ठेकेदारों के लिए लोक निर्माण विभाग कराएगा GePNIC का प्रशिक्षण, 22-30 सितम्बर तक रोज ऑनलाइन प्रशिक्षण*
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सेवा संकल्प अभियान: सेवा की कहानी, बच्चों को मिला सुरक्षित वातावरण नवीन आंगनबाड़ी से खुशहाल हुआ बचपन, सरखों के में दिखी बदलाव की कहानी
सेवा संकल्प अभियान: सेवा की कहानी, बच्चों को मिला सुरक्षित वातावरण नवीन आंगनबाड़ी से खुशहाल हुआ बचपन, सरखों के में दिखी बदलाव की कहानी जांजगीर-चांपा 21 सितम्बर 2026। सरखों की आंगनबाड़ी की यह कहानी बताती है कि जब विभिन्न योजनाओं और संसाधनों का प्रभावी क्रियान्वयन होता है, तो उसका असर सीधे लोगों के जीवन में दिखाई देता है। कभी जर्जर भवन में सीमित सुविधाओं के बीच संचालित होने वाला यह केंद्र आज बच्चों के लिए बेहतर वातावरण उपलब्ध करा रहा है। सेवा संकल्प अभियान के दौरान सामने आई यह ‘सेवा की कहानी’ बताती है कि विकास का वास्तविक अर्थ तब दिखाई देता है, जब उसका लाभ गांव के बच्चों तक पहुंचे। सरखों की आंगनबाड़ी में आज बच्चों के चेहरे पर खुशी, सीखने की ललक और अभिभावकों के मन में विश्वास दिखाई देता है - यही इस बदलाव की सबसे सुंदर तस्वीर है। जनपद पंचायत नवागढ़ ग्राम पंचायत सरखों के आंगनबाड़ी केंद्र ‘बेहतर आंगनबाड़ी, बेहतर बचपन’ की मिसाल बनकर सामने आया है। योजनाओं के माध्यम से हुए विकास कार्यों ने कभी जर्जर और सीमित सुविधाओं वाले इस केंद्र की तस्वीर बदल दी है। आज यही आंगनबाड़ी बच्चों के लिए सुरक्षित, स्वच्छ और आनंददायक वातावरण उपलब्ध करा रही है। आंगनबाड़ी केंद्र का विकास रोजगार गारंटी योजना (विकसित भारत जी राम जी योजना), महिला एवं बाल विकास विभाग तथा 15वें वित्त की राशि के अभिसरण से कुल 11 लाख 69 हजार रुपये की लागत से किया गया है। पहले भवन की स्थिति खराब होने और पर्याप्त सुविधाएं नहीं होने के कारण अभिभावकों को बच्चों को आंगनबाड़ी भेजने में चिंता रहती थी। अब नई सुविधाओं के साथ बच्चे यहां खेल-खेल में सीख रहे हैं, नियमित पोषण आहार प्राप्त कर रहे हैं और स्वास्थ्य एवं स्वच्छता की जानकारी भी हासिल कर रहे हैं। बच्चों के सर्वांगीण विकास को ध्यान में रखते हुए रोजगार गारंटी योजना (वीबीजीरामजी) से 8 लाख रुपये, महिला एवं बाल विकास विभाग से 2 लाख रुपये तथा 15वें वित्त से 1 लाख 69 हजार रुपये का अभिसरण किया गया। इससे आंगनबाड़ी भवन के साथ आवश्यक आधारभूत सुविधाओं का विकास संभव हुआ। नई सुविधाओं के साथ केंद्र में बच्चों के बैठने, सीखने और खेलने के लिए बेहतर वातावरण तैयार किया गया है। परिसर को स्वच्छ, सुंदर और पर्यावरण-अनुकूल बनाने के लिए पौधे भी लगाए गए हैं, जिनकी देखभाल बच्चे उत्साहपूर्वक कर रहे हैं। इस तरह आंगनबाड़ी बच्चों के लिए केवल पोषण और प्रारंभिक शिक्षा का केंद्र ही नहीं, बल्कि सीखने, खेलने और प्रकृति से जुड़ने का स्थान भी बन गई है। राजेश्वरी बरेठ बोलीं - अब बच्चों को भेजने में लगता है भरोसा आंगनबाड़ी में दर्ज बच्ची माही बरेठ की माता श्रीमती राजेश्वरी बरेठ बताती हैं कि पहले और अब की आंगनबाड़ी में काफी अंतर है। पहले आंगनबाड़ी भवन खराब और जर्जर हो गया था, नई सुविधाओं से युक्त भवन बनने के बाद बच्चों को भी यहां आना अच्छा लगता है और अभिभावकों का भी बच्चों की सुरक्षा एवं सुविधाओं को लेकर भरोसा बढ़ा है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता श्रीमती अंजनी राठौर एवं सहायिका श्रीमती संगीता साहू द्वारा बच्चों को नियमित पोषण आहार, प्रारंभिक शिक्षा, खेल आधारित गतिविधियां तथा स्वास्थ्य एवं स्वच्छता संबंधी जानकारी दी जा रही है। बेहतर सुविधाओं और नियमित सेवाओं से बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य और सीखने के अनुभव को बेहतर बनाने में मदद मिल रही है। गांधी लाल साहू,ब्लॉक रिपोर्टर,जांजगीर, छत्तीसगढ़ हमर प्रदेश सी जी
चाक पर बैठे डिप्टी CM अरुण साव, अपने हाथों से गढ़ा मिट्टी का बर्तन: रायगढ़ में ‘वोकल फॉर लोकल’ का दिया संदेश, स्थानीय शिल्पकारों से खरीदे उत्पाद*
*चाक पर बैठे डिप्टी CM अरुण साव, अपने हाथों से गढ़ा मिट्टी का बर्तन: रायगढ़ में ‘वोकल फॉर लोकल’ का दिया संदेश, स्थानीय शिल्पकारों से खरीदे उत्पाद* रायगढ़। रायगढ़ प्रवास के दौरान छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री अरुण साव का एक अलग अंदाज देखने को मिला। सेवा संकल्प अभियान के तहत लगाए गए ‘वोकल फॉर लोकल’ स्टॉल पर पहुंचकर उन्होंने स्थानीय उत्पादों का अवलोकन किया और कुम्हार के चाक पर बैठकर स्वयं मिट्टी को आकार देने की कोशिश की। सामने आई तस्वीर में साव एक स्थानीय कारीगर की मदद से चाक पर मिट्टी का बर्तन तैयार करते नजर आ रहे हैं। कुम्हार के साथ चाक पर आजमाया हाथ कार्यक्रम के दौरान स्थानीय कुम्हार मिट्टी के बर्तन बनाने की प्रक्रिया प्रदर्शित कर रहे थे। इसी दौरान उपमुख्यमंत्री अरुण साव चाक के सामने बैठे और कारीगर के मार्गदर्शन में मिट्टी को आकार दिया। तस्वीर में युवा कारीगर उन्हें बर्तन बनाने में सहयोग करता दिखाई दे रहा है, जबकि आसपास मौजूद लोग इस गतिविधि को देखते नजर आ रहे हैं। साव ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में भी स्थानीय शिल्पकार के साथ चाक पर हाथ आजमाने तथा स्थानीय उत्पाद खरीदकर उनका उत्साह बढ़ाने का उल्लेख किया। ‘वोकल फॉर लोकल’ को बढ़ावा देने का संदेश रायगढ़ जिले में चल रहे सेवा संकल्प अभियान के तहत स्थानीय उत्पादों और कारीगरों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से ‘वोकल फॉर लोकल’ गतिविधियों को भी शामिल किया गया है। स्थानीय उत्पादों के स्टॉल के माध्यम से पारंपरिक शिल्प और स्थानीय स्तर पर तैयार वस्तुओं को लोगों के सामने लाने का प्रयास किया जा रहा है। उपमुख्यमंत्री का कुम्हार के चाक पर बैठना इसी अभियान के दौरान सामने आया प्रमुख दृश्य रहा। स्थानीय उत्पाद खरीदकर शिल्पकारों का बढ़ाया उत्साह स्टॉल का अवलोकन करने के दौरान अरुण साव ने स्थानीय शिल्पकारों द्वारा तैयार उत्पादों की जानकारी ली और कुछ उत्पाद खरीदे। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ आह्वान का उल्लेख करते हुए स्थानीय उत्पादों को अपनाने और स्थानीय कारीगरों को प्रोत्साहित करने की बात अपने सोशल मीडिया पोस्ट में कही। तस्वीर ने खींचा ध्यान कार्यक्रम की तस्वीर में उपमुख्यमंत्री एक सामान्य सहभागी की तरह कारीगर के साथ चाक पर काम करते दिखाई देते हैं। मिट्टी के बर्तन जैसे पारंपरिक शिल्प आज भी अनेक स्थानीय परिवारों की आजीविका से जुड़े हैं। ऐसे में इस गतिविधि के जरिए स्थानीय उत्पादों और पारंपरिक कारीगरों की ओर ध्यान आकर्षित करने का संदेश सामने आया। *Report* *दीपक त्रिपाठी ( block reporter)* *हमर प्रदेश CG* www.hamarpradeshcg.com
'महोत्सव का जश्न या बदहाल सड़कों का दर्द?': नगपुरा मेले का नाम बदलने पर बेलतरा में सियासी घमासान, कांग्रेस का तीखा तंज— "3 करोड़ और दें, हर महीने कराएं इवेंट!"
'महोत्सव का जश्न या बदहाल सड़कों का दर्द?': नगपुरा मेले का नाम बदलने पर बेलतरा में सियासी घमासान, कांग्रेस का तीखा तंज— "3 करोड़ और दें, हर महीने कराएं इवेंट!" प्राचीन नगपुरा मेले का नाम 'बेलतरा महोत्सव' करने और अवधि घटाने पर भड़की राजनीति; कांग्रेस नेता अंकित गौरहा बोले— "बुनियादी मुद्दों से ध्यान भटकाने और विधायक के मंच पर नाचने के लिए हो रही 30 लाख की फिजूलखर्ची।" बिलासपुर/बेलतरा। बेलतरा विधानसभा क्षेत्र में खस्ताहाल सड़कों और बुनियादी समस्याओं के बीच अब सांस्कृतिक पहचान को लेकर भी राजनीतिक तापमान बढ़ गया है। वर्षों पुरानी परंपरा वाले 'नगपुरा मेला महोत्सव' का नाम बदलकर 'बेलतरा महोत्सव' किए जाने और आयोजन की अवधि घटाए जाने पर कांग्रेस ने भाजपा सरकार और स्थानीय विधायक के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कांग्रेस नेता अंकित गौरहा ने इसे जनभावनाओं से खिलवाड़ और राजनीतिक लाभ के लिए प्राचीन संस्कृति पर हमला करार दिया है। पहचान पर चोट: 7 दिन का मेला सिमटा, नाम भी बदला कांग्रेस नेता अंकित गौरहा ने कहा कि नगपुरा मेला महोत्सव इस अंचल की ऐतिहासिक धरोहर और लोकआस्था का केंद्र रहा है। पूर्व में यह भव्य आयोजन करीब सात दिनों तक चलता था, जिसे क्षेत्रवासी अपनी पहचान मानते हैं। * जनविरोध की अनदेखी: स्थानीय ग्रामीणों और क्षेत्रवासियों द्वारा पहले भी नाम बदलने पर लिखित व मौखिक आपत्तियां दर्ज कराई गई थीं, जिसे दरकिनार कर दिया गया। * सस्ती राजनीति का आरोप: गौरहा ने कहा कि किसी प्राचीन परंपरा और जनभावना से जुड़े आयोजन का नाम बदलकर अपनी सियासत चमकाना अनुचित है। जनता को महोत्सव से ऐतराज नहीं, बल्कि ऐतिहासिक पहचान मिटाने की कोशिश से सख्त आपत्ति है। "3 करोड़ 30 लाख और दीजिए, हर महीने नाच-गाना कराइए": तीखा कटाक्ष मुख्यमंत्री द्वारा बेलतरा महोत्सव के लिए 30 लाख रुपये की घोषणा पर अंकित गौरहा ने तीखा व्यंग्य किया। उन्होंने कहा: > "अगर सरकार को सिर्फ आयोजनों में ही दिलचस्पी है, तो मुख्यमंत्री जी को 3 करोड़ 30 लाख रुपये और घोषित कर देने चाहिए ताकि बेलतरा में हर महीने एक नया महोत्सव हो सके। इससे जनता सड़क के गड्ढे, बिजली की कटौती और स्वास्थ्य की बदहाली भूल जाएगी और क्षेत्रीय विधायक महोदय को भी हर मंच पर अपनी नृत्य कला का प्रदर्शन करने का भरपूर अवसर मिल जाएगा।" > सड़क पर गड्ढे, मंच पर जलसा: प्राथमिकता पर सवाल गौरहा ने क्षेत्र की जमीनी हकीकत का खाका खींचते हुए आरोप लगाया कि जनता मूलभूत सुविधाओं के अभाव में त्राहि-त्राहि कर रही है, जबकि सरकार इवेंट मैनेजमेंट में व्यस्त है: * ये मुख्य मार्ग बदहाल: अशोक नगर–बिरकोना मार्ग, राजकिशोर नगर चौक से छठ घाट मार्ग और सेंदरी–मोपका बायपास जैसे प्रमुख रास्ते चलने लायक नहीं बचे हैं। * प्राथमिकता तय करे सत्ता पक्ष: उन्होंने कहा कि बेलतरा की जनता को घोषणाओं और चकाचौंध से ज्यादा सुरक्षित सड़कें, सुचारू बिजली और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं चाहिए। सरकार और क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों को अब यह तय करना होगा कि उनकी प्राथमिकता जनता की बुनियादी तकलीफों का हल निकालना है या सिर्फ लाखों रुपये फूंककर सियासी जलसा मनाना।
गरीबों के सपने पूरे करने छत्तीसगढ़ सरकार का संवेदनशील निर्णय : प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के लिए निवास की वैधता की कट-ऑफ डेट 2015 के स्थान पर 2024 की गई*
*गरीबों के सपने पूरे करने छत्तीसगढ़ सरकार का संवेदनशील निर्णय : प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के लिए निवास की वैधता की कट-ऑफ डेट 2015 के स्थान पर 2024 की गई* *सरकार ने पात्रता का दायरा बढ़ाया, विगत 9 वर्षो से निवासरत परिवारों को भी अब मिलेगा लाभ* *राज्य शासन ने निकायों को नई कट-ऑफ तिथि के अनुसार 15 दिनों में नए हितग्राहियों को एएचपी आवासों का लाभ दिलाना सुनिश्चित करने कहा* *गरीब परिवारों को सुरक्षित, सम्मानजनक और स्थाई आवास उपलब्ध कराने हम प्रतिबद्ध – मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय* *एएचपी परियोजनाओं में हितग्राही चयन और योजनाबद्ध बसाहट को मिलेगी नई गति – उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव* बिलासपुर. 12 सितम्बर 2026. शहरी गरीबों के आशियाने के सपने को पूरा करने छत्तीसगढ़ सरकार ने महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। नगरीय निकायों में रहने वाले परिवारों के हित में संवेदनशील फैसला लेते हुए राज्य शासन ने प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 1.0 के लिए निवास की वैधता की कट-ऑफ तिथि को 31 अगस्त 2015 से बढ़ाकर अब 31 अगस्त 2024 कर दिया है। सरकार के इस निर्णय से विगत 9 वर्षों से शहरों में रह रहे लोगों को भी योजना का लाभ मिल सकेगा। छत्तीसगढ़ सरकार का यह निर्णय हजारों शहरी परिवारों के लिए पक्के घर का नया अवसर लेकर आया है। “आवास से सम्मान, सम्मान से सशक्तीकरण” के संकल्प को साकार करने की दिशा में राज्य शासन का यह महत्वपूर्ण कदम है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री श्री अरुण साव के मार्गदर्शन में शासन ने शहरी गरीबों एवं जरूरतमंद परिवारों के आवास के सपने को साकार करने के लिए संवेदनशील और दूरदर्शी निर्णय लिया है। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के अंतर्गत हितग्राहियों के निवास की वैधता के निर्धारण के लिए नई कट-ऑफ-तिथि 31 अगस्त 2024 निर्धारित करते हुए इसका आदेश मंत्रालय से जारी कर दिया है। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा ने बताया कि शासन द्वारा इस आशय का आदेश प्रसारित कर दिया गया है। पूर्व में निर्धारित 31 अगस्त 2015 की तिथि में संशोधन से राज्य के नगरीय क्षेत्रों में निवासरत अधिक पात्र परिवार प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 1.0 का लाभ ले सकेंगे। यह निर्णय शहरी क्षेत्रों की बदलती आवश्यकताओं, बढ़ती आबादी तथा गरीब एवं निम्न आय वर्ग के परिवारों की वास्तविक आवासीय जरूरतों को ध्यान में रखकर लिया गया है। *हर पात्र परिवार तक पक्के आवास की पहुंच* राज्य शासन का यह निर्णय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के “सबके लिए आवास” के संकल्प तथा मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार की गरीब कल्याण की प्राथमिकता को मजबूत करता है। इससे शहरी क्षेत्रों में निवासरत अधिक जरूरतमंद परिवारों का पारदर्शी सर्वेक्षण, दस्तावेज सत्यापन एवं पात्रता परीक्षण कर उन्हें योजना के दायरे में शामिल करने का मार्ग प्रशस्त होगा। इस निर्णय से किराये के आवासों, अस्थायी बस्तियों या अपर्याप्त आवासीय परिस्थितियों में जीवन यापन कर रहे पात्र परिवारों को सुरक्षित, पक्के और सम्मानजनक आवास उपलब्ध कराने के प्रयासों को नई गति मिलेगी। पक्का आवास केवल छत नहीं, बल्कि परिवारों के लिए सुरक्षा, स्थायित्व, गरिमा और बच्चों के बेहतर भविष्य का आधार है। *एएचपी परियोजनाओं में बसाहट को मिलेगी गति* प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 1.0 के अंतर्गत निर्मित अफोर्डेबल हाउसिंग इन पार्टनरशिप (एएचपी) परियोजनाओं में पात्र हितग्राहियों का चयन एवं आबंटन अब और अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकेगा। विस्तारित कट-ऑफ तिथि से हितग्राही आधार व्यापक होगा, जिससे अधिक परिवार योजनाबद्ध आवासीय परिसरों में सम्मानपूर्वक बस सकेंगे। एएचपी परिसरों में सुव्यवस्थित बसाहट को प्रोत्साहन के साथ ही पानी, बिजली, सड़क, स्वच्छता, सामुदायिक भवन एवं अन्य मूलभूत सुविधाओं का प्रभावी उपयोग भी सुनिश्चित होगा। शहरी गरीब परिवारों को बेहतर आवासीय वातावरण से जोड़ने के साथ-साथ यह पहल स्वस्थ, सुरक्षित और समावेशी शहरों के निर्माण में भी सहायक होगी। *एएचपी आवासों के निर्माण में अच्छी प्रगति, 29267 आवास पूर्ण* छत्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 1.0 के अफोर्डेबल हाउसिंग इन पार्टनरशिप (एएचपी) के अंतर्गत अच्छी प्रगति दर्ज की गई है। प्रदेश में एएचपी घटक के अंतर्गत अब तक 36 हजार 969 आवास स्वीकृत किए गए हैं। इनमें से 29 हजार 267 आवास पूर्ण हो चुके हैं, जो स्वीकृत आवासों का लगभग 79 प्रतिशत है। शेष 7702 आवासों का निर्माण विभिन्न चरणों में प्रगतिरत है। यह प्रगति राज्य सरकार की गुणवत्तापूर्ण, समयबद्ध एवं हितग्राही-केंद्रित आवास निर्माण के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है। *30 हजार से अधिक परिवारों को आवास आबंटित* राज्य में एएचपी के अंतर्गत निर्मित एवं उपलब्ध आवासों में से अब तक 30 हजार 438 आवासों का आबंटन किया जा चुका है। इनमें से 21 हजार 923 परिवार अपने पक्के आवासों में निवास प्रारंभ कर चुके हैं। इन परिवारों के लिए पक्का आवास केवल भवन नहीं, बल्कि सुरक्षित जीवन, सामाजिक सम्मान, बच्चों की बेहतर शिक्षा और परिवार के उज्ज्वल भविष्य का मजबूत आधार है। *हर पात्र परिवार तक पक्के आवास की पहुंच* राज्य सरकार का उद्देश्य केवल आवास निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रत्येक पात्र शहरी परिवार को सुरक्षित, स्थायी और सम्मानजनक आवास से जोड़ना है। संशोधित कट-ऑफ तिथि राज्य सरकार की जनसंवेदनशील कार्यशैली और अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने की प्रतिबद्धता का प्रमाण है। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग द्वारा प्रदेश के सभी नगर निगमों, नगर पालिकाओं एवं नगर पंचायतों को संशोधित प्रावधानों के अनुरूप पात्र हितग्राहियों के चिन्हांकन, सत्यापन और आवास आबंटन की कार्यवाही प्राथमिकता से सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। हितग्राहियों का चयन प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 1.0 के दिशा-निर्देशों तथा पारदर्शी प्रक्रिया के अनुसार किया जाएगा। *प्रमुख सचिव ने निकायों को दी समय-सीमा* नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा ने नगरीय निकायों के आयुक्तों एवं मुख्य नगर पालिका अधिकारियों को संशोधित आदेश का पालन करते हुए 15 दिनों में आवास से वंचितों को भागीदारी में किफायती आवास का लाभ दिलाना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने राज्य शहरी विकास अभिकरण (सूडा) के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री सुमीत अग्रवाल को इसकी नियमित मॉनिटरिंग के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि जनहितैषी इस योजना में किसी भी प्रकार की कोताही व लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने नागरिकों से भी अपील की है कि वे अपने नगरीय निकाय में जाकर नवीन पात्रता से संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत कर एएचपी आवास का नियमानुसार आबंटन प्राप्त करें। *केंद्र और राज्य सरकार से आवास के लिए अनुदान* प्रधामंनत्री आवास योजना (शहरी) 1.0 के एएचपी घटक अन्तर्गत स्लम में निवासरत् शहरी गरीब आवासहीन परिवारों के व्यवस्थापन हेतु केन्द्र सरकार द्वारा प्रति आवास 1.50 लाख रुपए एवं राज्य शासन द्वारा 2.50 लाख रुपए का अनुदान दिया जाता है। इसमें हितग्राहियों को अपना अंशदान केवल 75 हज़ार रुपए प्रति आवास आसान किश्तों में जमा करने की सुविधा प्रदान की गई है। इसी प्रकार एएचपी घटक अन्तर्गत शहरी क्षेत्रों में किराये में निवासरत् कमज़ोर आय वर्ग के पात्र परिवारों को स्वयं का पक्का मकान दिए जाने हेतु केन्द्र सरकार द्वारा प्रति आवास 1.50 लाख रुपए अनुदान प्रदान किया जाता है एवं राज्य शासन द्वारा आवास निर्माण हेतु नि:शुल्क भूमि उपलब्ध कराई जाती है। इसमें हितग्राहियों को अपना अंशदान 3.25 लाख रुपए प्रति आवास, आसान किश्तों में जमा कराने की सुविधा प्रदान की गई है। राज्य शासन द्वारा नगरीय निकायों के माध्यम से सभी हितग्राहियों को उनके हितग्राही अंशदान जमा कराने में सहुलियत के लिए निरन्तर लोन मेला का आयोजन भी किया जा रहा है। *“प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 1.0 में हितग्राही चयन की कट-ऑफ तिथि 31 अगस्त 2024 तक बढ़ाने से शहरी क्षेत्रों के अधिक पात्र एवं जरूरतमंद परिवार पक्के आवास के लाभ से जुड़ सकेंगे। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के ‘सबके लिए आवास’ के संकल्प को साकार करते हुए हमारी सरकार हर गरीब परिवार को सुरक्षित, सम्मानजनक और स्थायी आवास उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।” - मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय* *“राज्य सरकार ने शहरी गरीबों की वास्तविक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 1.0 में हितग्राही चयन की कट-ऑफ तिथि 31 अगस्त 2024 तक निर्धारित की है। इससे अधिक पात्र परिवारों को पक्के आवास का अवसर मिलेगा और एएचपी परियोजनाओं में हितग्राही चयन एवं योजनाबद्ध बसाहट को नई गति मिलेगी। हमारा लक्ष्य प्रत्येक पात्र परिवार को सम्मानजनक आवास से जोड़ना है।” - उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री श्री अरुण साव* अभिषेक कुमार पाण्डेय स्टेट हेड रिपोर्टर बिलासपुर छत्तीसगढ़ हमर प्रदेश सी जी
शिक्षा का ‘कैपिटल’ या निरक्षरता का गढ़? बिलासपुर में 1.13 लाख अनपढ़; बस्तर-सरगुजा जैसे वनांचल भी निकले आगे
शिक्षा का ‘कैपिटल’ या निरक्षरता का गढ़? बिलासपुर में 1.13 लाख अनपढ़; बस्तर-सरगुजा जैसे वनांचल भी निकले आगे हाइकोर्ट, सेंट्रल यूनिवर्सिटी और दर्जनों नामी कॉलेज वाले शहर की जमीनी हकीकत ने उड़ाए सरकार के होश, स्कूल शिक्षा विभाग के सर्वे में सबसे निचले पायदान पर ‘न्यायधानी’ बिलासपुर छत्तीसगढ़ की 'न्यायधानी' और प्रदेश का दूसरा सबसे बड़ा एजुकेशन हब कहा जाने वाला बिलासपुर आज एक ऐसे कड़वे सच के मुहाने पर खड़ा है, जिसने पूरे प्रशासनिक तंत्र को हिलाकर रख दिया है। जिस शहर में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट है, गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय है, मेडिकल और इंजीनियरिंग कॉलेजों का जाल है, वही बिलासपुर आज पूरे छत्तीसगढ़ में निरक्षरता (Illiteracy) के मामले में नंबर-1 बन गया है। स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से प्रदेश के सभी 33 जिलों में कराए गए गहन साक्षरता सर्वे ने एक ऐसा चौंकाने वाला खुलासा किया है, जिस पर एक बार को यकीन करना मुश्किल लगता है। आंकड़ों का आईना: जब बस्तर ने बिलासपुर को पछाड़ा सर्वे के आंकड़े बताते हैं कि कागजी विकास और असल साक्षरता में कितना भारी अंतर आ चुका है: * राज्य में कुल निरक्षर: 9,76,079 * अकेले बिलासपुर में निरक्षर: 1,13,288 (राज्य के कुल असाक्षरों का 11% से अधिक हिस्सा केवल एक जिले में) * बस्तर संभाग की स्थिति: दशकों तक नक्सलवाद और बीहड़ जंगलों की चुनौतियों से जूझने वाले बस्तर में निरक्षरों का आंकड़ा सिमटकर मात्र 7,997 रह गया। * सरगुजा संभाग की स्थिति: आदिवासी बाहुल्य सरगुजा जिले में यह संख्या केवल 3,568 दर्ज की गई। जहाँ गोलियों की गूँज और घने जंगलों के बीच रहने वाले बच्चे और ग्रामीण मुख्यधारा की शिक्षा अपना रहे हैं, वहीं हर नुक्कड़ पर स्कूल-कोचिंग लेकर बैठा बिलासपुर निरक्षरता के अंधेरे में कैसे डूब गया—यह नीति-निर्माताओं के लिए सबसे बड़ा चुभता सवाल है। ‘स्कूल चलो अभियान’ का करोड़ों का बजट कहाँ गया? सालों से 'सब पढ़ें, सब बढ़ें' और 'स्कूल चलो अभियान' के नाम पर सरकारी खजाने से करोड़ों रुपये पानी की तरह बहाए गए। फाइलों में दर्ज हुआ—शत-प्रतिशत दाखिला। लेकिन हकीकत में क्या हुआ? * कागजी एडमिशन बनाम जमीनी हकीकत: कागजों पर बच्चे का दाखिला तो दर्ज हो गया, लेकिन वह कभी ककहरा सीख ही नहीं पाया। * मजदूरी और पलायन का दुष्चक्र: बिलासपुर के ग्रामीण अंचलों और शहर की मलिन बस्तियों के बच्चे बाल मजदूरी, रोजी-रोटी और पलायन के भंवर में फँसकर स्कूल की चौखट से हमेशा के लिए दूर हो गए। * 'साइलेंट ड्रॉपआउट': बच्चे स्कूल छोड़ते गए, लेकिन प्रशासनिक फाइलों में दाखिले की संख्या वैसी ही बनी रही ताकि अफसरों की पीठ थपथपाई जा सके। ‘उल्लास’ के सहारे चेहरा चमकाने की तैयारी इस रिपोर्ट के सार्वजनिक होते ही शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है। अब केंद्र और राज्य सरकार के साझा प्रयास से चलने वाले ‘उल्लास’ (नव भारत साक्षरता कार्यक्रम) के जरिए इन असाक्षरों को साक्षर बनाने की आपात कवायद शुरू की गई है। गड़बड़ी रोकने के लिए निरक्षरों और स्वयंसेवी शिक्षकों का डिजिटल पोर्टल पर पंजीयन कराया जा रहा है, जिसके बाद एक महा-परीक्षा आयोजित की जाएगी। बड़ा सवाल: क्या एक परीक्षा से मिट जाएगा यह दाग? प्रशासनिक स्तर पर योजनाएं तो बन रही हैं, लेकिन कड़वा सच यही है कि जब तक शिक्षकों की नियमित जवाबदेही तय नहीं होगी और शहर की झुग्गियों व सुदूर गांवों में पल रहे आखिरी बच्चे तक निगरानी तंत्र नहीं पहुंचेगा, तब तक सिर्फ एक परीक्षा करा देने से यह कलंक नहीं धुलने वाला। कंक्रीट की चौड़ी सड़कें और चमचमाते संस्थान किसी शहर का भविष्य तय नहीं करते; अगर शहर की आबादी का एक बड़ा हिस्सा अपने दस्तखत तक न कर पाए, तो यह विकास सिर्फ कागजी छलावा ही माना जाएगा। अभिषेक कुमार पाण्डेय स्टेट हेड रिपोर्टर बिलासपुर छत्तीसगढ़ हमर प्रदेश सी जी
विकसित भारत के निर्माण में बिलासपुर के युवा निभाएंगे नेतृत्वकारी भूमिका*
*विकसित भारत के निर्माण में बिलासपुर के युवा निभाएंगे नेतृत्वकारी भूमिका* बिलासपुर, 12 सितंबर 2026/ भारत सरकार के युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय द्वारा युवाओं को राष्ट्र निर्माण से जोड़ने के उद्देश्य से विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग का आयोजन किया जा रहा है। इसके माध्यम से युवाओं को अपने विचार, नवाचार एवं नेतृत्व क्षमता प्रदर्शित करने तथा विकसित भारत के निर्माण के लिए अपना दृष्टिकोण साझा करने का अवसर मिलेगा। मेरा युवा भारत बिलासपुर के उप निदेशक श्री नितिन शर्मा ने बताया कि जिले में अधिक से अधिक युवाओं को इस पहल से जोड़ने के लिए जागरूकता एवं सहभागिता गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं।युवा 30 सितंबर 2026 तक माय भारत पोर्टल पर आयोजित क्विज में भाग ले सकते हैं। चयन प्रक्रिया क्विज से शुरू होकर जिला, राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर तक होगी। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले युवाओं को राष्ट्रीय मंच पर अपनी प्रतिभा एवं नेतृत्व क्षमता प्रदर्शित करने का अवसर मिलेगा। उप निदेशक श्री नितिन शर्मा ने पात्र युवाओं, युवा संगठनों, महाविद्यालयों एवं शैक्षणिक संस्थानों से जुड़े युवाओं से अंतिम तिथि से पूर्व अधिक से अधिक संख्या में क्विज में सहभागिता सुनिश्चित करने का आह्वान किया है। *युवा देश की सबसे बड़ी शक्ति : कलेक्टर* कलेक्टर श्री संजय अग्रवाल ने जिले के युवाओं से विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग में अधिक से अधिक सहभागिता का आह्वान करते हुए कहा कि युवा देश की सबसे बड़ी शक्ति हैं। उनके विचार, नवाचार और नेतृत्व क्षमता विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने युवाओं से इस अवसर का लाभ उठाकर अपनी प्रतिभा एवं विचारों को राष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने की अपील की। अभिषेक कुमार पाण्डेय स्टेट हेड रिपोर्टर बिलासपुर छत्तीसगढ़ हमर प्रदेश सी जी
दीपक बैज के बयान और 'तारा कोल ब्लॉक' विवाद पर आधारित प्रभावी समाचार रिपोर्ट:
दीपक बैज के बयान और 'तारा कोल ब्लॉक' विवाद पर आधारित प्रभावी समाचार रिपोर्ट: तारा कोल ब्लॉक पर आर-पार के मूड में कांग्रेस: दीपक बैज का साय सरकार पर तीखा वार—'पूंजीपतियों के मुनाफे के लिए जंगल और आदिवासियों की बलि बर्दाश्त नहीं' 'विधानसभा के सर्वसम्मत संकल्प की उड़ाई गईं धज्जियां, तुरंत रद्द हो आवंटन' — कांग्रेस ने दी बड़े जनआंदोलन की चेतावनी विशेष संवाददाता | रायपुर हसदेव अरण्य क्षेत्र में 'तारा कोल ब्लॉक' के आवंटन को लेकर छत्तीसगढ़ की सियासत में एक बार फिर बड़ा भूचाल आ गया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने भाजपा की साय सरकार पर उद्योगपतियों के हित साधने और आदिवासियों के अधिकारों को कुचलने का सीधा आरोप लगाते हुए मोर्चा खोल दिया है। दीपक बैज ने दो टूक शब्दों में कहा कि "जल, जंगल और जमीन की कीमत पर कॉरपोरेट मित्रों की तिजोरियां भरने का षड्यंत्र चल रहा है, जिसे कांग्रेस किसी भी कीमत पर सफल नहीं होने देगी।" विधानसभा के संकल्प को दरकिनार करने का आरोप बैठक/सम्मेलन के समापन अवसर पर आक्रामक रुख अपनाते हुए पीसीसी चीफ ने सरकार को 2022 के सर्वसम्मत प्रस्ताव की याद दिलाई। उन्होंने कहा: > "छत्तीसगढ़ विधानसभा के सभी 90 विधायकों ने दलगत राजनीति से ऊपर उठकर हसदेव अरण्य क्षेत्र में नए कोल ब्लॉकों के खनन पर रोक लगाने का सर्वसम्मत संकल्प पारित किया था। लेकिन भाजपा सत्ता में आते ही अपने ही वादों और विधानसभा की गरिमा को दरकिनार कर तारा कोल ब्लॉक को पूंजीपतियों की झोली में डालने पर आमादा है। यह सीधे तौर पर जनभावनाओं और लोकतंत्र का अपमान है।" > दीपक बैज के 4 सीधे वार: * 'पेसा' और ग्राम सभाओं के अधिकार कुचले गए: कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि संविधान की पांचवीं अनुसूची और पेसा (PESA) कानून को ताक पर रखकर स्थानीय आदिवासियों और ग्राम सभाओं की सहमति के बिना नीलामी व प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। * पर्यावरण का सबसे बड़ा विनाश: हसदेव का जंगल केवल पेड़ों का समूह नहीं, बल्कि राज्य के पर्यावरण का फेफड़ा और समृद्ध जैव विविधता का केंद्र है। तारा कोल ब्लॉक के लिए लाखों पेड़ों की संभावित कटाई से इंसानों और हाथियों के बीच का संघर्ष विकराल रूप ले लेगा। * आदिवासी हितों पर कॉरपोरेट का कब्जा: बैज ने कटाक्ष करते हुए कहा कि भाजपा का 'विकास मॉडल' केवल कुछ चुनिंदा उद्योगपतियों के फायदे तक सिमट कर रह गया है। राज्य के संसाधनों को औने-पौने दाम पर बाहरी कंपनियों को सौंपा जा रहा है। * आवंटन तत्काल रद्द करने की मांग: कांग्रेस ने राज्य व केंद्र सरकार से मांग की है कि तारा कोल ब्लॉक के आवंटन को अविलंब निरस्त किया जाए। 'सड़क से सदन तक लड़ेगी कांग्रेस' दीपक बैज ने साफ चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने हठधर्मिता नहीं छोड़ी और तारा कोल ब्लॉक के आवंटन को रद्द नहीं किया, तो कांग्रेस स्थानीय आदिवासियों और पर्यावरण प्रेमियों के साथ मिलकर सड़क से लेकर सदन तक निर्णायक और उग्र आंदोलन छेड़ेगी। हसदेव क्षेत्र में नए ब्लॉक की सुगबुगाहट के बाद अब दीपक बैज के इस कड़े रुख ने स्पष्ट कर दिया है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा छत्तीसगढ़ की राजनीति का सबसे गर्म सियासी अखाड़ा बनने वाला है। अभिषेक कुमार पाण्डेय स्टेट हेड रिपोर्टर बिलासपुर छत्तीसगढ़ हमर प्रदेश सी जी
सरकारी फाइलों में 'खानापूर्ति' पर भड़के रायगढ़ कलेक्टर: दो टूक बोले—'कागजी समाधान नहीं, आवेदक को राहत चाहिए; किस्त लेकर घर न बनाने वालों से होगी वसूली'
सरकारी फाइलों में 'खानापूर्ति' पर भड़के रायगढ़ कलेक्टर: दो टूक बोले—'कागजी समाधान नहीं, आवेदक को राहत चाहिए; किस्त लेकर घर न बनाने वालों से होगी वसूली' लापरवाहों पर कसेंगे पेंच, तो अच्छा काम करने वाले 19 कर्मियों को कलेक्ट्रेट में मिला सम्मान रायगढ़ सरकारी दफ्तरों में अक्सर शिकायतों को कागजों पर निपटाकर फाइलें बंद कर दी जाती हैं, लेकिन रायगढ़ कलेक्ट्रेट की शुक्रवार की बैठक में कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी के तेवर साफ बता रहे थे कि अब यह ढर्रा नहीं चलेगा। समय-सीमा (TL) बैठक में अधिकारियों के पसीने तब छूटे जब कलेक्टर ने जनदर्शन और सीएम हेल्पलाइन की शिकायतों पर सीधे कहा—"निराकरण केवल औपचारिकता न बने। आवेदक को जमीन पर राहत मिलनी चाहिए और उसे यह पता भी होना चाहिए कि उसकी समस्या पर क्या कार्रवाई हुई।" समीक्षा बैठक सिर्फ रूटीन चर्चा तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसमें जनता के पैसे की बर्बादी से लेकर फाइलों में अटके मकानों तक पर सख्त एक्शन का खाका खींचा गया। बैठक के 5 बड़े फैसले और सख्त संदेश: * किस्त हजम करने वालों से वसूली: प्रधानमंत्री आवास योजना का पैसा खाते में आने के बावजूद जिन हितग्राहियों ने निर्माण शुरू नहीं किया, उन पर डंडा चलेगा। कलेक्टर ने स्पष्ट कहा कि या तो तुरंत काम शुरू कराएं, अन्यथा शासन के नियमों के तहत वसूली की सख्त कार्रवाई करें। * शासकीय राशि पर निजी मुनाफाखोरी बंद: आरआरसी (राजस्व वसूली) मामलों में कलेक्टर ने साफ चेतावनी दी कि सरकारी राशि लेकर काम अधूरा छोड़ना या रुचि न दिखाना बर्दाश्त नहीं होगा। राशि के दुरुपयोग पर जिम्मेदारी तय कर सीधी कार्रवाई होगी। * क्वालिटी से समझौता बर्दाश्त नहीं: जल जीवन मिशन और पीडब्ल्यूडी के निर्माण कार्यों को लेकर अधिकारियों को फील्ड पर सतत निगरानी रखने को कहा गया है। "गुणवत्ता के साथ कोई समझौता नहीं" का स्पष्ट संदेश दिया गया। * किसानों और भू-अभिलेखों का निपटारा: खरीफ सीजन 2026-27 के मद्देनजर किसानों के एग्रीस्टैक पंजीयन, केसीसी और लोन वितरण की राह आसान करने के निर्देश दिए गए। साथ ही सरकारी जमीनों से अतिक्रमण हटाने और नक्शा-बटांकन के अटके मामलों को निपटाने का अल्टीमेटम दिया गया। * जर्जर भवनों पर नजर, मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन: किसी भी जर्जर सरकारी भवन में हादसे की गुंजाइश न रहे, इसके लिए तत्काल मुआयना करने और मेडिकल कॉलेज के ऑक्सीजन प्लांट को अविलंब चालू करने का टास्क सौंपा गया। सख्ती के बीच पीठ भी थपथपाई कलेक्टर ने जहां लापरवाही पर सख्त रुख अपनाया, वहीं बेहतर काम करने वालों की खुले दिल से हौसलाअफजाई की। विभिन्न विभागों में अनुकरणीय कार्य करने वाले 14 कर्मचारियों और ई-ऑफिस प्रणाली को गति देने वाले 5 तकनीकी कर्मचारियों को बैठक के दौरान सम्मानित किया गया। जिले में 17 सितम्बर से शुरू हो रहे महीने भर के 'सेवा संकल्प अभियान' को लेकर सभी विभागों को अंतिम तैयारी पुख्ता करने के निर्देश दिए गए हैं। बैठक में जिला पंचायत सीईओ अभिजीत बबन पठारे, नगर निगम आयुक्त बृजेश सिंह क्षत्रिय, एडीएम अपूर्व प्रियेश टोप्पो सहित जिले के आला प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। अभिषेक कुमार पाण्डेय स्टेट हेड रिपोर्टर बिलासपुर छत्तीसगढ़ हमर प्रदेश सी जी
श्री नृपेंद्र नाथ एसईसीएल निदेशक (तकनीकी) – योजना/परियोजना ) अतिरिक्त प्रभार ने किया पदभार ग्रहण
अभिषेक कुमार पाण्डेय स्टेट हेड रिपोर्टर बिलासपुर छत्तीसगढ़ हमर प्रदेश सी जी दिनांक 12 सितंबर 2026 श्री नृपेंद्र नाथ एसईसीएल निदेशक (तकनीकी) – योजना/परियोजना ) अतिरिक्त प्रभार ने किया पदभार ग्रहण सेंट्रल माइन प्लानिंग एंड डिजाइन इंस्टीट्यूट लिमिटेड (सीएमपीडीआई) के निदेशक (तकनीकी) श्री नृपेंद्र नाथ ने साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) के निदेशक (तकनीकी) – योजना/परियोजना का अतिरिक्त प्रभार ग्रहण किया है। एसईसीएल परिवार ने नई जिम्मेदारी संभालने पर उनका हार्दिक स्वागत करते हुए उन्हें बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं। इस अवसर पर उन्होंने एसईसीएल के निदेशक तकनीकी (संचालन) श्री रमेश चंद्र महापात्र से सौजन्य भेंट की। बड़ी संख्या में विभागाध्यक्ष एवं अधिकारी उपस्थित रहे। पढ़ें एसईसीएल के निदेशक (तकनीकी) – योजना/परियोजना श्री नृपेंद्र नाथ के बारे में श्री नृपेंद्र नाथ ने 1988 में आईआईटी (आईएसएम), धनबाद से स्नातक की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (सीसीएल) के एन.के. क्षेत्र से की और विश्व बैंक सहायता प्राप्त केडीएच परियोजना में लगभग दो दशकों तक महत्वपूर्ण योगदान दिया। अपने लंबे कार्यकाल के दौरान उन्होंने ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ईसीएल) की विभिन्न खदानों में परियोजना अधिकारी तथा सीसीएल के मगध-संघमित्रा क्षेत्र के क्षेत्रीय महाप्रबंधक सहित कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया। उनके कार्यकाल में मगध-संघमित्रा क्षेत्र ने प्रतिष्ठित 20 मिलियन टन उत्पादन क्लब में स्थान बनाया। ऑस्ट्रेलिया में प्रशिक्षित सिमटार्स-प्रमाणित प्रशिक्षक के रूप में श्री नाथ ने कोल इंडिया लिमिटेड की विभिन्न अनुषंगी कंपनियों में खान सुरक्षा प्रशिक्षण प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। खान सुरक्षा प्रबंधन योजनाओं के निर्माण एवं क्रियान्वयन में भी उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है। श्री नृपेंद्र नाथ को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी खनन क्षेत्र का अनुभव प्राप्त है। वर्ष 2024 में वे एजीटीएमपी प्रतिनिधिमंडल के सदस्य के रूप में कई यूरोपीय देशों के दौरे पर गए, जहाँ उन्होंने वैश्विक खनन प्रथाओं एवं आधुनिक तकनीकों का अनुभव प्राप्त किया। वर्तमान में वे सीएमपीडीआई के निदेशक (तकनीकी) के पद पर कार्यरत हैं और 31 अक्टूबर 2025 को उन्होंने इस पद का कार्यभार ग्रहण किया था। खनन परिचालन, परियोजना क्रियान्वयन, योजना एवं खान सुरक्षा के क्षेत्र में उनको व्यापक अनुभव है I
*उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने बिलासपुर में 52.41 करोड़ रुपए के सड़क विकास कार्यों का किया भूमिपूजन
*उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने बिलासपुर में 52.41 करोड़ रुपए के सड़क विकास कार्यों का किया भूमिपूजन* *पेंड्रीडीह चौक से नेहरू चौक तक 15.37 किमी सड़क का होगा मजबूतीकरण, हथनी-नवागांव-गोढ़ी-उडगन मार्ग का भी होगा निर्माण* बिलासपुर,12 सितंबर 2026/ उप मुख्यमंत्री एवं बिलासपुर जिले के प्रभारी मंत्री श्री अरुण साव ने आज बिलासपुर के रमा वैली में आयोजित कार्यक्रम में 52.41 करोड़ रुपए के विभिन्न सड़क विकास कार्यों का भूमिपूजन किया। इनमें 40.79 करोड़ रुपए की लागत से पेंड्रीडीह चौक से नेहरू चौक तक 15.37 किलोमीटर सड़क का मजबूतीकरण, 8.39 करोड़ रुपए की लागत से हथनी-नवागांव-गोढ़ी-उडगन मार्ग के 5.75 किलोमीटर सड़क निर्माण तथा बोदरी में 3.23 करोड़ रुपए की लागत से नवीन विश्राम गृह का निर्माण शामिल है। कार्यक्रम की अध्यक्षता स्थानीय विधायक श्री धरमलाल कौशिक ने की। उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने इस अवसर पर कहा कि इन सड़क विकास कार्यों के पूर्ण होने से हाई कोर्ट सहित शहर के विभिन्न क्षेत्रों में आने-जाने वाले लोगों को काफी सुविधा मिलेगी और यातायात सुगम होगा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार सड़क अधोसंरचना के विकास को प्राथमिकता दे रही है। पिछले ढाई वर्षों में अकेले बिलासपुर जिले में 1000 करोड़ रुपए से अधिक के सड़क निर्माण कार्यों को स्वीकृति दी गई है। इसी तरह बिलासपुर संभाग में लगभग 3500 करोड़ रुपए के सड़क विकास कार्य मंजूर किए गए हैं। बारिश के बाद इन सभी कार्यों में तेजी आएगी। श्री साव ने विभागीय अधिकारियों और ठेकेदारों को स्वीकृत कार्यों को समय पर प्रारंभ करने की आवश्यक तैयारियां अभी से शुरू करने के निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि प्रदेश में सड़क एवं पुल-पुलियों के निर्माण के लिए 12 हजार 666 करोड़ रुपए के कार्य स्वीकृत किए गए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में एक वर्ष में इतनी बड़ी संख्या में सड़क विकास कार्यों को स्वीकृति मिलना अभूतपूर्व है। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा घोषित एक-एक गारंटी को मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार पूरा कर रही है। गांव से लेकर शहर तक तेजी से विकास कार्य हो रहे हैं। केंद्र सरकार से भी प्रदेश के विकास के लिए विभिन्न योजनाओं में भरपूर सहयोग मिल रहा है। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद का कलंक छत्तीसगढ़ से मिट गया है और प्रदेश में निवेश एवं उद्योग स्थापित करने के लिए बड़ी संख्या में लोग आगे आ रहे हैं। युवाओं को रोजगार के साथ स्वरोजगार और उद्यमिता के अवसर उपलब्ध कराने के लिए कार्ययोजना पर काम किया जा रहा है, ताकि युवा नौकरी तलाशने वाले ही नहीं, बल्कि रोजगार देने वाले भी बनें। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विधायक श्री धरमलाल कौशिक ने अपने विधानसभा क्षेत्र में लगभग 400 करोड़ रुपए के सड़क विकास कार्यों की स्वीकृति के लिए उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के समग्र विकास के लिए अच्छी और गुणवत्तापूर्ण सड़कों का होना बेहद जरूरी है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देशभर में सड़क अधोसंरचना का तेजी से विस्तार हो रहा है। उन्होंने कहा कि नगरीय विकास के लिए भी सरकार द्वारा पर्याप्त बजट उपलब्ध कराया जा रहा है। कार्यक्रम में क्रेडा अध्यक्ष श्री भूपेंद्र सवनी, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री राजेश सूर्यवंशी, कलेक्टर श्री संजय अग्रवाल, नगर निगम आयुक्त श्री प्रकाश कुमार सर्वे, जिला भाजपा अध्यक्ष श्री दीपक सिंह सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे। अभिषेक कुमार पाण्डेय स्टेट हेड रिपोर्टर बिलासपुर छत्तीसगढ़ हमर प्रदेश सी जी
*रेल यात्रियों की संरक्षित एवं आरामदायक यात्रा के लिए दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे की 26 ट्रेनों में एलएचबी कोच का प्रावधान ।*
*रेल यात्रियों की संरक्षित एवं आरामदायक यात्रा के लिए दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे की 26 ट्रेनों में एलएचबी कोच का प्रावधान ।* *मजबूत एवं आधुनिक तकनीक से युक्त एलएचबी कोच से बढ़ी संरक्षा, आराम और यात्री सुविधा ।* *एलएचबी कोचों में अधिक बर्थ की उपलब्धता से यात्रियों को कन्फर्म बर्थ मिलने की संभावना में भी वृद्धि ।* *बिलासपुर, 12 सितंबर 2026* रेल यात्रियों की सुविधा एवं संरक्षित रेल परिचालन दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। यात्रियों को संरक्षित, आरामदायक एवं बेहतर यात्रा अनुभव प्रदान करने के उद्देश्य से दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे से चलने वाली ट्रेनों में चरणबद्ध रूप से पुराने आईसीएफ (इंटीग्रल कोच फैक्ट्री) कोचों के स्थान पर आधुनिक तकनीक से युक्त एलएचबी (लिंक हॉफमैन बुश) कोच लगाए जा रहे हैं। वर्तमान में दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे से चलने वाली 26 ट्रेनों के 34 रैक में एलएचबी कोच उपलब्ध हैं। एलएचबी कोच मजबूत संरचना एवं आधुनिक तकनीक से निर्मित होने के कारण रेल परिचालन की दृष्टि से अधिक सुरक्षित और संरक्षित माने जाते हैं। इन कोचों की डिजाइन एवं निर्माण तकनीक यात्रियों की संरक्षा को ध्यान में रखते हुए विकसित की गई है। एलएचबी कोच में बेहतर सस्पेंशन प्रणाली का उपयोग किया गया है, जिससे यात्रा के दौरान झटके और कंपन अपेक्षाकृत कम महसूस होते हैं तथा यात्रियों को अधिक आरामदायक यात्रा अनुभव प्राप्त होता है। साथ ही, कोचों की आधुनिक संरचना एवं बेहतर स्थिरता तेज गति से रेल परिचालन के लिए भी उपयुक्त है। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे की बिलासपुर-भगत की कोठी, बिलासपुर-बीकानेर, बिलासपुर-बक्सर, बिलासपुर-एर्णाकुलम, बिलासपुर-चेन्नई, बिलासपुर-पुणे, रायपुर-कोरबा, बिलासपुर-अमृतसर छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस, दुर्ग-निजामुद्दीन संपर्कक्रांति, दुर्ग-जम्मूतवी, दुर्ग-नौतनवा, दुर्ग-कानपुर, दुर्ग-अजमेर, दुर्ग-ऊधमपुर, दुर्ग-निजामुद्दीन हमसफर, दुर्ग-भोपाल अमरकंटक एक्सप्रेस, रायगढ़-गोंदिया जनशताब्दी, कोरबा-इतवारी शिवनाथ एक्सप्रेस, बिलासपुर-नागपुर इंटरसिटी, बिलासपुर-रीवा, बिलासपुर-इंदौर नर्मदा एक्सप्रेस, बिलासपुर-येलहंका, दुर्ग-अंबिकापुर तथा अंबिकापुर-शहडोल ट्रेनों में एलएचबी कोच की सुविधा उपलब्ध है। एलएचबी कोचों का एक महत्वपूर्ण लाभ इनमें उपलब्ध अधिक यात्री क्षमता भी है। सामान्य आईसीएफ स्लीपर कोच में 72 बर्थ की तुलना में एलएचबी स्लीपर कोच में 80 बर्थ उपलब्ध होती हैं। इसी प्रकार आईसीएफ एसी-3 कोच में 64 बर्थ की तुलना में एलएचबी एसी-3 कोच में 72 बर्थ तथा आईसीएफ एसी-2 कोच में 46 बर्थ की तुलना में एलएचबी एसी-2 कोच में 62 बर्थ उपलब्ध होती हैं। इससे एक ओर यात्रियों के लिए अधिक बर्थ उपलब्ध होती हैं, वहीं दूसरी ओर अधिक से अधिक यात्रियों को कन्फर्म बर्थ उपलब्ध कराने में सहायता मिलती है। *एलएचबी कोच की पृष्ठभूमि:* एलएचबी कोच का नाम जर्मनी की कंपनी लिंक हॉफमैन बुश के नाम पर पड़ा है। भारतीय रेलवे में इन कोचों को वर्ष 1999 में शामिल किया गया था। वर्तमान में इनका निर्माण कपूरथला स्थित रेलवे कोच फैक्ट्री में किया जाता है। आधुनिक डिजाइन, मजबूत संरचना, बेहतर सस्पेंशन प्रणाली, अधिक यात्री क्षमता तथा संरक्षित एवं आरामदायक यात्रा की विशेषताओं के कारण भारतीय रेलवे में एलएचबी कोचों का उपयोग निरंतर बढ़ाया जा रहा है। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे द्वारा भी यात्रियों की संरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए आधुनिक तकनीक और सुविधाओं को लगातार अपनाया जा रहा है। एलएचबी कोच इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं, जो यात्रियों को संरक्षित, आरामदायक और बेहतर यात्रा अनुभव प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा हैं। ********** अभिषेक कुमार पाण्डेय स्टेट हेड रिपोर्टर बिलासपुर छत्तीसगढ़ हमर प्रदेश सी जी
एसईसीएल मुख्यालय में राजभाषा पखवाड़ा 2026 का शुभारंभ
अभिषेक कुमार पाण्डेय स्टेट हेड रिपोर्टर बिलासपुर छत्तीसगढ़ हमर प्रदेश सी जी दिनांक 12 सितंबर 2026 *एसईसीएल मुख्यालय में राजभाषा पखवाड़ा 2026 का शुभारंभ* एसईसीएल मुख्यालय में 12 सितंबर 2026 को ‘राजभाषा पखवाड़ा उद्घाटन समारोह’ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता निदेशक (मानव संसाधन) श्री बिरंची दास ने की। मुख्य सतर्कता अधिकारी श्री हिमांशु जैन एवं निदेशक रमेश चंद्र महापात्र तकनीकी (संचालन) विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस अवसर पर विभिन्न विभागाध्यक्षों, अधिकारियों-कर्मचारियों एवं श्रमसंघ प्रतिनिधियों की उपस्थिति रही। राजभाषा पखवाड़ा का आयोजन एसईसीएल के समस्त क्षेत्रों में भी 14 से 28 सितंबर 2026 तक किया जा रहा है। कार्यक्रम का शुभारंभ कार्यक्रम अध्यक्ष एवं विशिष्ट अतिथियों द्वारा माँ सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन एवं माल्यार्पण के साथ किया गया। इस अवसर पर निदेशक (मानव संसाधन) श्री बिरंची दास ने कहा कि हिंदी हमें एकसूत्र में पिरोने का कार्य करती है। उन्होंने कहा, “हिंदी सरल, सुगम और सुबोध भाषा है तथा पूरे देश में इसकी व्यापक स्वीकार्यता है। कार्यालयीन कार्यों में हिंदी का अधिकाधिक प्रयोग किया जाना चाहिए। साथ ही, सभी अधिकारी-कर्मचारी राजभाषा पखवाड़े के दौरान आयोजित प्रतियोगिताओं में बढ़-चढ़कर भाग लें।” मुख्य सतर्कता अधिकारी श्री हिमांशु जैन ने कहा, “हिंदी हमारे आपसी संवाद को सहज और प्रभावी बनाने का माध्यम है। कार्यालयीन कार्यों में हिंदी के प्रयोग से कार्यों में सरलता और सहजता आती है। हमें दैनिक कार्यों में हिंदी के अधिकाधिक प्रयोग को बढ़ावा देना चाहिए। राजभाषा के प्रति सभी को अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए।” तकनीकी (संचालन) रमेश चंद्र महापात्र ने कहा, “हिंदी हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और राष्ट्रीय एकता का महत्वपूर्ण आधार है। कार्यालयीन कार्यों में हिंदी के प्रयोग को और अधिक बढ़ावा दिया जाना चाहिए। हिंदी के माध्यम से हम अपने विचारों को सहजता से व्यक्त कर सकते हैं। राजभाषा पखवाड़ा इस दिशा में जागरूकता बढ़ाने का महत्वपूर्ण अवसर है।” इस अवसर पर माननीय केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री श्री जी. किशन रेड्डी एवम केंद्रीय कोयला राज्य मंत्री श्री सतीश चंद्र दुबे के संदेश का पठन किया गया। कार्यक्रम के दौरान प्रबंधक (राजभाषा) श्रीमती सविता निर्मलकर ने राजभाषा पखवाड़े के उद्देश्यों एवं इसके अंतर्गत आयोजित होने वाली विभिन्न प्रतियोगिताओं की जानकारी दी।