, अपार बल, शांति, प्रचुर वर्षा और कृषि समृद्धि का प्रतीक माना गया है। धर्मग्रंथों के अनुसार, जब मां हाथी पर सवार होकर आती हैं, तो पृथ्वी पर अन्न-धन के भंडार भरते हैं, अकाल दूर होता है और जनमानस में बौद्धिक चेतना का विस्तार होता है। यह आगमन संकेत देता है कि समाज में अशांति और अभाव का नाश होकर स्थिरता और वैभव का संचार होगा। दस दिनों की नौ दिव्य शक्तियां: एक आध्यात्मिक यात्रा नवरात्रि केवल उपवास और मंत्र जाप का पर्व नहीं है, बल्कि यह अंतर्मन के विकारों को भस्म कर आत्मा के जागरण की यात्रा है: * 11 अक्टूबर — मां शैलपुत्री: हिमालय राज की पुत्री, जो जीवन में स्थिरता, दृढ़ निश्चय और योग साधना की नींव रखती हैं। * 12 अक्टूबर — मां ब्रह्मचारिणी: कठोर तप और वैराग्य की देवी, जो विपरीत परिस्थितियों में भी संयम और साधना का मार्ग सिखाती हैं। * 13 अक्टूबर — मां चंद्रघंटा: मस्तक पर अर्धचंद्र धारण किए हुए मां, जो भक्तों को परम शांति, एकाग्रता और आंतरिक साहस प्रदान करती हैं। * 14 अक्टूबर — मां कूष्मांडा: अपनी मंद मुस्कान से शून्य ब्रह्मांड को रचने वाली आदिशक्ति, जो जीवन में ऊर्जा, प्रकाश और आरोग्यता का संचार करती हैं। * 15 अक्टूबर — मां स्कंदमाता: भगवान कार्तिकेय की माता, जो वात्सल्य और ममता का साक्षात रूप हैं; इनकी कृपा से मोक्ष और ज्ञान का मार्ग खुलता है। * 16 अक्टूबर — मां कात्यायनी: महर्षि कात्यायन की तपस्या से प्रकट हुईं मां, जिन्होंने महिषासुर के विनाश का संकल्प लिया था। यह स्वरूप बुराई के विरुद्ध अडिग खड़े होने की प्रेरणा देता है। * 17 एवं 18 अक्टूबर — मां कालरात्रि: घने अंधकार के समान वर्ण, बिखरे बाल और त्रिनेत्र धारिणी। देखने में यह स्वरूप अत्यंत भयानक है, किंतु अपने भक्तों के लिए मां 'शुभंकरी' हैं। काल का भी काल हरने वाली मां कालरात्रि भय, नकारात्मक ऊर्जा, रोग और शत्रुओं का पूर्ण संहार करती हैं। * 19 अक्टूबर — मां महागौरी: भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तप करने वाली मां, जिनका वर्ण शंख और चंद्र के समान धवल है। यह स्वरूप अंतःकरण की शुद्धि और पापों से मुक्ति दिलाता है। * 20 अक्टूबर — मां सिद्धिदात्री: समस्त सिद्धियों और अलौकिक शक्तियों को प्रदान करने वाली आदिशक्ति। भगवान शिव ने भी इन्हीं की कृपा से 'अर्धनारीश्वर' रूप प्राप्त किया था। महिषासुर मर्दिनी की पौराणिक गाथा शारदीय नवरात्रि की सबसे प्रमुख कथा महिषासुर के अंत से जुड़ी है। जब असुरराज महिषासुर ने ब्रह्मा जी से वरदान पाकर तीनों लोकों में हाहाकार मचा दिया और देवताओं को स्वर्ग से निष्कासित कर दिया, तब त्रिदेवों (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) और समस्त देवताओं के दिव्य तेज से एक परम तेजस्वी नारी शक्ति का प्राकट्य हुआ। देवताओं ने मां को अपने अस्त्र-शस्त्र भेंट किए—शिव ने त्रिशूल, विष्णु ने चक्र, इंद्र ने वज्र और हिमालय ने सिंह प्रदान किया। मां दुर्गा ने महिषासुर की विशाल सेना के साथ नौ दिनों तक भीषण युद्ध किया और अंततः दसवें दिन (विजयादशमी) उसका वध कर धर्म की पुनः स्थापना की। इस वर्ष जब 11 अक्टूबर से घर-घर घटस्थापना होगी और अखंड ज्योत प्रज्वलित की जाएगी, तो यह दस दिनों का महापर्व केवल पूजा तक सीमित न रहकर हमारे भीतर के अहंकार, आलस्य और बुराइयों पर विजय पाने का संकल्प बनेगा। हाथी पर सवार होकर आ रहीं जगदंबा सभी के जीवन में सुख, आरोग्य और वैभव की वर्षा करें। जय माता दी! हमर प्रदेश सी जी
छत्तीसगढ़ की माटी में दबा गोंडवाना का गौरवशाली अतीत — राजा रघुराज सिंह स्टेडियम और बूढ़ातालाब का अनकहा सच
अभिषेक कुमार पाण्डेय रिपोर्टर बिलासपुर छत्तीसगढ़ विशेष रिपोर्ट: छत्तीसगढ़ की माटी में दबा गोंडवाना का गौरवशाली अतीत — राजा रघुराज सिंह स्टेडियम और बूढ़ातालाब का अनकहा सच रायपुर/बिलासपुर: इतिहास के पन्नों पर अक्सर वही दर्ज होता है जो सत्ता के करीब रहा, लेकिन छत्तीसगढ़ की धरती पर गढ़े गए विशाल सरोवर और ऐतिहासिक धरोहरें आज भी गोंडवाना साम्राज्य की समृद्ध विरासत की गवाही दे रही हैं। गढ़-मंडला के अधीन रहे छत्तीसगढ़ के प्रमुख अंचलों में पंडरिया-कवर्धा के जगत राजवंश और रायपुर के बूढ़ातालाब का इतिहास आज जनमानस के सामने अपनी वास्तविक पहचान की मांग कर रहा है। 1. बिलासपुर का राजा रघुराज सिंह स्टेडियम: पंडरिया राजघराने का खेल इतिहास बिलासपुर शहर के बीचों-बीच स्थित क्रिकेट स्टेडियम केवल एक खेल मैदान नहीं, बल्कि पंडरिया रियासत के राजा रघुराज सिंह जगत की ऐतिहासिक पहचान है। * राजवंश का आधार: पंडरिया जमींदारी कभी कलचुरी शासकों के अधीन नहीं रही, बल्कि गढ़-मंडला के मड़ावी गोंड राजाओं के सीधे नियंत्रण में थी। 13वीं सदी के पूर्व जब लोधी शासकों ने गढ़-मंडला की संप्रभुता की अनदेखी शुरू की, तब नागवंशी गोंड राजाओं ने अपने पराक्रमी सेनापति राय सिंह जगत को जिम्मेदारी सौंपी, जिनका परिवार आगे चलकर पंडरिया और कवर्धा में स्थापित हुआ। * मैदान का स्वर्णिम काल: राजा रघुराज सिंह (शासनकाल 1929 तक) के नाम पर बने इस स्टेडियम ने 1978 से 1990 तक प्रतिष्ठित रणजी ट्रॉफी मैचों की मेजबानी की। * चार दशक का इंतजार खत्म: इस ऐतिहासिक मैदान में लगभग 40 वर्षों से फ्लड लाइट्स की मांग की जा रही थी, जिसे अब हाई-मास्ट लाइटों की स्थापना के साथ आधुनिक स्वरूप दिया गया है। > जगत राजवंश के प्रमुख स्तंभ: > * रानी मानकुमारी देवी जगत: सारंगढ़ राजघराने से संबंध; 1929 में पति के उपरांत जमींदारी संभाली और 1938 में रानी की आधिकारिक उपाधि प्राप्त की। > * महाराज विश्वराज प्रताप सिंह जगत: कवर्धा राज परिवार के प्रतिष्ठित बड़े महाराज। > * योगेश्वर राज सिंह जगत (जन्म 1967): राज गोंड ठाकुर नागवंशी वंश के वारिस, राजकुमार कॉलेज (रायपुर) के पूर्व छात्र व सक्रिय राजनीतिक व्यक्तित्व। > 2. रायपुर का 'बूढ़ातालाब': श्रम, सैन्य रणनीति और बड़ादेव की आस्था राजधानी रायपुर का हृदय स्थल कहे जाने वाले तालाब की नींव किसी आधुनिक योजना का परिणाम नहीं, बल्कि 13वीं-14वीं सदी में गोंड राजा रायसिंह जगत की दूरगामी सैन्य और सामाजिक सोच थी। | ऐतिहासिक तथ्य | विवरण | |---|---| | निर्माता | गोंड राजा रायसिंह जगत (गढ़-मंडला सेनापति) | | श्रम शक्ति | 3,000 महिलाएं और 4,000 पुरुष (कुल 7,000 श्रमसाधक) | | निर्माण अवधि | लगभग 6 माह का निरंतर श्रम | | कुल क्षेत्रफल | 12 एकड़ में विस्तृत जल संरचना | | मूल उद्देश्य | गोंडवाना सेना की जल आपूर्ति व जन-कल्याण | * नामकरण का मूल आधार: तालाब के मध्य में गोंड जनजाति के आराध्य 'बूढ़ादेव' (बड़ादेव) की स्थापना की गई थी। 'बूढ़ादेव' शब्द विशुद्ध रूप से गोंडी परंपरा और आस्था का प्रतीक है, जिसके आधार पर इस जलाशय और आसपास के पूरे इलाके को 'बूढ़ापारा' नाम मिला। * पहचान का संघर्ष: वर्तमान में इसे 'स्वामी विवेकानंद सरोवर' के रूप में प्रचारित किए जाने को लेकर इतिहास के जानकारों और गोंडवाना समाज का स्पष्ट मत है कि आधुनिक नामकरण के कारण इस स्थल के 700 साल पुराने मूल गोंडी इतिहास और जनजातीय योगदान को हाशिए पर धकेला जा रहा है। धरोहर और वर्तमान स्थिति * स्थान: बूढ़ातालाब (बूढ़ापारा), रायपुर – 492001 * आराध्य स्थल: आदिशक्ति बूढ़ा देव महादेव * व्यवस्था: आदिशक्ति बूढ़ा देव सेवा समिति * धार्मिक परंपरा: प्रत्येक मासिक शिवरात्रि पर यहां आदिशक्ति बूढ़ादेव का विशेष अभिषेक एवं अनुष्ठान आयोजित होता है। रायपुर से लेकर बिलासपुर और कवर्धा तक फैली गोंडवाना कालीन संरचनाएं यह साबित करती हैं कि छत्तीसगढ़ का स्थापत्य और इतिहास गोंड राजाओं के पराक्रम के बिना अधूरा है। हमर प्रदेश सी जी
सलाखों के पीछे छलके जज्बात: रायगढ़ जिला जेल में 1227 बहनों ने 317 कैदी भाइयों की कलाई पर बांधी राखी, नम आंखों से गूंजा रक्षा का संकल्प!
सलाखों के पीछे छलके जज्बात: रायगढ़ जिला जेल में 1227 बहनों ने 317 कैदी भाइयों की कलाई पर बांधी राखी, नम आंखों से गूंजा रक्षा का संकल्प! दीवारों और पहरों के बीच टूटा विरह का सन्नाटा; महिला बंदियों की कलाई पर भाइयों ने बांधा प्यार का धागा, जेल परिसर बना भावुक मिलन का गवाह रायगढ़। चारदीवारी, ऊंचे पहरे और लोहे की सलाखें भी आज भाई-बहन के अटूट स्नेह और विश्वास को रोक नहीं सकीं। रक्षाबंधन के पावन पर्व पर जिला जेल रायगढ़ का माहौल उस वक्त पूरी तरह भावुक हो गया, जब जेल परिसर में एक-दो नहीं बल्कि 1227 बहनें अपने 317 बंदी भाइयों से मिलने और उनकी कलाई पर रक्षा सूत्र बांधने पहुंचीं। महीनों और सालों से अपनों से दूर रह रहे बंदियों के लिए यह दिन आंसुओं और मुस्कान के अनूठे संगम में बदल गया। सलाखों के पार आंसुओं में घुली खुशियां सुबह से ही जिला जेल परिसर के बाहर बहनों की लंबी कतारें देखी गईं। जेल के भीतर जब बहनों ने माथे पर तिलक लगाकर अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधी और मुंह मीठा कराया, तो कई भाइयों की आंखें छलक पड़ीं। * 1227 बहनों का अटूट विश्वास: कुल 317 बंदियों को उनकी बहनों ने राखी बांधकर उनके सुधरने, सुरक्षित रहने और जल्द रिहाई की दुआएं मांगीं। * महिला बंदियों के लिए भी खास पल: यह पर्व केवल पुरुष बंदियों तक सीमित नहीं रहा; जेल में निरुद्ध महिला बंदियों से मिलने पहुंचे भाइयों ने भी उनकी कलाई पर राखी बांधकर सुरक्षा और साथ निभाने का वचन दिया। * बचपन की यादों से महका प्रांगण: कैदियों के चेहरों पर परिजनों से मिलने की चमक और पारिवारिक स्पर्श ने पूरे जेल परिसर को एक संवेदनशील और आत्मीय माहौल में बदल दिया। जेल प्रशासन का मानवीय चेहरा: सकारात्मक बदलाव की पहल जेल प्रशासन ने रक्षाबंधन पर्व को केवल एक औपचारिकता न बनाकर बंदियों को समाज और मुख्यधारा से जोड़ने का एक मजबूत माध्यम बनाया। * पुनर्वास और मानवीय मूल्य: जेल प्रबंधन की इस पहल का मुख्य उद्देश्य बंदियों में सकारात्मक सोच, अपराध से विमुखता और पारिवारिक व मानवीय मूल्यों को पुनर्जीवित करना है। * सुरक्षा और स्वास्थ्य का पुख्ता बंदोबस्त: इस विशाल आयोजन को गरिमामय, शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित तरीके से संपन्न कराने में रायगढ़ पुलिस प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने तत्परता से पूरा सहयोग दिया। > सकारात्मक संदेश: > जेल की सख्त दिनचर्या के बीच रक्षाबंधन का यह पर्व एक उम्मीद की किरण बनकर आया—यह साबित करते हुए कि कानून भले ही गलतियों की सजा दे सकता है, लेकिन रिश्तों और भावनाओं का स्थान हर दीवार से ऊंचा होता है। > अभिषेक कुमार पाण्डेय स्टेट हेड रिपोर्टर छत्तीसगढ़ हमर प्रदेश सी जी